खेत में किया है काम, इसरो के हैं 'रॉकेट मैन', जानिए के. सिवन से जुड़ी खास बातें

खेत में किया है काम, इसरो के हैं

चंद्रयान-2 का लैंडर विक्रम शुक्रवार की देर रात चांद की सतह पर लैंड करने वाला था, लेकिन चांद से महज 2 किलोमीटर की दूरी पर लैंडर विक्रम का संपर्क इसरो से टूट गया। हालांकि चंद्रयान-2 ऑर्बिटर अब भी चंद्रमा की कक्षा का चक्कर लगा रहा है। इस मिशन को सोशल मीडिया पर सबसे ज्‍यादा चर्चा इस मिशन के सूत्रधार और इंडियन स्‍पेस रिसर्च ऑर्गनाइजेशन (इसरो) के चेयरमैन कैलासावडिवू सिवन की हो रही है। लैंडर विक्रम से संपर्क टूटने, सिवन के भावुक होने और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के उन्हें लगाने को लेकर लोग अपने हिसाब से चर्चा कर रहे हैं। ट्वीटर पर #ProudOfISRO ट्रेंड कर रहा है।

इसरो चेयरमैन के. सिवन का जन्‍म 14 April 1957 को तमिलनाडु के कन्‍याकुमारी जिले के सरक्‍कलविलई गांव के एक साधारण किसान परिवार में हुआ था। टाइम्‍स ऑ‍फ इंडिया की खबर के मुताबिक, सिवन अपने परिवार में ग्रैजुएट होने वाले पहले शख्‍स थे। गरीबी की वजह से उनके भाई और दो बहनों को पढ़ाई बीच में ही छोड़नी पड़ी।

सिवन ने TOI को बताया है कि 'मैं जब कॉलेज में था तो अपने पिता की खेती में मदद करता था। खेती की वजह से मेरे पिता ने ऐसे कॉलेज में दाखिला दिलाया जो हमारे घर के पास था, ताकि मैं खेती में मदद भी कर सकूं। जब मैंने बीएससी (मैथ्‍स) को 100 प्रतिशत नंबरों से पास किया तब जाकर उन्‍होंने अपना विचार बदला।'

इसरो चेयरमैन के सिवन (फाइल फोटो)इसरो चेयरमैन के सिवन (फाइल फोटो)

सिवन की शुरुआती शिक्षा एक सरकारी स्‍कूल में हुई थी। इस स्‍कूल में तमिल में पढ़ाई होती थी। उन्‍होंने नागरकोइल के एसटी हिंदू कॉलेज से ग्रैजुएशन किया। इसके बाद मद्रास इंस्टिट्यूट ऑफ टेक्‍नॉलजी (एमआईटी) से एयरोनॉटिकल इंजिनियरिंग की पढ़ाई पूरी की। 1982 में आईआईएसी से इंजिनियरिंग की अपनी मास्‍टर्स डिग्री हासिल की। इसके बाद 2006 में उन्‍होंने आईआईटी बॉम्‍बे से एयरोस्‍पेस इंजिनियरिंग में पीएचडी की।

सिवन ने 1982 में इसरो जॉइन किया। इसरो का चेयरमैन बनने से पहले जनवरी 2018 तक वह विक्रम साराभाई स्‍पेस सेंटर (वीएसएससी) के डायरेक्‍टर थे। उन्‍हें इसरो का 'रॉकेट मैन' भी कहा जाता है। क्‍योंकि उन्होंने क्रायोजेनिक्‍स इंजन, पीएसएलवी, जीएसएलवी और आरएलवी प्रोग्राम में योगदान दिया है।

चंद्रयान-2' के लैंडर 'विक्रम' का बीती रात चांद पर उतरते समय जमीनी स्टेशन से संपर्क टूट गया था। इसके बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शनिवार की सुबह देश के नाम राष्ट्र को संबोधन करने के लिए इसरो सेटंर पहुंचे। पीएम मोदी जब बेंगलुरु के स्पेस सेंटर से बाहर निकल रहे थे तो इसरो अध्यक्ष के. सिवन को उन्होंने गले लगा लिया और इस दौरान के. सिवन काफी भावुक हो गए। पीएम मोदी ने इसरो अध्यक्ष को काफी समय तक गले लगाए रखा और उनका हौसला बढ़ाया।

इससे पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शनिवार सुबह आठ बजे राष्ट्र को संबोधित किया। उन्होंने कहा, ''आप वो लोग हैं जो मां भारती के लिए उसकी जय के लिए जीते हैं। आप वो लोग हैं जो मां भारती के जय के लिए जूझते हैं। आप वो लोग हैं जो मां भारती के लिए जज्बा रखते हैं। और इसलिए मां भारती का सिर ऊंचा हो इसके लिए पूरा जीवन खपा देते है। अपने सपनों को समाहित कर देते हैं।''

पीएम ने आगे कहा, ''आज चंद्रमा को छूने की हमारी इच्छा शक्ति, संकल्प और प्रबल और भी मजबूत हुई है। बीते कुछ घंटे से पूरा देश जगा हुआ है। हम अपने वैज्ञानिकों के साथ खड़े हैं और रहेंगे। हम बहुत करीब थे लेकिन हमें आने वाले समय में और दूरी तय करना है. सभी भारतीय आज खुद को गौरवान्वित महसूस कर रहा है। हमें अपने स्पेस प्रोग्राम और वैज्ञानिकों पर गर्व है।''

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