नाबालिग को हथकड़ी लगा कोर्ट में किया पेश, जज ने भरी अदालत में सिपाही की उतरवाई वर्दी

नाबालिग को हथकड़ी लगा कोर्ट में किया पेश, जज ने भरी अदालत में सिपाही की उतरवाई वर्दीजज शिवानंद मिश्र की अदालत ने सन्हौला थाने के सिपाही करण कुमार की भरी अदालत वर्दी उतरवा ली।

बिहार। बिहार के भागलपुर कोर्ट में न्यायाधीश ने जब एक सिपाही को पुलिस की वर्दी उतारने का आदेश दिया तो कोर्ट में मौजूद लोग दंग रह गए। आखिर सब सोच में पड़ गए की आखिर ऐसा क्यों हुआ। दरअसल पुलिस कर्मी ने पेशी पर लाए नाबालिग को कोर्ट परिसर में हथकड़ी पहना कर घुमा रहा था।

सोमवार को प्रथम अपर सत्र न्यायाधीश शिवानंद मिश्र की कोर्ट में सन्हौला थाना के एक पुलिस कर्मी ने नाबालिग लड़की के अपहरण मामले में एक नाबालिग आरोपित को हथकड़ी के साथ कोर्ट में पेश किया। न्यायाधीश आरोपित के हाथ में हथकड़ी को देख भड़क गये। उस समय सन्हौला थाने में पदस्थापित करण कुमार (बैच नंबर 791) आरोपित की पेशी करने के दौरान थे। कोर्ट ने सिपाही को पहले जम कर फटकार लगायी और उन्हें वर्दी उतारने का निर्देश दिया।

ये है मामला

बिहार में भागलपुर के सन्हौला थाने में 9 अगस्त को 13 साल की लड़की के अपहरण की प्राथमिकी दर्ज करायी गयी थी। लड़की के पिता ने आरोप लगाया था कि 9 अगस्त की सुबह 6 बजे कोचिंग पढ़ने गई उसकी बेटी का कमालपुर मोहल्ला के एक युवक ने शादी की नीयत से अपहरण कर लिया है। लड़की के पिता ने लड़के के परिजनों के खिलाफ भी मामला दर्ज कराया था। पुलिस ने आरोपी को रविवार को गिरफ्तार कर लिया था। सन्हौला थानाध्यक्ष ने उसे दो सिपाही के साथ न्यायालय में पेश करने के लिए सोमवार को भेजा। दोपहर बाद कोर्ट में युवक की पेशी हुई।

जज ने सिपाही को बनियान में रखा खड़ा , दूसरे कर्मचारी ने दी शर्ट

एडीजे प्रथम ने आरोपी युवक से उसकी उम्र पूछी। युवक ने बताया कि उसकी जन्म तिथि 4 जून, 2000 है। युवक ने बताया, उसने 2015 में मैट्रिक की परीक्षा दी थी। उस हिसाब वह नाबालिग है। अदालत ने आरोपी से पूछा- उसे पुलिस गिरफ्तार के बाद कैसे थाना लाई और उसे थाना से अदालत कैसे लाया गया। इस पर युवक ने कहा कि उसे हथकड़ी पहनाकर यहां लाया गया। इसके बाद डॉक के पास खड़े सिपाही से भी जज ने पूछा- इसे लेकर आप आए हैं? आपने इसे हथकड़ी भी पहनाई थी? आपको कानून की जानकारी है कि नहीं? नाबालिग को न तो हथकड़ी पहनाना है और न ही उसे वर्दी में कोर्ट लाना है। सिपाही कुछ जवाब दे पाता कि जज ने फैसला सुना दिया- इसकी वर्दी खुलवाई जाए। फिर क्या था सिपाही ने चुपचाप वर्दी उतार दी। बनियान में खड़े सिपाही को बाहर दूसरे कर्मी ने शर्ट दिया तब वह दोबारा कोर्ट में आया।

सिपाही के जवाब के बाद दोबारा वर्दी मिली

सिपाही ने जवाब में कहा- हुजूर, एफआईआर में सूचक ने आरोपी की उम्र 18 बतायी थी। इसलिए इसे नाबालिग नहीं मानते हुए सामान्य आरोपी की तरह कोर्ट में पेश किया गया था। आरोपी ने थाने में भी वास्तविक उम्र नहीं बतायी थी। अब इसका मेडिकल टेस्ट करवाकर सही उम्र का पता लगाया जाएगा। सिपाही के जवाब से संतुष्ट होने के बाद उसे दोबारा वर्दी पहनने का आदेश दिया गया। आरोपी को हिदायत भी दी गई कि मेडिकल जांच में उम्र गलत पायी गयी तो बड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

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