केवल एमएसपी बढ़ाने से नहीं बढ़ेगा दलहन उत्पादन: नीति आयोग

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नई दिल्ली (भाषा)। सरकार द्वारा जल्द ही दलहन के न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) में बढ़ोतरी की घोषणा किए जाने की उम्मीद के साथ नीति आयोग के सदस्य रमेश चांद ने आज कहा कि तकनीक में आने वाली रुकावट को दूर किए बगैर केवल समर्थन मूल्य बढ़ाने से ही कम समय में दलहन उत्पादन बढ़ाने में मदद नहीं मिलेगी।

उन्होंने कहा कि सरकार को अपनी नीति पर फिर से विचार करने और तकनीकी मसलों का समाधान करने की ज़रूरत है क्योंकि खुदरा कीमतों पर तब तक दवाब बना रहेगा जब तक कि मांग और आपूर्ति के अंतर को दूर नहीं किया जाता।

थिंक टैंक अंतरराष्ट्रीय खाद्य नीति शोध संस्थान (आईएफपीआरआई) द्वारा आयोजित एक समारोह में उन्होंने कहा, ''मैं कुछ हद तक इस बात से सहमत हूं कि ज़्यादा समर्थन मूल्य दिए जाने से खेती का कुछ रकबा दलहन के लिए बढ़ेगा, लेकिन यह हमें उत्पादन को काफी अधिक बढ़ाने में मदद नहीं करेगा।'' उन्होने कहा कि यह सोचना ‘दिवास्वप्न' होगा कि बिना तकनीकी समस्याओं को दूर किए केवल ऊंचा भाव देने से उत्पादन बढ़ेगा।

कभी दलहनों के भाव गेहूं और चावल के लगभग बराबर हुआ करते थे पर आज इनकी दरें गेहूं और चावल के मुकाबले छह गुना अधिक हैं।

वर्ष 2016-17 (जुलाई से जून) के लिए दलहन और अन्य खरीफ फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य को बढ़ाने के प्रस्ताव पर जल्द ही मंत्रिमंडल की बैठक में विचार किए जाने की उम्मीद है। कृषि मंत्रालय ने दलहन की खेती को प्रोत्साहित करने के लिए एमएसपी को बढ़ाकर 200 रुपए प्रति क्विंटल करने का प्रस्ताव किया है।

दलहन उत्पादन में करीब 70 लाख टन की कमी

चांद ने पहले कहा कि दलहन की कीमतें तब तक उंची बनी रहेंगी जब तक आपूर्ति और मांग के अंतर को नहीं पाटा जाता। उन्होंने कहा, ''दलहन उत्पादन में 40 से 70 लाख टन की कमी है। हम आपूर्ति के लिए दूसरे देशों का दरवाजा खटखटाते हैं। हमें घरेलू उत्पादन को बढ़ाने के लिए तकनीक में आने वाली रुकावटों को दूर करने की ज़रूरत है।''

50 प्रतिशत घटी प्रति व्यक्ति दलहन की खपत

चांद ने आगे कहा कि दलहन की प्रति व्यक्ति दैनिक खपत घटकर 38 ग्राम रह गई है जो 15 साल पहले 60 ग्राम के लगभग थी। उन्होंने कहा, ''अगर हमें वापस 60 ग्राम के स्तर को पाना है तो हमें उत्पादन को मौजूदा 1.7-1.8 करोड़ टन से बढ़ाकर चार करोड़ टन करने की ज़रूरत होगी।

इस वर्ष दलहन का उत्पादन एक करोड़ 73.3 लाख टन होने का अनुमान है जो पूर्व वर्ष के एक करोड़ 71.5 लाख टन के उत्पादन से मामूली अधिक है लेकिन फसल वर्ष 2013-14 के रिकॉर्ड एक करोड़ 92.5 लाख टन से काफी कम है। 

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