जम्मू-कश्मीर: इस शैक्षणिक वर्ष मात्र 80 दिन खुले स्कूल, कैसे होगी परीक्षा !

जम्मू-कश्मीर: इस शैक्षणिक वर्ष मात्र 80 दिन खुले स्कूल, कैसे होगी परीक्षा !कश्मीर में एक बार फिर से शिक्षा व्यवस्था बेहाल।

तौसीफ अहमद

लखनऊ। आतंकवादी कमांडर बुहरन वानी की 8 जुलाई, 2016 को हुई हत्या के बाद हुए हंगामे, पुलिस द्वारा लगाए गए कर्फ्यू और कश्मीरी अलगाववादियों द्वारा बुलाए गए बंद के कारण कश्मीर के स्कूलों की शिक्षा व्यवस्था का बुरा हाल है। एक कश्मीरी महिला ने बताया कि इन घटनाओं के बाद उनका बेटा 130 दिनों तक घर पर ही रहा और बहुत कम दिन ही स्कूल जा पाया।

27 मई 2017 को आतंकी संगठन हिजबुल मुजाहिदीन के कमांडर सबजार भट की हत्या के बाद राज्य में एक बार फिर हिंसा भड़कने की संभावना है। हत्या के दिन ही अलगाववादियों ने भट्ट की मृत्यु के शोक के लिए तीन दिन की हड़ताल और विरोध प्रदर्शन की घोषणा की। इसके बाद कश्मीर में एक बार फिर से शिक्षा व्यवस्था बेहाल हो गई।

संसदीय उप-चुनाव में हुए उपद्रव के कारण भी बन्द हुए स्कूल

9 अप्रैल, 2017 से श्रीनगर-बड़गाम संसदीय निर्वाचन क्षेत्र के उप-चुनावों के बाद से कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में शिक्षा बार-बार बाधित हुई है। चुनाव के दौरान व्यापक हिंसा के परिणामस्वरूप आठ नागरिकों की मौत हुई और स्कूलों और कॉलेजों को चार दिन तक बंद रखा गया। इसके बाद में कुछ यातना वीडियो वायरल हुए थे, जिससे कॉलेज और विश्वविद्यालय के छात्र आवेश में आ गए। अब, महिलाओं सहित छात्र विरोध प्रदर्शन में हिस्सा ले रहे हैं।

इस वर्ष आशंका है कि सुरक्षा स्थिति फिर से बिगड़ सकती है। छात्रों का विरोध प्रदर्शन को देखते हुए एहतियात के तौर पर जम्मू-कश्मीर सरकार ने कई बार शैक्षिक संस्थानों, विशेषकर कॉलेजों को बंद रखने के लिए आदेश दिया है। उदाहरण के लिए, श्रीनगर की एसपी हायर सेकेंडरी स्कूल को कम से कम छह मौकों पर बंद कर दिया गया है, जिसमें हाल का 18 मई, 2017 भी शामिल हैं। अप्रैल 2017 के एक आदेश के बाद कश्मीर में शिक्षा संस्थान लगातार पांच दिनों तक बंद रहे थे।

फेसबुक के ज़रिए शिक्षाविद कर रहे छात्रों से कक्षा में वापस लौटने की अपील

शिक्षाविदों और सिविल सोसायटी के कार्यकर्ता फेसबुक पर अपील कर रहे हैं कि छात्र कक्षा में वापस जाएं। सरकार के द्वारा 27 अप्रैल, 2017 को फेसबुक और ट्विटर सहित 22 सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म को ब्लॉक करने के निर्णय के बाद से सोशल मीडिया तक पहुंचने के लिए कश्मीर में रहने वाले लोग वर्चुअल प्राइवेट नेटवर्क (वीपीएन) का उपयोग कर रहे हैं। यह सार्वजनिक नेटवर्क में एक निजी नेटवर्क का विस्तार है।

जम्मू और कश्मीर के शिक्षा मंत्री सय्यद अल्ताफ बुखारी ने 18 मई 2017 को प्रदर्शन करने वाले छात्रों को चेतावनी देते हुए कहा कि कक्षा में कम उपस्थित रहने वाले छात्रों को परीक्षा की अनुमति नहीं दी जाएगी।

गृह मंत्रालय और जम्मू-कश्मीर पुलिस द्वारा साझा किए गए अधिकारिक डेटाबेस, विभिन्न सर्वेक्षण और रिपोर्टों के विश्लेषण से पता चलता है कि 8 जुलाई, 2016 से शैक्षणिक संस्थान 197 कार्य दिवसों में से 80 दिन खुले रहे हैं। यानी 59.39 फीसदी कार्य दिवसों पर बंद रहे हैं। यह तब है जब जम्मू-कश्मीर पुलिस को भारत के सभी प्रदेशों से ज़्यादा राशि प्रदान की जाती रही है।

ताजा अपडेट के लिए हमारे फेसबुक पेज को लाइक करने के लिए यहां, ट्विटर हैंडल को फॉलो करने के लिए यहां क्लिक करें।

More Stories


© 2019 All rights reserved.

Top