छत्तीसगढ़ में आदिवासियों का आंदोलन अब भी है जारी

मंगल कुंजाम, कम्युनिटी जर्नलिस्ट

किरंदुल(दंतेवाड़ा, छत्तीसगढ़)। हजारों आदिवासी अपने देवी-देवताओं की पहाड़ी पर खुदाई के विरोध में एनएमडीसी के दफ्तर के सामने पिछले पांच दिनों से डटे हुए हैं।

बस्तर के बीजापुर, सुकमा और दंतेवाड़ा जिले से हजारों की संख्या में आदिवासी एकजुट हुए हैं। शुक्रवार, 7 जून से सभी आदिवासी एनएमडीसी (नेशनल मिनरल डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन) के किरंदुल स्थित दफ़्तर को घेरे हैं।

इस आन्दोलन में एक बड़ा खुलासा की साल 2014 में हुआ, जिसमें पिटोड़ मेटा के नाम के डिपॉजिट 13 नम्बर पहाड़ पर लौह अयस्क के लिए, खुदाई की अनुमति दी गई थी ग्राम पंचायत हिरोली की सरपंच बुधरी ने आरोप लगाया है कि यहां ग्राम सभा असल मे हुई ही नहीं मात्र 104 लोगो की मौजूदगी में इस कातिथि ग्राम सभा की प्रस्ताव में, जिनके दस्तखत हैं पर वहां थो उस समय साक्षर भी नहीं थे और केवल अंगूठा लगाते थे, फिर यहां दस्तख़त किसने किया, इसके अलावा 104 लोगों में से एक दर्जन से ज्यादा ऐसे लोग हैं, जो इस तारीख से सालों पहले मर चुके थे।


सरपंच ने आदिवासी नेताओं और संयुक्त पंचायत जन सघर्ष समिति के सदस्यों के साथ मिल कर कल पुलिस थाने में फ़र्ज़ी ग्राम सभा कर प्रस्ताव पास किया उनके खिलाफ किरंदुल पुलिस थाने में एफआईआर के लिए आवेदन दिए। इसमें दंतेवाड़ा के तत्कालीन कलेक्टर और एन.एम. डी .सी के सी.एम.डी के खिलाफ फ़र्ज़ी वाड़े की जुर्म कायम करने की मांग की एन एम डी सी पिछले 60 वर्षों से बैलाडिला की पर्वतों पर खच्चे लोहे की खनन कर जापान निर्यात कर कर रही है।

इस संबंध में चर्चा करते हुए आदिवासी समाज और जनपद सदस्य राजू भास्कर ने बताया, "संयुक्त पंचायत जन संघर्ष समिति के बैनर तले आज एनएमडीसी, अडानी ग्रुप, और एनसीएल की गलत नीतियों के खिलाफ जिले के हज़ारों ग्रामीण आदिवासी एनएमडीसी किरंदुल का घेराव करने पहुंचे हैं।

इन चार दिनों के आन्दोल में एनएमडीसी किरंदुल का उत्खनन पूरी तरह बंद होने के कारण इन चार दिनों में कम से कम 24 करोड़ से ज्यादा का नुकसान माना जा रहा है।

इस आंदोलन को नेतृत्व कर रहे, संयुक्त पंचायत जनसंघर्ष समिति के सचिव और वर्तमान में कुआकोंडा ब्लॉक जनपद सदस्य राजू भास्कर ने बताया, "इस मामले का कोई जल्दी निर्णय नहीं होने पर इसका असर बचेली की इकाई तक पहुंच सकता है, क्योंकि वहां भी एनएमडीसी का उत्खनन चल रहा है जरूरत पड़ी तो उसको भी बंद किया जाएगा जिसमें परियोजना का अतिरिक्त करोड़ को इससे भी नुकसान होगा।'


इस आंदोलन में आदिवासियों ने अपनी पारम्परिक ढ़ोल नृत्य तीर धनुष के साथ सीआई एसएफ चैक पोस्ट में जाम कर केंद्र सरकार और राज्य सरकार फर्जी ग्राम सभा करना बंद करो ,भारतीय संविधान का उल्लंघन करना बंद करो जल जंगल जमीन नहीं देंगे जैसे नारों से आवाज बुलंद करते नज़र आ रहे हैं।

क्षेत्रीय आदिवासी संघटन सर्व आदिवासी समाज के अध्यक्ष सुरेश कर्मा ने बताया, "इस बैलाडिला पर्वत पर हमारे नंदराज ईस्ट देव विराजमन हैं, हमारी आदिवासियों की पूरी आस्था इस पर्वत से जुड़ी हुई है।"

सुरेश कर्मा ने संविधान का उल्लेख करते हुए बताया, "भारतीय संविधान के अनुच्छेद 244(1) के अनुसार सम्पूर्ण बस्तर संभाग पांचवी अनुसूचित क्षेत्र है और पंचायती राज्य अधिनियम 1996 लागू होता है इसमें ग्राम सभा की अनुमति के बिना एक इंच भी जमीन न केन्द्र की सरकार को न राज्य की सरकार की दिया जा सकता है। उसके बाद भी फर्जी ग्राम सभा कर जमीनों का अधिग्रहण कर रहे है, अनुछेद 13( 3)क रुढ़ीगत परम्परा विधि का बल मिलता है इस के आधार पर इस पहाड़ में हमारी प्राकृतिक आस्था जुड़ी हुई है, इस आंदोलन में सभी राजनीतिक दल समर्थन की बात तो जरूर कर रही है, पर अभी तक शासन प्रशासन हो या एनएमडीसी कोई भी अधिकारी बात करने तक को तैयार नहीं है हमारी मांग केवल इस पर्वत को बचाये रखना है चाहे कोई भी कंपनी क्यों न हो किसी को नहीं देने की मांग है।

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