महिलाएं कैसे बन पाएंगी श्रम शक्ति का हिस्सा ?

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नई दिल्ली। उभरती अर्थव्यवस्थाओं की तुलना में भारत, राजनीतिक कार्यालय में कार्यरत महिलाओं के बेहतर दरों का दावा करता है। हाल ही में, राष्ट्र में 16 वीं महिला मुख्यमंत्री, महबूबा मुफ्ती ने कार्य भार संभाला है। लेकिन एक मुख्य कारण है महिलाओं को काम नहीं मिलना। भारत उस स्थिति से परे है जब अर्थशास्त्री उम्मीद कर सकते हैं कि महिलाओं की उच्च संख्या श्रम शक्ति की भागीदार बनेंगी। लेकिन इसके बजाय, 250 लाख महिलाओं ने पिछले 10 वर्षों में भारतीय श्रम शक्ति को छोड़ दिया है । वर्तमान में, केवल 27 फीसदी भारतीय महिलाएं श्रम शक्ति का हिस्सा है, दक्षिण एशिया में पाकिस्तान के बाद महिलाओं की श्रम शक्ति में दूसरी सबसे कम दर है और जब उस देश की महिला श्रम शक्ति की भागीदारी बढ़ रही है, भारत में गिर रही है।

महिलाओं के लिए बाहर नौकरी ढूंढना एक बड़ी चुनौती 

भारत में महिलाएं अधिक स्वस्थ्य और अधिक शिक्षित हो रही हैं, लेकिन कम संख्या में काम कर रही हैं। महिलाओं के बाहर नौकरी ढूंढना एक बड़ी चुनौती है, जब महिलाएं घर के बाहर काम करती हैं, औसतन, वह उतनी दूर यात्रा नहीं करती जितना पुरुष करते हैं। संक्षेप में, घर से जितनी दूर काम करने का अवसर मिलता है उतना ही महिलाओं के काम करने की संभावना कम होती है।

महिलाओं में कौशल, सामाजिक मानदंडों की कमी 

भारतीय महिलाएं काम करना चाहती हैं लेकिन कौशल, सामाजिक मानदंडों की कमी के कारण पीछे होती हैं। एविडेंस फॉस पॉलिसी डिज़ाइन में किए गए एक शोध बताते हैं कि भारत की महिलाएं उच्च दरों पर श्रम शक्ति में भाग लेना चाहती हैं। लेकिन वे कौशल की कमी के कारण पीछे होती हैं एवं सामाजिक मानदंडों के कारण उनकी गतिशीलता सीमित होती है।

घर आधािरत करती हैं काम

महिलाएं जो कृषि से बाहर काम करती हैं वह आमतौर पर घर आधारित काम ही करती हैं। राष्ट्रीय नमूना सर्वेक्षण के आंकड़ों के अनुसार, भोपाल और सीहोर में ग्रामीण युवाओं पर पायलट सर्वेक्षण के दौरान गरीबी रेखा से नीचे के 91 फीसदी, महिला उत्तरदाताओं (18-25 आयु वर्ग) को लगता है कि महिलाओं को घर के बाहर जाना चाहिए, हालांकि इनमें से 70 फीसदी महिलाएं, पिछले वर्ष बेरोज़गार थीं।

पति का पत्नी पर हाथ उठाना आम

राष्ट्रीय स्तर पर, आईएचडीएस सर्वेक्षण में यह भी सामने आया कि 51.7 फीसदी महिलाओं को लगता है कि यदि महिलाएं बिना अनुमति के काम के लिए बाहर जाती हैं को पति का पत्नी पर हाथ उठाना आम बात है। यहां तक कि यदि महिलाओं को बाहर जा कर काम करने की स्वतंत्रता है फिर भी वो लम्बी यात्रा करने से घबराती हैं। एक नमूने में, 62 फीसदी महिलाओं ने माना कि वह काम के सिलसिले में बाहर जा सकती हैं लेकिन 70 फीसदी ने कहा कि वे घर से दूर काम करने में असुरक्षित महसूस करती है।

भारतीय अर्थव्यवस्था में कई स्थान

भारतीय अर्थव्यवस्था में कई स्थान हैं जहां महिलाएं श्रम बल में अच्छी तरह से काम कर रही हैं लेकिन यह वह क्षेत्र हैं जहां महिलाएं घर के पास काम कर सकती हैं। मनरेगा  के तहत बनाई गई परियोजनाएं, महिला कर्मचारियों की अच्छी संख्या आकर्षित करने में काफी सफल रहा है। जहां केवल 27 फीसदी ग्रामीण महिलाएं घर के बाहर काम करती हैं, 2014 में मनरेगा के तहत 51 फीसदी महिलाएं कार्यरत थीं।

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