जीरे का निर्यात ज़्यादा होने से कीमतें असमान पर

अमित सिंहअमित सिंह   17 Jun 2016 5:30 AM GMT

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लखनऊ। बीते कुछ वक्त से जीरे की कीमतों में तेज़ी बनी हुई है। देश की सबसे जीरा मंडी गुजरात के ऊंझा में जीरा करीब 17,500 रुपए प्रति क्विंटल बिक रहा है। ये हालत तब है जब हिंदुस्तान जीरे का सबसे बड़ा उत्पादक राष्ट्र है। वैश्विक ज़रूरत का 70 फीसदी से ज्यादा जीरा भारत में पैदा होता है फिर भी घरेलू बाज़ार में जीरे की कीमतें आसमान पर क्यों हैं?

उत्पादन में अव्वल फिर भी जीरा महंगा 

कृषि अर्थशास्त्रियों के मुताबिक़ भारत में पैदा होने वाले जीरे की एक बड़ी मात्रा बाहरी मुल्कों में निर्यात कर दी जाती है जिसके चलते घरेलू ज़रूरतों को पूरा करने के लिए जीरा बचता ही नहीं और मांग ज्यादा होने के कारण कीमतों में बढ़ोतरी हो जाती है। बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी के कृषि अर्थशास्त्री राकेश सिंह कहते हैं, “जीरे की कीमतों में बढ़ोतरी की एक बड़ी वजह मांग और आपूर्ति का बड़ा अंतर भी है।

हम भले ही दुनिया में जीरे के सबसे बड़े उत्पादक राष्ट्र हैं फिर भी हमारे घरेलू बाज़ारों में हमारी ज़रूरतों को पूरा करने के लिए जीरे की उपलब्धता ही नहीं है।” वो आगे बताते हैं, “जीरे की एक बड़ी मात्रा विदेश में निर्यात की जाती है जिसकी वजह से जीरे की कीमतें आसमान पर हैं। देखा जाए तो जीरे का एक्सपोर्ट हमारी मजबूरी भी है। विश्व व्यापार संगठन का हिस्सा होने के नाते हम इससे इनकार नहीं कर सकते। हां इतना करना संभव है कि सरकार जीरे के एक्सपोर्ट पर थोड़ा लिमिट लगा दे।’’ पूरी दुनिया में जीरे का सालाना उत्पादन करीब 3 लाख टन है, जो भारत के मुक़ाबले बेहद कम है। साल 2000 में भारत में कुल 2 लाख टन जीरे का उत्पादन हुआ। 2011-12 में ये आंकड़ा बढ़कर करीब 5 लाख टन तक पहुंच गया।

जीरे का उत्पादन विदेशों में

भारत के अलावा सीरिया, ईरान और टर्की में जीरे का उत्पादन बड़े पैमाने पर किया जाता है। दुनिया की कुल मांग का 7 फीसदी सीरिया, 6 फीसदी ईरान और करीब 6 फीसदी ही टर्की के हिस्से में आता है। भारत जीरे की कुल पैदावार का बड़ा हिस्सा अमेरिका, ब्रिटेन, ब्राज़ील, दुबई, नेपाल और मलेशिया को निर्यात करता है, जिसकी वजह से घरेलू इस्तेमाल के लिए जीरे की थोड़ी मात्रा ही बच पाती है।

एग्री इकोनॉमी के जानकार प्रोफ़ेसर राकेश कुमार सिंह कहते हैं, “सबसे पहले ये ज़रूरी है कि हम अपनी मांग के हिसाब से जीरा अपने पास रखें और इसके बाद जो अतिरिक्त जीरा बचता है उसका ही निर्यात किया जाना चाहिए। जीरा सबसे ज्यादा इस्तेमाल किए जाने वाले मसालों में से एक है। या तो इसके उत्पादन में बढ़ोतरी की जाए या फिर इसके एक्सपोर्ट को आधा कर दिया जाए।’’

लखनऊ यूनिवर्सिटी की सीनियर प्रोफेसर मधुरिमा बताती हैं, ‘’सरकार को एक्सपोर्ट पॉलिसी दुरुस्त करने की ज़रूरत है। पहले डोमेस्टिक डिमांड को पूरा करें फिर विदेश की चिंता करें।’’

इन इलाकों में होती है जीरे की खेती ?

भारत में गुजरात और राजस्थान दो प्रमुख ऐसे राज्य हैं जहां जीरे की खेती की जाती है। गुजरात के ऊंझा और राजकोट ज़िले में जबकि राजस्थान के कोकरी, नागौर, जोधपुर, पाली और जयपुर में जीरे की खेती होती है। आमतौर पर नवंबर से दिसंबर के बीच जीरे की बुआई होती है फसल करीब 120 से 130 दिन यानी फरवरी-मार्च तक तैयार हो जाती है। भारत में आमतौर पर जीरे की तीन किस्में आर ज़ेड-19, आर ज़ेड-209 और जीस-1 की खेती की जाती है।

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