नौकरी छोड़ आधुनिक तकनीक से शुरू की डेयरी, दूसरों को भी दिया रोजगार

राकेश पंत, कम्युनिटी जर्नलिस्ट

कोटद्वार (उत्तराखंड)। जिस समय पहाड़ों से लोग पलायन करके दूसरे शहरों में रोजगार की तलाश में जा रहे हैं, वहीं पर एक शख्स ऐसा भी है जिसने सेल्स एरिया मैनेजर की नौकरी छोड़ दी और अब वापस गाँव आकर डेयरी चला रहे हैं।

उत्तराखंड के पौड़ी गढ़वाल जिले के कोटद्वार के कुंभीचौड़ गाँव के रहने वाले दीपक सेलवाल चार साल पहले तक उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में सेल्स एरिया मैनेजर की नौकरी किया करते थे। फिर कुछ ऐसी परिस्थितियां आयीं कि उन्हें नौकरी छोड़कर गाँव वापस आना पड़ा। वापस आने के बाद उन्होंने एक गाय से शुरूआत की आज उनकी डेयरी में तीस गाय हैं।

दीपक बताते हैं, "लखनऊ में एरिया सेल्स मैनेजर की नौकरी करता था, कुछ कारण से नौकरी छोड़कर वापस आना पड़ा। यहां पर कुछ दिन खाली बैठा रहा तब मेरे पापा ने कहा कि कुछ करो, क्यों न गाय पाल लो। लेकिन मैंने सुना था कि गाय पालने में घाटा होता है मेरा नहीं मन नहीं था, लेकिन एक गाय ले आया।"

"एक गाय से मैंने शुरूआत कि तो मुझे अच्छा लगा, फिर एक गाय और खरीदी, ऐसे एक-एक गाय खरीदते-खरीदते मेरे पास तीस गाय हो गईं हैं। अगर कोई भी आदमी एक गाय से भी शुरू करता है तो वो महीने में करीब नौ-दस हजार रुपए कमा सकता है, "दीपक ने आगे बताया।


दीपक की डेयरी से दूसरे भी कई लोगों को रोजगार मिला है। दीपक कहते हैं, "एक परिवार अगर डेयरी शुरू करता है तो दूसरे कई परिवारों को भी उससे रोजगार मिल जाता है। इस तरह हम कुछ हद तक बेरोजगारी को दूर कर सकते हैं।"

डेयरी में काम करने वाली दीखा देवी बताती हैं, "जब से हम यहां पर काम कर रहे हैं हमारा घर अच्छा चल रहा है, अगर ऐसे ही कई लोग गाँव में डेयरी शुरू कर दें तो कई लोगों को रोजगार मिल जाएगा।"

दीपक सेलवाल अपनी डेयरी में आधुनिक तरीके से गाय पालते हैं। पहाड़ों पर किसान हरे चारे और भूसे की उपलब्धता न होने के कारण पशुपालन नहीं कर पा रहे है। इस बार में वो बताते हैं, "जो यहां के लोकल डेयरी फार्म हैं, उन लोगों के लगातार संपर्क में रहता हूं और उनसे भी सीखता रहता हूं और दूसरे लोगों को भी बताता रहता हूं। अभी साइलेज की नई तकनीक आ गई है, अब तो इसके छोटे पैक भी आने लगे हैं, जिन्हें आसानी से लाया जा सकता है।"

अच्छे दुग्ध उत्पादन के लिए दुधारु पशुओं के लिए पौष्टिक दाने और चारे के साथ हरा चारा खिलाना बहुत जरुरी है। हरे चारा पशुओं के अंदर पोषक तत्वों की कमी को पूरा करता है। एक दुधारू पशु जिस का औसत वजन 550 किलोग्राम हो, उसे 25 किलोग्राम की मात्रा में साइलेज खिलाया जा सकता है। अच्छी प्रकार से बनाया हुआ साइलेज 30 से 35 दिन में पशुओं को खिलाने योग्य हो जाता है। सबसे पहले मिट्टी को सावधानीपूर्वक हटा लेना चाहिए और इसके बाद पॉलिथीन की चादर को एक किनारे से हटाना चाहिए। साइलेज को आवश्यकतानुसार सावधानी से निकालकर पशु को खिलाना चाहिए जिससे कि साइलेज का कम से कम मात्रा हवा के संपर्क में आए। अन्यथा साइलेज खराब होने की संभावना रहती है।

यहां पर डेयरी में मुनाफा तो है लेकिन कुछ परेशानियां भी हैं, दीपक कहते हैं, "सरकार को चाहिए कि पहाड़ों पर पशु डॉक्टरों की व्यवस्था कराए, ताकि समय-समय पर पशुओं का इलाज हो सके। यही नहीं पहाड़ पर दूध की बिक्री कैसे हो इसके बारे में भी सरकार को सोचना चाहिए।

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