बांग्लादेश की इकलौती महिला रिक्शा चालक, इन्हें लोग पागल आंटी कहते हैं

बांग्लादेश की इकलौती महिला रिक्शा चालक, इन्हें लोग पागल आंटी कहते हैंफोटो साभार-ढाका ट्रिब्यून

बांग्लादेश की इकलौती महिला रिक्शा चालक मोसम्मत जैस्मीन वैसे तो स्त्रीवादी की प्रतिरूप हो सकती हैं लेकिन इन्हें बांग्लादेश के लोग पागल आंटी के नाम से पुकारते हैं।

बांग्लादेश के चट्टगांव बस स्टेशन पर खड़ीं मोसम्मत जैस्मीन कहती हैं कि मैं से निश्चित कर देना चाहती हूं कि मेरे बच्चे भूखे न रहें, अच्छी शिक्षा के लिए उनका एडमिशन अच्छे स्कूल में हो पाए। चट्टगांव शहर में 45 साल की मोसम्मत जैस्मीन को 'क्रेजी आंटी' के नाम से जाना जाता है। जैस्मीन उन लोगों के लिए एक प्रेरणा हैं जो काम करने में हिचकिचाती हैं।

ढाका ट्रिब्यून के अनुसार जैस्मीन बांग्लादेश की इकलौती महिला रिक्शा चालक हैं जो पूरे एशिया महादेश में महिला सशक्तिकरण की मिसाल हैं। जैस्मीन सप्ताह के सातों दिन आठ घंटे बैट्री चलित रिक्शा चलाती हैं। पूरे दिन रिक्शा चलाने के बाद जैस्मीन 600 टका (500 रुपए) ही कमा पाती हैं। जैस्मीन ने बताया कि, "शुरुआत में कई लोग उनकी रिक्शा में नहीं बैठते थे। क्योंकि कई लोग इसे महिलाओं की नौकरी नहीं मानते। वहीं कुछ लोगों ने महिला पर यह कहकर ताने कसे की वो महिला की रिक्शा में नहीं बैठेंगे। वहीं कुछ लोग उसे सही किराया नहीं देते थे।" लेकिन जैस्मीन ने किसी की नहीं सुनी और अपना काम करती रहीं।

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जैस्मीन अपने काम के बारे में कहती हैं कि अल्ला ने मुझें दो हाथ, दो पैर दिए हैं। भीख मांगने की जगह मुझें इनसे काम करना चाहिए। जैस्मीन के तीन बेटे हैं। अपने बेटों के भविष्य को बेहतर बनाने के लिए जैस्मीन ने दृढ़ संकल्प कर रखा है। जैस्मीन ने बताया कि कुछ साल पहले उनके पति ने दूसरी शादी कर ली थी जिसके बाद जैस्मीन अपने तीन लड़कों के साथ अकेली रह गई थी।

जैस्मीन ने अपने कॅरियर की शुरुआत में रिक्शा को नहीं चुना बल्कि वो एक के घर काम करती थीं। कुछ समय तक काम करने के बाद वो बांग्लादेश के एक कारखाने में काम करने लग गईं। लेकिन बात नहीं बनी और जैस्मीन रिक्शा चलाने लग गईं। कमाने के अलावा जैस्मीन रिक्शा मालिक को भी हर दिन रिक्शा का किराया देती हैं। मोसम्मत रिक्शा चलाते वक्त अपनी सुरक्षा का पूरा ख्याल रखती हैं। यही कारण हैं कि वो हेलमेट पहनकर रिक्शा चलाती हैं।

पिछले कुछ सालों में उनकी कमाई थोड़ी काम हुई है लेकिन वे अभी भी लोगों के लिए प्ररेणादायक बनी हुई हैं। रिक्शा चलाते हुए भी जैस्मीन हमेशा हेलमेट लगाती हैंद्ध जस्मीन कहती हैं कि वाहन चालाते समय सावधानी बहुत जरूरी है। मेरे लिए ये अनिवार्य नहीं है लेकिन मैं चाहती हूं लोग इससे सीख लें और हेलमेट लगाएं। ट्रैफिक पुलिस इसके लिए जस्मीन को धन्यवाद देते हैं। स्थानीय मस्जिद के इमाम नुरुल आलम कहते हैं कि जैस्मीन उन महिलाओं के प्ररणादायी हैं जो कमजोरी का बहाना बनाकर जिस्मफरोशी या नशे के दलदल में फंस जाती हैं। वहीं कुछ लोग जैस्मीन का विरोध भी करते हैं। लेकिन जैस्मीन कहती हैं वे अपने बच्चों के बेहतर भविष्य के लिए ऐसा कर रही हैं।

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