इन्हें रबर का इतना शौक था कि फैमिली बिजनेस छोड़ दिया, कर्ज में डूबे और जेल की हवा तक खाई 

Shefali SrivastavaShefali Srivastava   15 Jun 2017 1:29 PM GMT

इन्हें रबर का इतना शौक था कि फैमिली बिजनेस छोड़ दिया, कर्ज में डूबे और जेल की हवा तक खाई आज ही के दिन मिला था पेटेंट

लखनऊ। आपने अपनी गाड़ी या मोटरसाइकिल के पहिए पर बोल्ड लेटर में पीले रंग से Goodyear लिखा हुआ कई बार देखा होगा। दरअसल यह अमेरिकन टायर एंड रबर कंपनी है जिसे वल्कनाइज्ड टायर का आविष्कार करने वाले अमेरिकी वैज्ञानिक चार्ल्स गुडइयर के नाम पर रखा गया है।

गुडइयर को आज ही के दिन 1844 में वल्कनाइज्ड रबड़ का पेटेंट हासिल हुआ था।

गुडइयर के लिए टायर का आविष्कार आसान नहीं था। उन्हें इसके लिए बेहद संघर्ष करना पड़ा और लोगों के ताने भी सुनने पड़े। एक बिजनेसमैन फैमिली से होते हुए भी वे कर्ज में डूब गए और उन्हें जेल की हवा तक खानी पड़ी।

अगर कोई ऐसा आदमी मिले, जिसने टोपी, जूते-मोजे और जैकेट वगैरह सभी चीजें रबर की पहन रखी हों और यहां तक कि पर्स भी रबर का हो लेकिन जेब में एक भी रुपया न हो, तो समझ लीजिएगा कि वह गुडइयर ही होगा।

टायर के आविष्कार के पीछे एक दिलचस्प कहानी है।

बताते हैं कि रबर के प्रति चार्ल्‍स गुडइयर की दीवानगी इस कदर थी कि वे जूते से लेकर कपड़े और यहां तक की टोपी भी रबर की पहनते थे। उनको लेकर एक बात बहुत मशहूर थी कि अगर कोई ऐसा आदमी मिले, जिसने टोपी, जूते-मोजे और जैकेट वगैरह सभी चीजें रबर की पहन रखी हों और यहां तक कि पर्स भी रबर का हो लेकिन जेब में एक भी रुपया न हो, तो समझ लीजिएगा कि वह गुडइयर ही होगा।

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गुडइयर ने जलरोधक रबर बनाने के लिए घर की रसोई को ही अपनी लैब बना लिया। जब उनकी पत्नी रात का खाना बनाकर सोने चली जाती, तो उन्हीं बर्तनों में गुडइयर अपना प्रयोग करते रहते, लेकिन रबर की बदबू ने पड़ोसियों को परेशान करना शुरू कर दिया और उनकी शिकायत आने लगी। अब चार्ल्स को अपनी प्रयोगशाला घर से काफी बनानी पड़ी। गुडइयर रोज सुबह मीलों पैदल जाकर रबर के साथ अपना दिमाग खपाते रहते।

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इस तरह उन्होंने अच्छी क्वालिटी की रबर तो बना ली लेकिन उसकी बदबू से मुक्ति नहीं मिली थी। गुडइयर पूरी तरह से आकर्षक रंगों वाला तापरोधी रबर बनाना चाहते थे, जिस पर बाहरी चीजों का असर न पड़े। एक बार रबर को रंगते हुए उस पर धब्बा पड़ गया, तो उन्होंने ढेर सारा सल्फेट अम्ल डालकर उस धब्बे को उड़ाना चाहा लेकिन धब्बे की जगह पूरी रबर का ही रंग उड़ गया। गुडइयर गुस्से से रबर को उठाकर दूर फेंक दिया।

थोड़ी देर बाद जब उनकी उस रबर पर पड़ी, तो देखा कि जिस हिस्से पर सल्फेट अम्ल डाला गया था, वह काफी सख्त हो गया था। गुडइयर की खुशी का ठिकाना नहीं रहा क्योंकि वह रबर पहले से कहीं ज्यादा शुद्ध, तापरोधी और सुरक्षित रूप में इस्तेमाल हो सकता था। गुडइयर ने सबसे पहले अपने परिवार को इसकी जानकारी दी लेकिन किसी ने भी उसमें दिलचस्पी नहीं ली। पत्नी और बच्चे रबर के लिए उनके एक्सपेरिमेंट से तंग हो गए थे और उधर गुडइयर पर कर्जे का बोझ भी काफी बढ़ चुका था।

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कर्ज की वजह से ही उन्हें कई बार जेल भी जाना पड़ा, लेकिन बिना हार माने वे अपने प्रयोग में लगे रहे। 1944 के दौरान उन्होंने रबर का आधुनिक रूप खोज निकाला, जिसे वल्कनाइजेशन नाम दिया गया। उनके आविष्कार ने कई लोगों को करोड़पति बना दिया लेकिन वे गरीब ही मरे।

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