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एक हज़ार सात बच्चों को कैसे पाला इस मां ने

एक हज़ार सात बच्चों को कैसे पाला इस मां नेgaonconnection

महाराष्ट्र। मां की ममता में न मालूम कितने रहस्य छिपे हुए होते हैं। मां अपने बच्चों के लिए क्या कुछ नहीं करती। मां की ममता में एक सुरक्षा का अहसास तो होता ही है साथ ही विश्वास के साथ ही असीम प्यार, दुलार, स्नेह भी होता है। ऐसी ही एक अजीम शख्सियत हैं महाराष्ट्र की सिंधुताई सपकाल, जो पिछले 40 वर्षों से अपने बच्चों के साथ ही एक हजार सात अनाथ बच्चों को भी पाल रही हैं। 

सिंधुताई को बचपन से ही अपने परिवार से तिरस्कार मिला क्योंकि वो एक लड़की थीं। पिता चरवाहा थे और घर की आर्थिक स्थिति जर्जर थी। पिता चाहते थे कि सिंधु स्कूल जाए लेकिन मां इसका विरोध करतीं। वह चाहती थीं कि वह घर के काम में हाथ बटाएं। मात्र दस साल की थीं जब सिंधुताई की शादी तीस साल के श्रीहरि सपकाल से कर दी गई। कुछ समय बाद पति ने उन्हें घर से निकाल दिया और घरवालों ने भी उन्हें सहारा देने से मना कर दिया। 

ऐसे आया अनाथों को गोद लेने का विचार

सिंधुताई को एक दिन यह अहसास हुआ कि उनकी तरह ही कितने अनाथ बच्चे होंगे जिनका कोई मां बाप नहीं होता। क्यों न ऐसे बच्चों को गोद लिया जाए। जैसे अपनी बच्चों के लिए भीख मांग रही हूं वैसे ही अन्य के लिए भी खा लेंगे। उन्होंने स्टेशन और आस-पास घूमने वाले सभी लावारिस बच्चों को इकट्ठा किया और जो कुछ उनके पास खाने और पहनने को था दे दिया। वो बताती हैं, “ मैंने जिसको भी रोटी खिलाई उसने कभी मेरा साथ नहीं छोड़ा। मैं जितना भी पैसा पाती शाम को खाना लेकर आवाज लगाती कि चलो बच्चों खाना खा लो। मैं अनजाने में सबकी मां बन गई।”  आज उनके 282 दामाद, 69 बहुएं और बड़ी संख्या में नाती-पोते हैं। उनकी देखरेख में पले बढ़े और शिक्षा पाए उनके कई बेटे आज वकील, डॉक्टर और इंजीनियर हैं। 

यहां संवरती है अनाथों की जि़न्दगियां

आज महाराष्ट्र में माई आश्रम, गंगाधर बाबा छत्रालय, सनमति बाल भवन, गोपिका वनौषधि प्रकल्प, ममता बाल सदन, गोपिका महिला उद्योग, अभिमान बाल भवन, सप्तसिंधु महिला आधार, बालसंगोपन अणि शिक्षा संस्थान आदि वर्धा, अमरावती, सासवड, गुहा और पुणे में आश्रम व एनजीओ हैं जहां अनाथ बेसहारा लोगों को न सिर्फ आश्रय मिलता है बल्कि उनके जीवन में शिक्षा की रोशनी का संचार कर उन्हें अपने पांव पर खड़ा करने की राह दिखाई जाती है। 

पुरस्कार और सम्मान

सिंधुताई के सामाजिक योगदान के लिए उन्हें राष्ट्रीय और अन्तरराष्ट्रीय मिलाकर साढ़े सात सौ अवार्ड मिल चुके हैं, जिसमें अहमदिया मुस्लिम पीस अवार्ड, बसवा भूषण पुरस्कार, मदर टरेसा अवार्ड फार सोशल जस्टिस, नेशनल अवार्ड फार आइकोनिक मदर, रियल हीरोज अवार्ड, सीओईपी गौरव अवार्ड, वूमन आफ दी इयर अवार्ड, दत्तक माता पुरुस्कार, लीडिंग सोशल कंटिब्यूटर अवार्ड, सह्याद्रि हिरकानी अवार्ड, राजाई अवार्ड और शिवलीला महिला गौरव अवार्ड प्रमुख हैं। इसी माह उन्हें डीवाई पाटिल विश्वविद्यालय से डाक्टरेट की मानद उपाधि प्रदान करने की घोषणा की गई है। महाराष्ट्र सरकार ने उन्हें अहिल्याबाई होलकर पुरस्कार से सम्मानित किया है। 2010 में उनके जीवन पर आधारित एक फिल्म “सिंधुताई सपकाल“ का निर्माण भी हुआ है जो 54 वें लंदन फिल्म फेस्टिवल में दिखाए जाने के लिए स्वीकृत हो चुकी है। 

अभी बहुत काम बाकी है

सिंधुताई की एक अधूरी इच्छा यह है कि वे गरीबों के लिए एक ऐसा हाईटेक अस्पताल बनवाएं, जहां सभी तरह के आपरेशन के थियेटर हों और सभी इलाज, जांचें, आपरेशन और दवाइयां एकदम मुफ्त उपलब्ध हों। सिंधुताई तीन-तीन राष्ट्रपति, कई मुख्यमंत्रियों, सदी के महानायक अमिताभ बच्चन, आमिर खान के अलावा कई देशों की महान हस्तियों से भी मिल चुकी हैं।

रिपोर्टर - प्रेमेन्द्र श्रीवास्तव

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