फिर सुप्रीम कोर्ट के राष्ट्रीय राजमार्गों से शराब की दुकान हटाने के फैसले का क्या होगा?

फिर सुप्रीम कोर्ट के राष्ट्रीय राजमार्गों से शराब की दुकान हटाने के फैसले का क्या होगा?ताजा मामले में राजस्थान ने उन राज्य राजमार्गों को डिनोटिफाइड किया है जो शहर व कस्बों से होकर गुजरते हैं।

लखनऊ। हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में कहा है कि राष्ट्रीय और राज्य राजमार्गों के 500 मीटर की परिधि में चल रही शराब की दुकानों को बंद किया जाए और इस दायरे में स्थित होटल, रेस्टोरेंट और बार में भी शराब परोसने की अनुमति ना दी जाए।

इस फैसले का तोड़ अब इन होटल और रेस्टोरेंट के मालिकों ने खोज लिया है।

ताजा मामले में राजस्थान ने उन राज्य राजमार्गों को डिनोटिफाइड किया है जो शहर व कस्बों से होकर गुजरते हैं। यानी शहरों और कस्बों से जाने वाले राजमार्गों से हाइवे का टैग हटा दिया है।

इन हिस्सों में शराब की करीब 450 दुकानें हैं। इस तरह संभावना जताई जा रही है कि शराब की दुकानें सुप्रीम कोर्ट के फैसले के असर से बच जाएंगी और इसके लिए सरकारें भी मदद कर रही हैं। हालांकि राजस्थान के लोक निर्माण विभाग के चीफ इंजीनियर शिवलाहरी शर्मा का एक वेबसाइट से बातचीत में कहना है कि इस प्रक्रिया का सुप्रीम कोर्ट के फैसले से कोई लेना-देना नहीं है।

उन्होंने कहा कि राज्य हाइवे का टैग केवल उन हिस्सों से हटाया गया है जहां बाईपास रोड का निर्माण चल रहा है। जब बाईपास का निर्माण होता है तो एक ही जगह एक नंबर के दो हाइवे नहीं हो सकते, बचा हुआ हिस्सा लोकल बॉडी के अंतर्गत आता है।

सुप्रीम कोर्ट ने 31 मार्च को फैसला सुनाया था कि एक अप्रैल से नैशनल और स्टेट हाइवे के 500 मीटर की परिधि में शराब की दुकानों को बंद किया जाए। न्यायालय ने इस मामले में केवल हिमाचल प्रदेश, मेघालय और सिक्किम को इस फैसले से छूट दी थी क्योंकि वहां जनसंख्या 20,000 से कम है। इन राज्यों में शराब की दुकानों को हाइवे से 220 मीटर की परिधि से दूर रखा जाए।

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