इस सरकारी स्कूल में हर बच्चा बोलता है अंग्रेजी

इस सरकारी स्कूल में हर बच्चा बोलता है अंग्रेजीगाँव कनेक्शन

लखनऊ। सरकारी स्कूल में कक्षा दो का छात्र आकाश द्विवेदी अंग्रेजी में अपना परिचय देता है और संस्कृत में सभी बच्चों से प्रार्थना करवाता है। 

उन्नाव जि़ला मुख्यालय से पूर्व दिशा से 45 किमी दूर सोहरामऊ ब्लॉक में एक परिसर में स्थित एक अंग्रेजी मीडियम प्राथमिक स्कूल की छात्र-छात्राएं हर राज्य की राजधानी जानती हैं, वहीं इसी परिसर में बने उच्च प्राथमिक स्कूल के छात्रों को उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री का नाम नहीं पता। ये स्थिति तब है जब प्राथमिक स्कूल के 170 बच्चों को चार शिक्षक संभालते हैं और 139 बच्चों की संख्या वाले उच्च प्राथमिक स्कूल में सात शिक्षक हैं। आठ वर्ष का आकाश बताता है, ''पहले मैं संस्कृत विद्यालय जाता था, सब वहां श्लोक पढ़ते रहते थे, फिर इस स्कूल में पढ़ने वाले मेरे दोस्त ने बताया कि इस स्कूल में अच्छी पढ़ाई होती है वो भी फ्री में। यहां पर मैम और सर हमें प्राइवेट स्कूलों जैसी सुविधाएं देते हैं।"

प्रदेश सरकार ने पायलट प्रोजेक्ट के तहत हर जि़ले में दो ऐसे स्कूल खोले हैं जो अंग्रेजी माध्यम से हैं। हालांकि इन स्कूलों में केवल किताबें अंग्रेजी में हैं जबकि यहां पर पढ़ाने वाले शिक्षक भी वहीं हैं जो अन्य सरकारी स्कूलों में पढ़ाते हैं। ये जानकारी देते हुए सर्व शिक्षा अभियान के विशेषज्ञ डॉ. मुकेश कुमार सिंह बताते है, ''इन स्कूलों को खोलने का उद्देश्य ये था कि बच्चों का रुझान अधिकतर अंग्रेजी की तरफ होता है तो उन्हें क्यों न अंग्रेजी की शिक्षा उपलब्ध कराई जाए। इन स्कूलों में वे ही शिक्षक शिक्षण कार्य करते हैं जो अन्य सरकारी स्कूलों में पढ़ा रहे होते हैं।"

इस प्राथमिक स्कूल में पढ़ने वाले छात्र बाकायदा आईकार्ड, बेल्ट, जूता-मोजा पहनकर आते हैं। ये सुविधाएं सरकार ने नहीं उपलब्ध कराई हैं बल्कि यहां पर पढ़ाने वाले शिक्षक-शिक्षिकाओं ने अपने पास से बच्चों को सुविधाएं उपलब्ध कराई हैं। इतना ही नहीं हर क्लास में एक कक्षा प्रमुख बनाया गया है जिसकी ड्रेस निर्धारित है। ठंड में कक्षा प्रमुख नीले रंग का ब्लेजर पहनकर आता है। स्कूल की प्रधान शिक्षिका स्नेहिल पांडेय बताती है, ''हम लोग कोशिश करते हैं कि बच्चों का सर्वांगीण विकास हो। बच्चों को टाई, बेल्ट आदि उपलब्ध कराने के लिए कोई अनुदान तो नहीं मिलता लेकिन हम चारों शिक्षक मिलकर किसी न किसी तरह बच्चों को ये सब सुविधाएं उपलब्ध कराते हैं ताकि बच्चों का स्कूल आने के प्रति रुझान बढ़े।" वो आगे बताती है, ''जब इस स्कूल मेें हम लोगों की नियुक्ति हुई तो यहां पर छात्र संख्या 90 थी जबकि अब 171 बच्चे स्कूल में पंजीकृत हैं। अब बच्चे अंग्रेजी में अपना हस्ताक्षर भी करते हैं। हालांकि अभी तक हम लोग फर्नीचर की व्यवस्था नहीं कर पाए हैं। कई अधिकारियों और प्रतिनिधियों से भी कहा लेकिन आश्वासन भी मिला।"

देशभर में शैक्षिक गणना करने वाली संस्था राष्ट्रीय शैक्षिक प्रबंधन सूचना प्रणाली डीआईएसई की रिपोर्ट 2013-14 के अनुसार उत्तर प्रदेश में प्राइमरी स्कूलों की संख्या 1,53,220 है और माध्यमिक स्कूलों की संख्या 31,624 है। बजट 2015-16 में लगभग देशभर में 69 हजार करोड़ रुपए शिक्षा के लिए दिया गया, जिसमें लगभग 42 हजार करोड़ प्राइमरी स्कूलों और 26,500 करोड़ रुपए उच्च शिक्षा को दिया गया। पाइसा (योजनाओं के पैसों कार्यान्वयन पर नजर रखने वाली संस्था) 2015 से जारी रिपोर्ट के अनुसार शिक्षा व्यय का 80 फीसदी अध्यापकों के वेतन-ट्रेनिंग में खर्च होता है। इतना पैसा शिक्षकों पर खर्च होने के बाद भी स्नेहिल और उनके साथी शिक्षक अपनी जि़म्मेदारी अच्छी तरह वहन कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर इसी परिसर में स्थित उच्च प्राथमिक विद्यालय में कक्षा आठ का छात्र अभिषेक यूपी के मुख्यमंत्री का नाम तक नहीं बता सका। इस स्कूल में चार पूर्णकालिक शिक्षक हैं और तीन अनुदेशक हैं। स्कूल में बच्चों की संख्या 139 है। एक ओर 170 बच्चों की जिम्मेदारी चार शिक्षक बखूबी निभा रहे हैं और स्कूल के छात्र अंग्रेजी में बात कर रहे हैं तो दूसरी ओर सात शिक्षक मिलकर भी कक्षा आठ के बच्चे को मुख्यमंत्री का नाम तक नहीं याद करा पाए।

स्पेशल 33 में स्पेशल बच्चे

प्राथमिक स्कूल सोहरामऊ में बच्चों को तीन श्रेणियों में विभाजित किया गया है। पढ़ाई में कमजोर बच्चे, ठीक-ठाक पढ़ाई करने वाले बच्चे और अच्छी पढ़ाई करने वाले बच्चों को स्पेशल 33 कहकर संबोधित किया जाता है। इस ग्रुप में 33 ऐसे बच्चे हैं जो अंग्रेजी में बात करते हैं, देश के सभी राज्यों की राजधानी जानते हैं, उन्हें गणित के स्क्वायर तक याद हैं। यही नहीं उन्हें विभिन्न देशों को प्रधानमंत्री और राष्ट्रपतियों के नाम भी याद हैं।

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