मृत्यु की तरह कांग्रेस भी कभी बदनाम नहीं होती: मोदी

मृत्यु की तरह कांग्रेस भी कभी बदनाम नहीं होती: मोदीGaon Connection narendra modi

गाँव कनेक्शन नेटवर्क

नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार को राज्यसभा में राष्ट्रपति के अभिभाषण का जवाब देते हुए विपक्ष पर जमकर तंज कसा। साथ ही पीएम मोदी ने अपील की कि संसद को सकारात्मक ढंग से चलाकर सांसद देश के लिए रचनात्मक काम करें। पीएम ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा 'जैसे कभी मृत्यु बदनाम नहीं होती वैसे ही कांग्रेस की भी कभी बदनामी नहीं होती।'

राज्य सभा में पीएम मोदी के भाषण की 10 बड़ी बातें 

पहली बड़ी बात

प्रश्नकाल अपने आप में सदस्यों की अपनी संपत्ति की तरह है। महत्वपूर्ण विषयों पर सरकार को कठघरे में खड़ा करना...जैसी कई बातों के लिए सबसे ताकतवर समय है प्रश्नकाल।

दूसरी बड़ी बात

सरकार को सजग रखने के लिए प्रश्नकाल अहम है। यही लोकतंत्र की ताकत है। संसद चलने की वजह से सबको बोलने का समय मिला। देर तक काम करने के बाद भी सभी खुश दिखे।

तीसरी बड़ी बात

सरकार नीतियों के आधार पर चले, इस पर जोर हो। हमने सत्ता के विकेंद्रीकरण की दिशा में अहम कदम उठाए। हमें क्वांटन जंप की तरफ जाना जरूरी है। दोनों सदनों में तालमेल जरूरी है। लंबित बिल पास हैं।

चौथी बड़ी बात

300 संशोधन आए हैं और सबका अपना महत्व है। सदस्यों से अपील है कि संशोधन वापस लें। 

पांचवीं बड़ी बात

मृत्यु को एक वरदान मिला है। मृत्यु कभी बदनाम नहीं होती। कांग्रेस को वरदान मिला हुआ है, कांग्रेस को कभी बदनामी नहीं मिलती। 

छठवीं बड़ी बात

भ्रष्टाचार, भाई भतीजावाद ने जकड़ लिया था। मैंने पिछले दिनों 300 प्रोजेक्ट खुद रिव्यू किए। फंसे हुए प्रोजेक्ट फिर से चालू हो गए हैं। 

सातवीं बड़ी बात

सुशासन की पहली शर्त पारदर्शिता है। हमने गुड गवर्नेंस पर जोर दिया है। इसका दूसरा पहलू है जवाबदेही। 

आठवीं बड़ी बात

2014 में स्किल डेवलपमेंट पर अलग मंत्रालय बनाया गया। डेढ़ साल में आईटीआई में 30 फीसदी इजाफा। अतंर्राष्ट्रीय स्तर पर वर्कफोर्स तैयार करने पर जोर दिया। स्टार्ट अप्स को तीन साल टैक्स पर रियायत दी है।

नौवीं बड़ी बात

दो तरह के लोग होते हैं, एक काम करते हैं और दूसरे श्रेय लेते हैं। कांग्रेस ने अगर काम किया होता तो हमें जन-धन लाने की जरूरत नहीं होती। 

दसवीं बड़ी बात

भाषण का अंत करते हुए उन्होंने निदा फाज़ली की गजल पढ़ी, 'सभी हैं भीड़ में, तुम भी निकल सको तो चलो, सफर में धूप तो होगी जो चल सको तो चलो, किसी के वास्ते राहें कहां बदलती हैं, तुम अपने आप को खुद ही बदल सको तो चलो। यहां किसी को कोई रास्ता नहीं देता, मुझे गिरा के तुम संभल सको तो चलो'।

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