वेश्यावृत्ति के दलदल में फंसी इन औरतों की कहानी

चतुर्भुज स्थान (मुजफ्फरपुर)।

"मैं आप लोगों का ऊपर इंतज़ार करती हूँ, आप आइये," इतना कहकर मटमैला सा कुर्ता पहने और दुपट्टे से अपना मुँह छुपाये रेशमा (बदला हुआ नाम) तेज़ी से भागती हुई सीढ़ियां चढ़ गयी।

सीढ़ियां मुजफ्फरपुर के चतुर्भुज स्थान में सबनम के घर की थीं; जहाँ रेशमा काम करने आती है। "रेशमा को डर रहता है कि कोई उसे पहचान कर घर पर न बता दे कि वो यहाँ काम करती है इसलिए वो...ऐसे ही आती है" सबनम ने बताया... फिर संकरी सीढ़ियां चढ़ कर, कुछ साढ़े पांच-छः फ़ीट ऊंचे दरवाज़े से होते हुए वो मकान में पहुंची। कम उम्र में एक दारूबाज़ रिक्शे-वाले से शादी के बाद सबनम अपना घर चलाने और बच्ची को पढ़ाने के लिए देह व्यापार करती है। ह्यूमन राइट्स वॉच की रिपोर्ट के मुताबिक़ भारत में 20 मिलियन से अधिक वेश्याएँ हैं- और उनमें से 35% 18 वर्ष से कम उम्र में प्रवेश करती हैं।

सामने वाले कमरे में करीबन 16-17 वर्ष की एक और लड़की बालकनी से आती रौशनी के सहारे रही थीं। जैसे ही उसने गाँव कनेक्शन संवाददाता को देखा, वो झेंप गयी और झट-पट अपना मेकअप किट बंद कर, दूसरे कमरे में भाग गयी। भारत सरकार के नियमानुसार शादी के लिए लड़की की न्यूनतम उम्र 18 होनी चाहिए और रीसर्च रिव्यु जर्नल के जून 2018 में डॉक्टर उदय कुमार उज्जवल की ऑनलाइन रिपोर्ट की मानें तो देह व्यापार से जुड़ी 65% महिलाएं इसके पहले ही ब्याह दी जाती हैं जबकि 28.57% 18-20 वर्ष की आयु में और सिर्फ़ 7.15% देह व्यापार करने वाली महिलाओं की शादी 22 वर्ष के बाद होती है।

"हम लोग पहले से ही गरीब थे। मैं, मेरे मां-बाप और चार भाई-बहन... चारो छोटे हैं मुझसे। लेकिन पापा ने शादी कर दी फिर और पति रिक्शा चलता है। मम्मी बहुत बूढ़ी-सूधी है... दूसरा के घर में दाई नौकर का काम करती है... मेरी पांच बहीन है... हाँ, सबसे हम बड़ी हैं और कोई काम नहीं मिला हमे तो यही करते हैं दो-ढाई साल से... क्या करें!" रेशमा बताती है। 17 वर्ष की उम्र में एक 5 साल की बच्ची की मां और साथ ही, 4 छोटे भाई-बहनों और बूढ़े मां बाप का पेट पालने की जिम्मेदारी निभाने के लिए रेशमा को देह व्यापार शुरू करना पड़ा था। डॉक्टर उदय कुमार उज्जवल की रिपोर्ट के अनुसार देह व्यापार में आने वाली 75% महिलाएं 15 से 22 वर्ष की होती हैं।

वैश्यावृत्ति में आने वाली तमाम दिक्कतों में एक दिल झकझोर देने वाला सच बताते हुए रेशमा कहती है, "ये लोग सीधा थोड़ी रहता है... कोई टेटिया है, कोई बदमाश है,कोई गुंडा है। तीन सौ देगा... कहेगा... हम चार आदमी करुंगी... पांच आदमी करूंगी... दो आदमी करूंगी एक साथ। तो मजबूरी में क्या करूंगी दीदी? बोलो... मैं इंसान हूँ, कोई पत्थर थोड़ी हूँ... कि उतनी हो जाएगी।"

बातचीत के दौरान रेशमा यह भी बताती है कि चतुर्भुज स्थान में वैश्यावृत्ति करने वाली सभी महिलाओं को अलग-अलग दाम मिलते हैं। "अरे यहाँ तो सब कुछ देख के पैसा मिलता है कि क्या पहना है, कैसे रहते हैं, दिखने में गोर हैं कि नहीं यही सब... अब जैसे कुछ लोगों को घंटे का 1500 या कहो, 2000 भी मिलता है पर बाकि तो पांच सौ, हज़ार; यही है। हमें तो तीन सौ, चार सौ, ऐसे मिल जाता है घंटे भर का," रेशमा ने बताया।

"बच्चे, बूढ़े, गरीब, अमीर सब आते हैं यहां मैडम जी... दारू पी कर नुकसान भी पहुंचाते हैं। कभी कभी तो एक साथ 2 से भी ज़्यादा एक साथ आ जाते हैं। बहुत गन्दा जीवन है यहां। मैं डेली नहीं आती लेकिन हर दूसरे दिन आती हूं नहीं तो कैसे चलेगा घर?" रेशमा ने कहा।

"तीन हजार रुपया रूम भाड़ा देती हूँ... बिजली बिल... सब तो... बहीन उसीमे हम मजबुरी में... रो-रो कर कमाती हूँ मेरे तो कोई... ऊपर वाला का सहारा है अ नीचे आप सब का दुआ है मजबूरी मैं पति से छुपा-नुका के कर लेती हूँ... पति रिक्शा चलाता है... बहुत दिक्कत है, का करून बहिन? सबके लिए यही सब काम करना पड़ती है अगर सरकार हमको अच्छा नौकरी देते... कोई बिज़नेस देते तो मैं धंधा करबे नहीं करती," वो आगे बताती है।

रेशमा ने अपनी पांच साल की बच्ची का एक प्राइवेट स्कूल में नाम लिखाया है और चाहती है उसे वैश्यावृति के बारे में कभी भी पता न चले। "मेरी एक लड़की है...रुखसार, उसको पढ़ाने के लिए हॉस्टल भेजूंगी। जिस्म बेचकर अपने बच्चे को पढ़ाऊंगी," वो बताती है।

Share it
Top