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सांडी पक्षी विहार में हज़ारों की संख्या में आ रहे विदेशी मेहमान

Mohit ShuklaMohit Shukla   17 Feb 2020 9:54 AM GMT

सांडी पक्षी विहार में हज़ारों की संख्या में आ रहे विदेशी मेहमान

हरदोई (उत्तर प्रदेश)। अंतराष्ट्रीय स्तर पर पहचान बना चुके सांडी पक्षी विहार में इस बार हजारों की संख्या में विदेशी पक्षी आ रहे हैं। हर साल की तरह इस बार भी आयोजित पक्षी महोत्सव में पक्षियों को देखने के लिए पर्यटकों की भीड़ इकट्ठा हो रही है।

उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से 120 किलोमीटर व हरदोई जिला मुख्यालय से करीब 20 किलोमीटर दूरी पर स्थित सांडी ब्लाक के सांडी पक्षी विहार का गठन 1990 में वन वनस्पति संरक्षण के लिए बनाया गया था। इसको और बेहतर बनाने व पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए हरदोई के जिलाधिकारी पुलकित खरे पिछले तीन वर्षों से लगातार पक्षी महोत्सव का आयोजन कराते चले आ रहे हैं। इस कार्यक्रम में कृषि विभाग, शिक्षा विभाग, स्वाथ्य विभाग, सहित तमाम विभागों के स्टाल लगवाये जाते हैं। जिनमें लोगो को तमाम प्रकार की जानकारियां भी उपलब्ध कराई जाती हैं।


जिलाधिकारी पुलकित खरे ने बताते हैं, "सांडी पक्षी विहार में विभाग की तरफ से कराई गई गिनती में भारतीय और प्रवासी पक्षियों को मिलाकर 72 हजार पक्षी मौजूद हैं। इस बार 50 से अधिक देशों के विभिन्न प्रजातियों के पक्षी आए हैं, जिसमें से कई ऐसे भी हैं जोकि पहली बार झील में दिखाई दे रहे हैं। पिछले दो साल हम ये कार्यक्रम आयोजित करा रहे हैं, जिसमें हम बच्चों को जोड़ रहे हैं, ताकि पक्षियों को लेकर उनकी जानकारी बढ़े।"

लगभग 10,67,939 हेक्टेयर में फैले पक्षी विहार में प्रति वर्ष नवम्बर माह से हजारों की संख्या में विदेशी पक्षियों की चहचाहट से गूंजने लगता है। वहीं विदेशी पक्षियों के कलरव को देखने के लिए यहा पर रोजाना सैकड़ों की संख्या में लोग आते हैं।


क्या है रामसर कन्वेंशन

रामसर सम्मेलन नम भूमि के संरक्षण के लिए विश्व स्तरीय प्रयास है। भविष्य के लिए झीलों एवं नम भूमि का संरक्षण' विषय पर आधारित इस सम्मेलन का आयोजन भारत सरकार के पर्यावरण एवं वन मंत्रालय द्वारा राजस्थान सरकार एवं इन्टरनेशनल लेक एन्वायरन्मेंट कमेटी, जापान के सहयोग से किया गया है। जल प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए व्यापक कानून बनाया और इसी के साथ विश्व स्तर पर संरक्षण प्रयासों के तहत 1971 में नम भूमि पर आयोजित रामसर कन्वेंशन में भी सक्रिय रूप से भागीदारी की थी। भारत में तमाम झीलों के संरक्षण को लेकर किये गए प्रयासों को विश्व स्तर पर सराहा भी जा चुका है।


क्या है वेटलैंड

वहीं जैवविविधता की नज़र से वेटलैंड अंत्यंत संवेदनशील होता हैं,यहां पर विशेष प्रकार की वनस्पतियों सहित अन्य जीव भी वेटलैंड पर उगने और फलने-फूलने के लिये अनुकूलित होते हैं। अब तक विश्वभर में 1929 से अधिक वेटलैंड है,वही भारत मे अब तक 27 वेटलैंड पाये जाते थे, लेकिन हाल ही में देश पर्यावरण मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने 10 नए वेटलैंड घोषित किया हैं। जिसमें से में 6 बाकी अन्य राज्यों का नाम शामिल हुए हैं।

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