सुप्रीम कोर्ट के जज हुए मीडिया से मुख़ातिब

सुप्रीम कोर्ट के जज हुए मीडिया से मुख़ातिबजजों की प्रेस कॉनफ्रैंस

आज़ाद हिंदुस्तान में पहली बार सुप्रीम कोर्ट के 4 जजों ने शुक्रवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस की और कहा कि सुप्रीम कोर्ट में सब कुछ ठीक नहीं चल रहा। 4 सीनियर जज जस्टिस चेलमेश्वर, जस्टिस मदन लोकुर, जस्टिस कुरियन जोसेफ, जस्टिस रंजन गोगोई ने मीडिया से बातकर सुप्रीम कोर्ट की प्रशासनिक प्रक्रियाओं पर सवाल खड़े किए। ये घटना किसी लोकतांत्रिक देश में हल्के में नहीं आंकी जा सकती।

जस्टिस चेलामेश्वर ने प्रेस कॉनफ्रेंस के दौरान कहा, 'करीब दो महीने पहले हम 4 जजों ने चीफ जस्टिस को पत्र लिखा और मुलाकात की। हमने उनसे बताया कि जो कुछ भी हो रहा है, वह सही नहीं है। प्रशासन ठीक से नहीं चल रहा है। यह मामला एक केस के असाइनमेंट को लेकर था।'

CJI से कहा लेकिन सब बेकार गया। इस तरह लोकतंत्र खतरे में आ जाएगा, न्यायपालिका में ये कभी नहीं हुआ।
जस्टिस चेलमेश्वर

मीडिया से मुखातिब होने पर जजों से कुछ सवाल भी किये गए लेकिन चारों जजों ने कहा कि हम बातों का पूरा खुलासा नहीं करेंगे क्योंकि इससे कोर्ट की छवि को धक्का लग सकता है। उन्होंने ये भी कहा कि "हम मामले को लेकर मीडिया में आने को इसलिए मजबूर हुए हैं ताकि आज से बीस साल बाद कोई ये न कहे कि हमनें आत्मा बेच दी"

'राष्ट्र विचार करे CJI पर महाभियोग चले या नहीं'

मीडिया से बात करते वक्त वरिष्ठ जज चेलमेश्वर ने कहा कि उनके खत पर अब देश को सोचना चाहिए कि मुख्य न्यायाधीश के खिलाफ महाभियोग चलाया जाना चाहिए या नहीं। जस्टिस चेलमेश्वर ने कहा कि यह खुशी की बात नहीं है कि हमें प्रेस कॉन्फ्रेंस बुलानी पड़ी है। सुप्रीम कोर्ट का प्रशासन सही से नहीं चल रहा है। बीते कुछ महीनों में वो चीजें हुई हैं, जो नहीं होनी चाहिए थीं। इस प्रेस कॉनफ्रेंस से देश में हर तरफ हलचल मच गई है, ज़ाहिर है ये कोई छोटी घटना नहीं है अब देखना ये है कि ये मामला आगे जाकर क्या रुख लेता है।

ये न्यायपालिका का अंदरूनी मामला है - सरकार

सूत्रों के हवाले से बताया जा रहा है कि सरकार ने इस मामले में कोई प्रतिक्रिया देने से इंकार कर दिया है। चारों जजों ने कोर्ट के प्रशासनिक मामलों में हो रही गड़बड़ियों को लेकर चीफ जस्टिस की निष्ठा पर सवाल उठाए हैं लिहाज़ा न सरकार की तरफ कोई इशारा है, न कोई सवाल। ऐसे में सरकार की कोई जवाबदेही बनती तो नहीं है लेकिन क्योंकि जजों ने ये भी कहा कि लोकतंत्र खतरें में है इसलिए मामले का संज्ञान लेना ज़रूरी हो जाता है। ये देखना दिलचस्प होगा कि इस ऐतिहासिक मामले में आगे क्या मोड़ आता है।

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