शिक्षा के नाम पर क्यों भटक रहीं हैं घाटी की लड़कियां?

शिक्षा के नाम पर क्यों भटक रहीं हैं घाटी की लड़कियां?बीच में पढ़ाई छोड़ रही है जम्मू-कश्मीर की लड़कियां।

रिपोर्टर- आगा अशफाक

सेहड़ी ख्वाजा, (पुंछ)। धरती का जन्नत कहे जाने वाले जम्मू कश्मीर के जिला पुंछ की तहसील सुरनकोट के गाँव हाड़ी-मरहोट में शिक्षा की दयनीय स्थिति सभी शिक्षा योजनाओं पर प्रश्न चिन्ह लगाती है। सुविधाओं के अभाव में यहां की लड़कियों को बीच में ही पढ़ाई छोड़नी पड़ रही है।

गाँव हाड़ी में शिक्षा प्रणाली में खामियां होने के कारण बच्चे पढ़ाई बीच में ही छोड़ देते हैं। इस बारे में एक बुजुर्ग सरफराज का कहना है, “इस क्षेत्र को राजनीतिक भेदभाव की वजह से नजरअंदाज किया जाता है, जबकि इस गाँव में बड़ी आबादी रहती है। हम मूलभूत सुविधाओं से वंचित हैं। इनमें शिक्षा की हालत सबसे बदतर है। यहां के अधिकांश छात्र दसवीं के बाद पढ़ाई छोड़ देते हैं। इसके आगे की पढ़ाई के लिए कोई स्कूल नहीं है।” वे बताते हैं, “आगे की पढ़ाई के लिए घंटों सफर तय करने के बाद मरहोट बस अड्डे पर पहुंचने पर वहां से मेटाडोर द्वारा लठोन्ग उच्च विद्यालय जाना पड़ता है जो बच्चों के लिए मुसीबत का सबब है।”

ऐसी स्थिति में लड़कियां और भी जल्दी स्कूल को अलविदा कह देती हैं जिसकी मिसाल सुमय्या खातुन है। इस सिलसिले में सुमय्या कहती हैं, ‘’मैंने हाड़ी में नौवीं कक्षा में दाखिला लिया था, लेकिन स्कूल दूर होने की वजह से स्कूल नहीं जा सकी। मुझे अपने घर से स्कूल तक जाने में काफी समय लग जाता था। इसलिए मैं समय पर स्कूल नहीं पहुंच पाती थी। मैंने नौवीं कक्षा के बाद स्कूल छोड़ दिया।’’

वह बताती हैं, “गाँव में जो स्कूल है उसमें शौचालय नहीं है। यह समस्या सिर्फ हाड़ी गांव की ही नहीं है बल्कि तहसील सुरनकोट के गांव मरहोट की लड़कियां भी इस समस्या से परेशान हैं।” इस संबंध में अपर मरहोट के सरपंच हाजी खादिम हुसैन ने चरखा चलाते हुए बताया, “एक तो पूरे गाँव में एक ही हाईस्कूल है। बार-बार सरकार से मांग की कि लड़कियों के लिए एक अलग उच्च विद्यालय बनवाया जाए लेकिन इस पर किसी ने ध्यान नहीं दिया। दूसरा बड़ा मुद्दा यहां से उच्च माध्यमिक स्कूल जाने के लिए लगभग पंद्रह किलोमीटर का पहाड़ी रास्ता तय करना होता है जिसमें आधे रास्ते में सही सड़क नहीं है। शेष रास्ते में सड़क ही नहीं है। स्कूल का समय तो सभी के लिए एक ही है, लेकिन सड़क सही न होने के कारण एक ही समय में बड़ी संख्या में वाहन उपलब्ध नहीं होते ताकि सारी बच्चियां स्कूल पहुंच सकें। नौबत यहां तक पहुंच जाती है कि बच्चियों को आम सवारी के साथ भेड़-बकरियों की तरह धकेल दिया जाता है।”

इस क्षेत्र को राजनीतिक भेदभाव की वजह से नजरअंदाज किया जाता है, जबकि इस गाँव में बड़ी आबादी रहती है। हम मूलभूत सुविधाओं से वंचित हैं। इनमें शिक्षा की हालत सबसे बदतर है। यहां के अधिकांश छात्र दसवीं के बाद पढ़ाई छोड़ देते हैं। इसके आगे की पढ़ाई के लिए कोई स्कूल नहीं है। आगे की पढ़ाई के लिए घंटों सफर तय करने के बाद मरहोट बस अड्डे पर पहुंचने पर वहां से मेटाडोर द्वारा लठोन्ग उच्च विद्यालय जाना पड़ता है जो बच्चों के लिए मुसीबत का सबब है।
सरफराज, बुजुर्ग, गाँव हाड़ी

इस संबध में जब एक स्कूली छात्र से बात की गई तो उन्होंने बताया, ‘’नौवीं कक्षा का छात्र हूं। मैं डॉक्टर बनना चाहता हूं। उच्च विद्यालय हाड़ी में पढ़ रहा हूं और मेरे स्कूल में विज्ञान के शिक्षक ही नहीं हैं।’’ इससे साफ जाहिर होता है कि बच्चों में उत्साह और उल्लास की कमी नहीं है बल्कि सुविधाएं न मिलने के कारण उनके सपने अधूरे रह जाते हैं। इसमें कोई शक नहीं कि हमारी सरकार शिक्षा के क्षेत्र में विकास के लिए हर तरह से नेक इरादे रखती है।

साभार: चरखा फीचर्स

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