संस्कृत बोलने वाली ये लड़कियां: आगे भी इसी भाषा में पढ़ना चाहती हैं

उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से 30 कि.मी दूर इंटौजा ब्लॉक में कन्या पूर्व-माध्यमिक विद्यालय है। यहां बाकी पढ़ाई के साथ बच्चों को संस्कृत सिखाई जाती है ताकि आम बोलचाल की भाषा में वो इसको प्रयोग करे।

Diti BajpaiDiti Bajpai   26 March 2019 9:17 AM GMT

लखनऊ। अभी तक आपने ऐसे स्कूलों के बारे में देखा और सुना होगा जहां पर बच्चे फर्राटेदार अंग्रेजी बोलते है लेकिन हम आपको ऐसे स्कूल के बारे में बता रहे है जिसमें लड़कियां संस्कृत को सीखने के साथ-साथ उसी भाषा में बात भी करती हैं।

उत्तर प्रदेश के लखनऊ जिले से 30 कि.मी दूर इंटौजा ब्लॉक में कन्या पूर्व माध्यमिक विद्यालय है जहां पर पढ़ाई के साथ-साथ बच्चों को अलग से संस्कृत सिखाई जाती है ताकि आम बोलचाल की भाषा में भी इसको प्रयोग करे। इसी स्कूल के आठवीं कक्षा में पढ़ाई कर रही 13 वर्षीय साहिबा को संस्कृत को सीखते हुए दो-तीन महीने हुए है लेकिन उन्हें यह भाषा सबसे अच्छी लगती है। साहिबा बताती हैं,

"संस्कृत पढ़ना बहुत सरल है स्कूल में हम इंग्लिश में नहीं संस्कृत में बोलते है हम कहीं जाते है या कुछ भी करना होता है उसको संस्कृत में ही बोलते है। मैं संस्कृत से ही आगे की पढ़ाई करना चाहती हूं।"


साहिबा ही नहीं इस माध्यमिक विद्यालय में लड़कियों को संस्कृत आती है। संस्कृत भाषा के प्रचार प्रसार के लिए राज्य सरकार ने संस्कृत सम्भाषण योजना शुरू की है। इस योजना के तहत प्रदेश के सभी प्राथमिक विद्यालय और पूर्व माध्यमिक विद्यालय में संस्कृत भाषा का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। जल्द ही सीबीएसई व सीआईएससीई, आईसीएसई व आईएससी बोर्ड को भी शामिल किया जाएगा।

संस्कृत भाषा में ही शिक्षक बच्चियों को पढ़ाते हैं। फोटो- दिति बाजपेई

"प्राथमिक विद्यालय, संस्कृत विद्यालय, उच्च प्राथमिक विद्यालय और महाविद्यालय या किसी भी बोर्ड से संबद्व विद्यालय हो वहां पर पढ़ने वाले बच्चे संस्कृत बोले उसके लिए संस्कृत सम्भाषण योजना को शुरू किया गया है।" संस्कृत सम्भाषण योजना को देख रहे उत्तर प्रदेश संस्कृत संस्थान के सह प्रशिक्षण प्रमुख सुशील कुमार ने बताया,

"बच्चों को संस्कृत सिखाने के लिए पहले हमने प्रशिक्षिकों को तैयार किया और वह अब विद्यालय जाकर छात्रों को प्रशिक्षण दे रहे हैं। बच्चों को खेल-खेल में संस्कृत सिखाई जा रही है ताकि उनको यह न लगे संस्कृत बहुत कठिन है।"

कन्या पूर्व माध्यमिक विद्यालय में कक्षा आठ में पढ़ाई कर रही शहाना को नहीं पता था कि वह कभी संस्कृत में बात कर पाएगी। शहाना बताती हैं, "पहले लगता था कि संस्कृत नहीं पढ़ सकते बहुत कठिन है लेकिन अब पढ़ते भी है और आपस में बात भी करते है। संस्कृत में श्लोक भी आते है।"

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इस योजना के तहत करीब 20 हज़ार से ज्यादा प्रशिक्षिक संस्कृत के प्रचार-प्रसार के लिए काम कर रहे हैं।

"अभी लोगों के यह अंदर धारणा बनी है कि संस्कृत बहुत कठिन है लेकिन ऐसा है नहीं। अगर हमको हिंदी नहीं आती है तो इसका मतलब यह नहीं कि उसके लिए हमें व्याकरण सीखना होगा। प्रत्यक्ष विधि ऐसा साधन है कि जिससे संस्कृत सीखना बहुत ही सरल हो जाता है," ऐसा बताती हैं, उत्तर प्रदेश संस्कृत संस्थान में ट्रेनिंग टीचर शलिनी दीक्षित। शालिनी आठ ब्लॉक के प्राथमिक विद्यालय और पूर्व माध्यमिक विद्यालय में संस्कृत का प्रशिक्षण दे रही है।

लोगों में संस्कृत का रूझान न होने का कारण बताती हैं, "संस्कृत को संस्कृत के माध्यम से न पढ़ाकर हिंदी माध्यम से पढ़ाया जाने लगा जिससे की उसकी लोकप्रियता कम होती चली गई अंग्रेजी आज लोकप्रिय इसलिए है क्योंकि उसके माध्यम से ही पढ़ाया जाता है।"


अपनी बात को जारी रखते हुए शालिनी आगे बताती हैं, "अंग्रेजी माध्यम में पढ़ते है तो उनको और अच्छी लगती है लेकिन संस्कृत में ऐसा नहीं था हम लोग इसी प्रयास में लगे हुए है जो संस्कृत विषय है उसको बच्चे हिंदी में न समझकर संस्कृत में ही उसका अर्थ समझे और यह बहुत जल्दी संभव हो पाएगा केवल हम नहीं लाखों की संख्या में प्रशिक्षिक पूरे भारत में इस प्रयास में लगे हुए है।"

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संस्कृत के क्षेत्र में रोजगार की संभावनाएं-

उत्तर प्रदेश संस्कृत संस्थान पिछले कई वर्षों से संस्कृत के क्षेत्र में प्रचार प्रसार का काम कर रहा है। संस्कृत के क्षेत्र में रोजगार के बारे में सुशील बताते हैं,

"इसमें लोग रिसर्च के क्षेत्र में जा सकते है। संस्कृत का मतलब केवल व्याकरण नहीं है साहित्य नहीं है योग भी संस्कृत है, दर्शन भी संस्कृत है आयुर्वेद भी संस्कृत है ज्योतिस कर्मकांड ये सारे के सारे फील्ड रोजगार को क्रिएट करने वाले है। रोजगार के क्षेत्र संस्कृत के छात्रों के लिए खुले हुए है वो अलग बात है कि उनको कोई दृष्टि नहीं देता है आप आयुर्वेद के फील्ड में जा सकते हैं।"

कम्प्यूटर के लिए बेस्ट भाषा है संस्कृत-

"संस्कृत को आज के युग में कम्प्यूटर के लिए बेस्ट भाषा के रूप में चयन कर लिया गया जिसका ज्ञान आम जनता को नहीं है नासा ने यह प्रमाणित किया है कि आने वाले समय में संस्कृत में सबसे अच्छी भाषा है। आगे भी रोजगार की संभावनाएं रहती है।" शालिनी ने बताया।

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