भारत के साथ रिश्ते संभाल रहा पाकिस्तान: पाकिस्तान उच्चायुक्त

भारत के साथ रिश्ते संभाल रहा पाकिस्तान: पाकिस्तान उच्चायुक्तभारत के साथ रिश्तों को संभालने की प्रक्रिया का संचालन कर रहे पाकिस्तान प्रधानमंत्री नवाज शरीफ।

नई दिल्ली (भाषा)। पाकिस्तान के उच्चायुक्त अब्दुल बासित ने अपने देश में शक्तिशाली सेना द्वारा फैसले लिये जाने की धारणाओं को खारिज करने का प्रयास करते हुए कहा कि भारत के साथ रिश्तों को संभालने की प्रक्रिया का संचालन पाकिस्तान प्रधानमंत्री नवाज शरीफ कर रहे हैं।

बासित के बयानों को महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि भारत में विदेश नीति विशेषज्ञों को लगता है कि पाकिस्तानी सेना भारत-पाक संबंधों में आगे बढ़ने के किसी भी कदम को अवरद्ध करती है। फिलहाल पाकिस्तानी आतंकी समूहों द्वारा भारत में सिलसिलेवार हमले के बाद दोनों दक्षिण एशियाई पड़ोसी देशों के बीच बातचीत रुकी हुई है।

भारत समेत सभी लोकतांत्रिक देशों में आप सभी पक्षों से जानकारी लेते हैं और ऐसा ही हम पाकिस्तान में भी करते हैं। इसमें कुछ भी असामान्य नहीं है। भारत के साथ हमारे रिश्ते हमारी विदेश नीति का महत्वपूर्ण भाग हैं, इसलिए यदि हमारी सुरक्षा एजेंसियों से जानकारी मिलती है तो कुछ भी असामान्य नहीं है।
अब्दुल बासित, पाकिस्तान के उच्चायुक्त

हालांकि बासित ने दिये एक साक्षात्कार में स्पष्ट कहा कि दोनों देश द्विपक्षीय साझेदारी से बच नहीं सकते। वे अनवरत शत्रुता के साथ नहीं रह सकते। उन्होंने कहा, ‘‘हम बहुत खुश हैं कि हमारी सेना दुनिया की सर्वश्रेष्ठ सेनाओं में से है। उसके साथ ही हमारे लोकतंत्र की जड़ें पिछले आठ-नौ साल में गहरी हुई हैं, और मुझे इस बात में कोई संदेह नहीं है कि हमारे प्रधानमंत्री, जो चुनाव के जरिये निर्वाचित हुए हैं, नीति बनाने के मामले में ड्राइवर सीट पर बैठे हैं। असैन्य पक्ष फैसले लेता है।’’ बासित ने कहा, ‘‘भारत समेत सभी लोकतांत्रिक देशों में आप सभी पक्षों से जानकारी लेते हैं और ऐसा ही हम पाकिस्तान में भी करते हैं। इसमें कुछ भी असामान्य नहीं है। भारत के साथ हमारे रिश्ते हमारी विदेश नीति का महत्वपूर्ण भाग हैं, इसलिए यदि हमारी सुरक्षा एजेंसियों से जानकारी मिलती है तो कुछ भी असामान्य नहीं है।’’ पाकिस्तानी उच्चायुक्त ने यह भी कहा कि भारत-पाक संबंधों का स्वरुप ‘एक कदम आगे और दो कदम पीछे' का है.

उन्होंने कहा कि इसलिए महत्वपूर्ण है कि दोनों देश पिछली प्रगति का लाभ उठाएं। बासित के मुताबिक, ‘‘बातचीत नहीं करना या सामान्य संबंध नहीं रखना अस्वाभाविक है। बातचीत के लिए दरवाजे खुले रखना निश्चित रुप से दोनों पक्षों की जिम्मेदारी है।

हम अनवरत शत्रुता के साथ नहीं रह सकते।’’ साल 2014 में मोदी सरकार के सत्ता में आने और शरीफ के उनके शपथ-ग्रहण समारोह में शामिल होने के बाद जब दोनों नेताओं ने मिलनसारिता दिखाई थी और संबंधों में अच्छी शुरुआत हुई थी तो इनमें अवरोध किन कारणों से आ गये, इस सवाल के जवाब में पाक उच्चायुक्त ने कहा, ‘‘भारत के दृष्टिकोण से निश्चित रुप से पठानकोट एक घटना थी।’’

उन्होंने कहा कि दिसंबर 2015 में विदेश मंत्री सुषमा स्वराज की पाकिस्तान यात्रा के दौरान व्यापक द्विपक्षीय संवाद (सीबीडी) की घोषणा पिछले तीन साल की सबसे बड़ी उपलब्धियों में से एक है। लेकिन पठानकोट की घटना के बाद भारतीय विदेश सचिव की यात्रा रद्द कर दी गयी थी जिन्हें 15 जनवरी, 2016 को पाकिस्तान जाना था। बासित ने यह भी कहा कि दोनों पक्षों की सीबीडी की एक रुपरेखा है और यह विभिन्न मुद्दों पर बैठकों का कार्यक्रम निर्धारित करेगी।

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