आखिर इनके चेहरे खुशियां से क्यों रोशन हैं?

आखिर इनके चेहरे खुशियां से क्यों रोशन हैं?मिर्जापुर के दादर कालन गांव में मां, बेटी को बल्ब की रोशनी में खाना परोसते हुए।

एक मिट्टी के घर में बनी रसोई में दो महिलाएं, एक मां और दूसरी शायद उसकी बेटी है। दोनों के चेहरे खुशी से भरे हुए हैं। इसके पीछे सिर्फ एक वजह है जिसने इन दो महिलाओं के चेहरे पर चमक ला दी है। क्या आप जाना चाहते है?

मिर्जापुर के दादर कालन गांव में स्थापित सौर ऊर्जा संयंत्र की सुरक्षा में लगा जवान

यह दृश्य मिर्जापुर के दादर कालन गांव का है, जो उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से सड़क मार्ग से तकरीबन 286 किलोमीटर दूर है। सड़क मार्ग से मिर्जापुर जाने में लगभग छह घंटे से अधिक लग जाते हैं।

अभी 12 मार्च को भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी व फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों एक साथ मिर्जापुर जिले के छानवे विकास खण्ड के दादरकला गांव में पहुंचे जहां एक सौर ऊर्जा संयंत्र का उद्धाटन किया। दादरकलां में स्थापित किए गए सौर ऊर्जा संयंत्र पर 560 करोड़ रुपए खर्च हुए हैं। इस संयंत्र से रोजाना पांच लाख यूनिट बिजली का उत्पादन होगा। जिससे एक लाख परिवारों को बिजली मिलेगी। वैसे ये उम्मीद है कि इस सौर ऊर्जा यूनिट से लगभग 15.6 करोड़ यूनिट बिजली का उत्पादन 118,600 सौर पैनलों से स्थापित किए जाने की उम्मीद है।

मिर्जापुर के दादर कालन गांव में स्थापित सौर ऊर्जा संयंत्र की पानी से सफाई करते कर्मचारी।

इस परियोजना की स्थापना उत्तर प्रदेश नवीन और नवीनीकरण ऊर्जा विकास अभिकरण यानी नेडा और फ्रेंच कंपनी सोलर डायरेक्ट ने मिलकर की है। इसे नेशनल ग्रिड से भी जोड़ा जाएगा।

मिर्जापुर के दादर कालन गांव में मां, बेटी को बल्ब की रोशनी में खाना परोसते हुए।

अब शायद आप समझ गए होंगे कि इस रसोई के अंदर बैठी मां-बेटी के चेहरे पर मुस्कान लाने वाला और कोई नहीं वो दूर लटकता बल्ब है। जिसकी रोशनी ने इनके घर के अंधेरे जीवन को रोशन कर दिया। और इस बल्ब को रोशनी इसी सौर ऊर्जा संयंत्र से मिल रही है।

वर्ष 2015 में नरेंद्र मोदी ने सौर ऊर्जा को बढ़ावा देने के इरादे से उत्तर प्रदेश के लिए जो लक्ष्य निर्धारित किया था उस हिसाब से राज्य की रफ्तार इस लक्ष्य को पूरा करने के लिए काफी धीमी है।

मिर्जापुर के दादर कालन गांव में स्थापित सौर ऊर्जा संयंत्र ।

नरेंद्र मोदी ने वर्ष 2015 में सौर ऊर्जा को बढ़ावा देने के इरादे से राज्यों के लिए लक्ष्य निर्धारित किए थे। यूपी को वर्ष 2022 तक चार हजार मेगावाट ऊर्जा पैदा करने वाले सोलर प्लांट लगाने हैं। ऐसे में राज्य की रफ्तार इस लक्ष्य को पूरा करने में काफी धीमी है। अब तक राज्य में मिर्जापुर को मिलाकर केवल 100 मेगावाट के सौर ऊर्जा संयंत्र ही स्थापित हो पाए हैं।

उत्तर प्रदेश में सौर ऊर्जा की संभावित क्षमता 22.3 गीगावॉट है।

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