गाँवों की किशोरियां कर रही पंचायत का विकास

गाँवों की किशोरियां कर रही पंचायत का विकासगाँव कनेक्शन

अमेठी। अमेठी के गौरीगंज ब्लॉक के बाबूपुर गाँव की किशोरियों ने प्रदेश में महिला एकजुटता की बड़ी तस्वीर पेश की है। गाँव की किशोरियां समूह बनाकर गाँव में स्वच्छता, स्वास्थ्य समस्याओं से बचाव, महिला सुरक्षा, सिलाई केंद्र व कम्प्यूटर शिक्षा के प्रति जागरूक कर रही हैं। जिस वजह से अब ये पहले से अधिक निडर और आत्मनिर्भर बन रही हैं।

अमेठी जिला मुख्यालय से 16 किमी. उत्तर दिशा में बाबूपुर गाँव की सुहासिनी सिंह गाँव की किशोरियों के बनाए गए महिला शक्ति मंडल की सदस्या हैं। सुहासिनी बताती हैं, ''पहले कॉलेज जाते समय गाँव के बहार लड़के उल्टे-सीधे कमेन्ट करते थे। महिला शक्ति मंडल बन जाने से अब हम बिना किसी डर के कॉलेज जाते हैं।"

इन महिला मंडलों को प्रोत्साहन देने के लिए गाँव के पास बनी औद्योगिक इकाईयां इनकी आर्थिक मदद करती हैं। कंपनियों में समय-समय पर आयोजित आत्मसुरक्षा कैंप में गाँव की लड़कियों को ट्रेनिंग दी जाती है। इन कैंपो में गाँव की लड़कियों को शामिल करने की जि़म्मेदारी महिला शक्ति मंडल की होती है।

गाँव के महिला शक्तिमंडल के बारे में बताते हुए बाबूपुर गाँव के ग्राम प्रधान हुकुम सिंह बताते हैं, "ग्रामसभा के सभी छह गाँवों में 10 किशोरियों की मदद से महिला शक्ति मंडल चलाया जा रहा है। यह मंडल महीने में दो से तीन बार पंचायत के हर एक घर में जाकर महिलाओं को स्वास्थ्य व सुरक्षा के लिए जागरूक करता है। इसके साथ-साथ गाँव की लड़कियों को ताइकाण्डो की ट्रेनिंग भी दी गई है।"

गाँव के महिला शक्ति मंडल के साथ बाबूपुर समेत छह गाँव में काम रही गैर सरकारी संस्था 'देहात' इन महिला मंडलों को प्रोत्साहन दे रहा है। ग्राम पंंचायत में इन मंडलों के शुरू हो जाने के बाद जहां एक ओर गाँव में लोग बीमारियों से बचाव के प्रति सजग हो रहे हैं वहीं दूसरी तरफ  यहां की स्थानीय महिलाएं व किशोरियां पहले से अधिक महफूज़ हैं।

अन्नीबैजल ग्राम सभा की महिलाओं को आत्मनिर्भर बना रहे गैर सरकारी संस्थान 'देहात' के क्षेत्रीय अधिकारी प्रदीप सिंह बताते हैं, ''मंडलों के बनने से पहले इन गाँवों में काफी लोगों को एनीमिया की परेशानी थी। हमने बाहर से डॉक्टरों की टीम बुलाकर यहां पर लोगों को बेहतर इलाज दिलवाया। इसके साथ ही ऐसी बीमारियां ज्यादा न फैले इसके लिए गाँवों में किशोरियों के मंडल बनवाकर उन्हें इसके लिए ट्रेनिंग भी दिलवाई गई।" 

"हम समय-समय पर अपने यहां किशोरियों के लिए आत्मसुरक्षा के कैंप लगवाते रहते हैं। इन कैंपों में हमने अभी तक इन सभी गाँवों से आई 200 से ज़्यादा किशोरियों को जूडो और ताइकाण्डो सिखा चुके हैं," प्रदीप सिंह आगे बताते हैं। 

गौरीगंज में अन्नीबैजल, बाबूपुर जैसे गाँव औद्योगिक क्षेत्र में होने के कारण पहले आधुनिक सुविधाओं से अछूते हुआ करते थे। वहीं अब यहां के लोगों में बढ़ रही जागरुकता से आज इन गाँवों में सोलर लाइटें, हाईटेक सरकारी स्कूल, मिनी मार्केट और एटीएम जैसी सुविधाएं आ चुकी हैं। लेकिन जो सबसे बड़ा बदलाव यहां देखने को मिला है वो है यहां की महिलाओं का पहले से ज़्यादा निडर और आत्मनिर्भर होना।

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