संयुक्त राष्ट्र ने वर्ष 2017 में भारत के लिए आर्थिक वृद्धि दर अनुमान में कमी की पर कहा अगले साल 8 फीसदी संभव 

संयुक्त राष्ट्र ने वर्ष 2017 में भारत के लिए आर्थिक वृद्धि दर अनुमान में कमी की पर कहा अगले साल 8 फीसदी संभव रपट में आगाह किया गया है कि देश के बैंकिंग क्षेत्र की बैलेंस शीट दबाव में है।

संयुक्त राष्ट्र (भाषा) । संयुक्त राष्ट्र ने 2017 में भारत के लिए अपने आर्थिक वृद्धि दर अनुमान में कमी की है, चालू वर्ष के लिए, आर्थिक और सामाजिक मामलों के संयुक्त राष्ट्र विभाग (यूएनडीईएसए) ने रिपोर्ट में वृद्धि दर में 0.4 प्रतिशत की कटौती के साथ 7.3 प्रतिशत कर दी है, जो कि जनवरी में 7.7 प्रतिशत रहने का अनुमान लगाया था। हालांकि उसको उम्मीद है कि अगले साल यह बढ़कर 7.9 प्रतिशत हो जाएगी।

संयुक्त राष्ट्र ने आगाह किया है कि देश के बैंकिंग क्षेत्र के खराब प्रदर्शन के चलते निकट भविष्य में निवेश में शायद ज्यादा मजबूती नहीं आए। यहां जारी ‘संयुक्त राष्ट्र विश्व आर्थिक परिस्थिति व परिदृश्य' रपट (मध्य 2017) में यह निष्कर्ष निकाला गया है।

इसके अनुसार 2017 में भारत की जीडीपी वृद्धि दर 7.3 प्रतिशत रहना अनुमानित है। संयुक्त राष्ट्र ने अपने अनुमान में कमी की है क्योंकि जनवरी 2017 में उसने वृद्धि दर 7.7 प्रतिशत रहने का अनुमान लगाया था।

संशोधित रपट के अनुसार 2018 में भारत की जीडीपी वृद्धि दर 7.9 प्रतिशत रहेगी। इस अनुमान में बढ़ोतरी की गई है क्योंकि जनवरी में इसके 7.6 प्रतिशत रहने का अनुमान लगाया गया था।

रपट में आगाह किया गया है कि देश के बैंकिंग क्षेत्र की बैलेंस शीट दबाव में है जिसका नकारात्मक असर देश में निवेश बहाली पर पड़ेगा। बैंकों का फंसा कर्ज केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार के लिए बड़ी चिंता बन गया है।

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रपट में कहा गया है,‘ नोटबंदी की नीति के कारण अस्थाई बाधाओं के बावजूद सुदृढ़ राजकोषीय व मौद्रिक नीतियों व घरेलू सुधारों के चलते भारत में आर्थिक परिदृश्य मजबूत है. फिर भी बैंकिंग व कारपोरेट क्षेत्र की बैलेंस शीट पर ‘दबाव' निकट भविष्य में निवेश में मजबूती बहाली नहीं होने देगा। '

इसके अनुसार भारत, ब्राजील व दक्षिण अफ्रीका में चालू खाते के घाटे में ‘उल्लेखनीय' कमी आई है।

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