कम समय में ज्यादा मुनाफे लिए करें मोती की खेती 

पिछले कुछ वर्षों में मीठे पानी के मोती की खेती की तरफ किसानों का रुझान तेजी से बढ़ा है, इसकी सबसे अच्छी खासियत है कि किसान पंद्रह से बीस हजार में भी इसकी खेती शुरू कर सकता है नौ-दस महीने में डेढ़ से दो लाख रुपए कमा सकता है।

किसान जीतेन्द्र चौधरी पिछले कई साल से मोती की खेती कर रहे हैं, ये खेती के साथ ही किसानों को मोती की खेती का प्रशिक्षण भी देते हैं। जीतेन्द्र बताते हैं, "ये मीठे पानी की सीप होती है, जो तालाबों, नदियों व नहरों में मिलता है, इसमें हम ऑपरेशन करके डिजाइन डाले जाते हैं, ये डिजाइन कई तरह के होते हैं, आधे गोल, पूरे गोल, कई सारे आकृति डिजाइन होते हैं, इन्हें सीप के एक तरफ खोलकर उसमें ये डिजाइन डाल देते हैं, फिर उसे पानी में लटकाकर आठ से नौ महीने तक पानी में डाल देते हैं, और जो आधे गोल मोती होते हैं वो तेरह से चौदह महीने में तैयार होते हैं।"

अगर किसान के पास तालाब है तो सीप खरीदकर उसे चार-पांच दिन पानी में रखकर वहां के आक्सीजन के अनुकूल बनाया जाता है। अगर किसान ने ट्रेनिंग खुद ली है तो इसकी सर्जरी करके एंटीबायोटिक देते हैं जिससे सीप 10 से 20 प्रतिशत की खराब होती हैं। इसकी खेती को करने का सही समय मार्च-अप्रैल, सितम्बर और अक्टूबर महीना है। पीएच मान सात से आठ होना चाहिए। तालाब का पानी महीनें में एक से दो बार बदला जाता है। इन सीप का खानपान बहुत महंगा नहीं होता है।

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वो आगे बताते हैं, "पूरी दुनिया में जितना मोती तैयार होता है उसका 47 मोती इंडिया इंपोर्ट करते हैं, 70 प्रतिशत मोती जो चीन से आती है वो नकली मोती होती है, इससे आप अंदाजा लगा सकते हैं कि देश में मोती की कितनी ज्यादा खपत है।"

पंद्रस से बीस हजार में कर सकते हैं शुरूआत

अगर छोटी सी जगह में कोई किसान मोती की खेती करना चाहता है तो तीन सौ स्क्वायर फीट में, सात-आठ फीट गहरे तालाब में एक हजार सीप से इसकी खेती शुरू कर सकता है। इसमें किसान का खर्च पंद्रह से बीस हजार रुपए पूरे साल का आएगा, जिसमें सीप हो गया, न्यूक्लियस हो गया, उसका जाल हो गया, उसका चारा एल्गी हो गया। उसका चारा चार तरह के एल्गी होते हैं। इसमें 1400 से 1500 मोती तैयार हो जाती है, अगर मिनिमम 100 रुपए में भी आप मोती बेचते हो तो आप डेढ से दो लाख रुपए आप नौ से दस महीने में कमा सकता हैं।

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तालाब में डाल दिये जाते हैं सीप

अब इन सीपों को तालाबों में डाल दिया जाता है। इसके लिए इन्हें नायलॉन बैगों में रखकर (दो सीप प्रति बैग) बांस या बोतल के सहारे लटका दिया जाता है और तालाब में एक मीटर की गहराई पर छोड़ दिया जाता है। प्रति हेक्टेयर 20 हजार से 30 हजार सीप की दर से इनका पालन किया जा सकता है। अन्दर से निकलने वाला पदार्थ बीड के चारों ओर जमने लगता है जो अन्त में मोती का रूप लेता है। लगभग 8-10 माह बाद सीप को चीर कर मोती निकाल लिया जाता है।

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कम लागत में ज्यादा मुनाफा

एक सीप लगभग 20 से 30 रुपए की आती है। बाजार में एक मिमी से 20 मिमी सीप के मोती का दाम करीब 300 रुपए से लेकर 1500 रूपये होता है। आजकल डिजायनर मोतियों को खासा पसन्द किया जा रहा है जिनकी बाजार में अच्छी कीमत मिलती है। भारतीय बाजार की अपेक्षा विदेशी बाजार में मोतियों का निर्यात कर काफी अच्छा पैसा कमाया जा सकता है। सीप से मोती निकाल लेने के बाद सीप को भी बाजार में बेंचा जा सकता है।

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