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नरेश सिरोही ने तैयार किए हैं 21 किस्म के सिरके, कृषि मंत्री ने भी किया है सम्मानित

Mohit SainiMohit Saini   23 Nov 2019 8:29 AM GMT

सरधना, मेरठ (उत्तर प्रदेश)। अभी तक बाजार में चार-पांच तरह सिरके मिलते हैं, लेकिन किसान नरेश सिरोही ने एक-दो नहीं 21 तरह के नए फ्लेवर के सिरके तैयार किए हैं। उन्हें पूर्व केंद्रीय कृषि मंत्री राधा मोहन सिंह ने भी सम्मानित किया है।

उत्तर प्रदेश के मेरठ जिला मुख्यालय से लगभग 28 किमी. दूर सरधना तहसील के झिटकरी गाँव के नरेश सिरोही बताते हैं, "अभी बाजार में केवल 4 किस्म के सिरके हैं, जिसमे गन्ना, सेब, जामुन और अंगूर है। बाकी तरह के सिरके आप पूरे भारत मे ढूंढ़ लीजिए नहीं मिलेंगे हमनें घर पर ही शोध कर के 21 किस्म के नेचुरल सिरके तैयार किए हैं, जिसमें अमरूद, पपीता, तरबूज़, आंवला, अनानास, अनार, लीची, मुख्य हैं।"

वो आगे बताते हैं, "गन्ने में भी हमारे पास लगभग तीन तरह के सिरके हैं अगर हम इन सभी सिरके की बात करें तो सब को अलग-अलग मात्रा में लिया जाता है और सभी सिरके के फायदे भी अलग-अलग हैं। अमरूद के सिरके की बात करें तो यह किस प्रकार फायदा करता है आपको बताते हैं अगर प्राकृतिक फल का सिरका है तो 1 से 4 गुना फायदा करेगा आपकी पाचन क्रिया को मजबूत रखता हैं।"


कृषि में बीएससी के बाद शुरू किया शोध

नरेश सिरोही ने बताया कि उन्होंने अपनी पढ़ाई लखनऊ में कि वह लगभग 20 वर्ष वहां रहें कई प्रोडक्ट पर शोध किया लेकिन मन नही लगा, अचानक पिता जी का देहांत हो गया उसके बाद परिस्थितियां कमज़ोर हो गई सब छोड़ कर अपने गाँव आ गया कुछ दिन बाद चीनी मिल में नौकरी की वहां भी मन नहीं लगा मन मे कुछ करने की चाह थी और ठान लिया कि कुछ अलग पहचान बनानी हैं उसके बाद उन्होंने गन्ना, जामुन, सेब का नैचुरल सिरका तैयार किया जिसको लोगों ने खूब पसंद किया, फिर क्या था आज 21 तरह के सिरके तैयार किए जो आपको ढूंढ़ने से भी नहीं मिलेंगे।

भारतीय सब्जी अनुसंधान संस्थान में पूर्व केंद्रीय कृषि मंत्री राधा मोहन सिंह ने भी किया था सम्मानित

नरेश सिरोही आगे बताते हैं, "मुझे एक बार वाराणसी जाने का मौका मिला मैं वहां तीन दिन रहा था, जहां पर मुझे केंद्रीय कृषि मंत्री राधामोहन सिंह और उत्तरप्रदेश कृषि मंत्री सुर्य प्रताप साही ने मंच पर बुलाकर ब्रॉन्च मैडल और सम्मनित पत्र देकर मेरा हौसला बढ़ाया, जिसमें मैं तीसरे तीन नम्बर पर था उस वक्त मेरे पास 16 किस्म के सिरके थे।"


एक से छह साल में तैयार होता है सिरका

नरेश सिरोही आगे बताते हैं, "हम 21 तरह की सिरके तैयार करते हैं मौसमी फलों के हिसाब से तैयार किया जाता हैं। एक सिरका लगभग एक से छह साल में तैयार होता है, जितना पुराना सिरका होता है उतना अच्छा होता है। हम लगभग हर वर्ष 18 टन माल तैयार करते हैं जो अगले वर्ष तक पूरा बिक जाता हैं लोगो की डिमांड इतनी है कि अभी भी पूरी नहीं हो पाती।"

सिरके के साफ-सफाई और तापमान का रखा जाता है खयाल

नरेश सिरोही आगे बताते हैं, "जिस गोदाम में हम माल तैयार करते हैं उस गोदाम का साफ-सफाई का खासा खयाल रखा जाता है और वह गोदाम पूरी तरह चारों और से बन्द होता, जिससे हवा का आवागमन नहीं होता है। गोदाम में लोगों का आना-जाना भी बहुत कम ही होता है। सभी डिब्बो में अलग-अलग माल तैयार होता है। जब डिब्बे को खोलते ही पानी टपकने लगे तो समझो सिरका अच्छा बनेगा।"


साल 2015 में विनेगर ऑफ विलेज के नाम से शुरू की कंपनी

वो आगे बताते हैं, "विनेगर ऑफ विलेज रखा मतलब ये की गाँव से बना नैचुरल सिरका हमारा खुद का प्रोडक्ट ,खुद का नाम हैं आज नाम से सरीके के ऑर्डर आते हैं। एक वक्त था जब मैं शुरुआत में सिरका तैयार कर के मार्किट में सेल के लिए लेकर गया था तो दुकानदारों ने कहा था कुछ नया लेकरआओ ये पहले से ही मार्किट में है। तब बात लग गई थी उसके बाद से 21 प्रकार के सिरके बना दिए आज उन दुकानदारों के ऑर्डर आते हैं।"

पैकिंग से लेकर मार्केटिंग का काम खुद करते हैं

नरेश सिरोही बताते हैं, "हम सिरके की पैकिंग और मार्केट तक खुद ही पहुंचाते हैं ताकि उसमें कुछ कोई बदलाव न कर दे क्योंकि आज के जमाने मे लोग अपने दुख से दुखी नहीं दूसरे के सुख से दुखी हैं इसलिए हम खुद ही करते हैं, हमारे पास पैकिंग तीन प्रकार की है 250 मिली व 500 मिली, एक लीटर की पैकिंग में भी आप देख सकते हैं किस तरह पारदर्शी सिरका हैं जिस फल का सिरका उसी तरह का रंग है।"


प्रति वर्ष की आय 10 लाख रुपए

नरेश आगे बताते हैं कि हम हर वर्ष सभी प्रकार के सिरके की बात करें तो लगभग 18 टन माल तैयार करते हैं, जिसमें लागत 6 से 8 लाख रुपए आती है और मुनाफ़े की बात करें तो लगभग 10 लाख रुपए प्रति वर्ष कमा लिए जाते हैं। क्योंकि काफ़ी खर्च भी हो जाता है पैकिंग के लिए कांच की बोतल, और उसके लिए मार्केट तक पहुंचाने में भी काफी ख़र्च आ जाता हैं।"

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