बॉलीवुड का चहेता ‘अकबर’ हुआ डिरेल, सनी देओल से लेकर सलमान तक के साथ लगा चुका है दौड़

बॉलीवुड का चहेता ‘अकबर’ हुआ डिरेल, सनी देओल से लेकर सलमान तक के साथ लगा चुका है दौड़डीरेल हुआ अकबर

लखनऊ। हरियाणा में रेवाड़ी के ऐतिहासिक लोको हैरिटेज में बॉलीवुड की 40 से ज्यादा फिल्मों में शामिल रहने वाला 65 वर्ष पुराना 'अकबर' स्टीम इंजन 7161 डब्ल्यू-पी ‘अकबर’ शनिवार को दुर्घनाग्रस्त हो गया। हादसा उस वक्त हुआ जब इंजन को स्टार्ट किया जा रहा था, तभी स्पीड कंट्रोलर खराब हो गया और वह बेकाबू होकर भागने लगा। दरअसल, दोपहर करीब 12 बजे अधिकारियों के दौरे के लिए लाइट-अप (स्टार्ट) किया जाना था। जैसे ही अधिकारी मौके पर पहुंचे तो उसे स्टार्ट किया गया पर स्पीड कंट्रोलर खराब होने के कारण वह अनियंत्रति होकर लोको गेट तोड़कर पटरियों पर दौड़ पड़ा।

रेलवे कर्मचारी ने इंजन से कूद कर बचाई जान

इंजन में मौजूद ड्राइवर सहयोगी ने गेट टूटने से पहले ही कूदकर अपनी जान बचाई। इसके बाद इंजन करीब दो किमी दूर जाकर हिसार क्रास-लाइन पर स्लीपर टूटने के कारण बेपटरी होकर रुक गया। जिससे बड़ा हादसा टल गया। इंजन के बेपटरी होकर रुकने की सूचना मिलने के बाद अधिकारी मौके पर पहुंचे दिल्ली मंडल अधिकारियों को सूचना दी गई। हालांकि रेलवे द्वारा अधिकारियों-कर्मचारियों पर कोई कार्रवाई नहीं की गई। लोको फोरमैन गणपत ने बताया कि स्टीम इंजन के बेपटरी होने के बाद दिल्ली मंडल अधिकारियों को सूचना दी गई।

'अकबर' के साथ सुल्तान से भाग मिल्खा भाग तक की शूटिंग

लोकोशेड में अकबर के साथ फिल्म ‘भाग मिल्खा भाग’, वीर जारा, रंग दे बंसती, गदर, गुरु और लव, सुल्तान समेत करीब छोटी बड़ी 40 से ज्यादा फिल्मों की शूटिंग हो चुकी है। रेलवे अधिकारी के अनुसार डब्ल्यूपी/पी इंजन के साथ चार कोच वाली ट्रेन के एक दिन इस्तेमाल पर रेलवे को 4 लाख रुपए की आमदनी होती है। नॉर्दन रेलवे के एक और अधिकारी ने बताया, ‘फिल्मों के जरिए लोको शेड के मेंटेनेंस का खर्चा भी निकल रहा है।’ यह लोको इंजन दिल्ली-कोलकाता मेन लाइन के बीच चलाया जाता था।

2002 में लोको शेड बना। रेवाड़ी का लोकोशेड 1893 में स्टीम इंजन के रखरखाव के लिए विकसित किया गया। यह उस वक्त बांबे बड़ौदा सेंट्रल रेलवे का हिस्सा था। यहां 500 मेंटीनेंस स्टाफ कार्यरत की तैनाती थी। यहां से दिल्ली, बठिंडा, चुरू और फुलेरा के लिए रेलगाड़ियां जाती थीं। 14 अगस्त 2002 को तत्कालीन रेल मंत्री नीतीश कुमार ने रेवाड़ी स्टीम शेड को हेरिटेज शेड का दर्जा प्रदान किया था।

कैसे पड़ा 'अकबर' नाम

लोको फोरमैन श्याम बिहारी ने बताया कि इस इंजन की अपार सफलताओं, ऐतिहासिकता व उपलब्धियों को देखते हुए रेल विभाग ने इसका नाम 'अकबर' रखा है। गदर फिल्म की शूटिंग के बाद तो कई फिल्मों की शूटिंग रेवाड़ी लोको शेड में हुई। यह शेड खासतौर पर स्टीम इंजन के लिए तैयार किया गया है। इस इंजन को देखने के लिए आज भी दूरदराज से हजारों देसी-विदेशी सैलानी रेवाड़ी के हैरिटेज सेंटर में आते हैं।

फिल्मों के लिए लकी है 'अकबर'

जिस भी फिल्म में इसे यूज किया गया, वह सफल रही है। इनमें हिंदी फिल्म सुल्तान, गदर, भाग मिल्खा भाग, की एंड का, रंग दे बसंती और वीर जारा सहित अन्य भाषाओं की कई फिल्में शामिल हैं। इस वजह से इस इंजन को बॉलिवुड का 'लकी लाडला' भी कहा जाता है।

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