स्वस्थ मां ही स्वस्थ परिवार का आधार, जागरूकता है ज़रूरी

स्वस्थ मां ही स्वस्थ परिवार का आधार, जागरूकता है ज़रूरीप्रतीकात्मक फोटो

लेखिका- मारियों नरोन्हा

दिल्ली गुड़गांव। पति जब शराब के नशे में देर रात घर लौटता है तो ऐसी स्थिति में वो जबरन अपनी पत्नी पर शारीरिक संबध बनाने का दबाव डालता है। इस परिस्थिति का सामना अधिकतर महिलाओं को करना पड़ता है चाहे वो शहरी क्षेत्र में रहने वाली शिक्षित महिला हो या ग्रामीण क्षेत्र की अशिक्षित महिला। लेकिन कभी कभी जागरूक होने और कभी जागरूक न होने के कारण पति द्वारा हर रोज पत्नी पर शारीरिक संबध बनाने का दबाव पत्नी के लिए भारी पड़ जाता है और वो गर्भवती हो ही जाती है क्योंकि गर्भ को रोकने वाले सारे उपाय जैसे- कॉपर टी, गर्भनिरोधक दवाईयों का इस्तेमाल वो नहीं कर पाती।

करें भी कैसे, पति द्वारा अचानक दिया जाने वाला दबाव उसे इतना समय ही नहीं देता कि वो इन उपायों का प्रयोग कर सके। हमारे देश में महिलाओं के गर्भवती होने के कारणों में यह चर्चित कारण है। घटना पूर्ण रुप में गर्भवती होने के बाद भी इस प्रक्रिया को बार बार दोहराया जाता है। इसके पीछे कई भ्रम हैं जिनमें सबसे बड़ा है बेटों की चाहत रखना और बेटों द्वारा मिलने वाली आर्थिक मदद और वंश को आगे बढ़ाने को एकमात्र कारण मानना। ऐसे में सरकार द्वारा चलाई जाने वाली परिवार नियोजन योजना कितनी कारगर है।

इस बारे में दिल्ली स्थित चरखा फीचर्स के डिप्टी एडीटर मो अनिस उर रहमान खान कहते हैं, “यूं तो राज्य एवं केन्द्रीय स्तर पर अनगिनत परिवार नियोजन की योजनाएं चल रही है। इसके अतिरिक्त स्वयं सेवी संगठन भी इस क्षेत्र में अच्छा काम कर रही है। लेकिन हमारे समाज में इसका प्रयोग करने में झिझक महसूस किया जाता है। बिहार की राजधानी पटना में रहने वाली 45 वर्षीय रुखसाना बानो जिनके तीन बच्चे हैं। परिवार नियोजन के बारे बताती हैं, “शादी हो जाए और ज्यादा दिनों तक बच्चा न हो तो लोग उसे अच्छा नहीं मानते, घर परिवार वाले ताने भी सुनाते हैं, ऐसे में सेहत की चिंता कौन करता है।”

राजधानी पटना में होम्योपैथी के क्षेत्र में सेवा देने वाली डॉक्टर चंदा कुमारी परिवार नियोजन की जागरुकता पर प्रकाश डालते हुए कहती है मेरे क्लिनिक पर हर रोज कई महिलाएं इस समस्या को लेकर आती हैं कि उन्हें अनचाहा गर्भ ठहर गया जबकि अभी वो मां नहीं बनना चाहती थी। मैं अक्सर ऐसी महिलाओं को परिवार नियोजन के विभिन्न उपाय के बारे में बताती हूं लेकिन उनकी तरफ से जवाब एक ही आता है कि पति नहीं चाहते कि इन उपायों का प्रयोग करुं। परिवार नियोजन वास्तव में कितना महत्वपूर्ण है इस सवाल के जवाब में महिला पत्रकार अंजलि पाण्डेय कहती है, “परिवार नियोजन सिर्फ इसलिए महत्वपूर्ण नहीं है क्योंकि इससे बच्चों के बीच अंतराल रखने मे सहायता मिलती है बल्कि ये इसलिए भी महत्वपूर्ण कि मंहगाई के इस दौर में ज्यादा बच्चों के लालन पालन में भी दिक्कत आती है और इसके कारण बच्चे अच्छी शिक्षा से भी वंचित रह जाते हैं। इसलिए आवश्यक है कि हम परिवार नियोजन की महत्वपूर्णता को इस नजरिए से भी देखें।”

क्या कहते हैं आंकड़े

उपर्युक्त विचारों की रोशनी में परिवार नियोजन के बारे में लोगो की सोच साफ झलकती है जबकि इस संदर्भ में विश्व स्वास्थ्य संगठन के आंकड़ो पर नजर डालें तो मालूम होता है कि वैश्विक स्तर पर हर साल 5 लाख 29 हजार महिलाओं की मौत प्रसव के दौरान होती है। इनमें 1 लाख 36 हजार अर्थात 25. 7 प्रतिशत महिलाएं भारत की हैं। आंकड़े ये भी बताते हैं कि गर्भवस्था के दौरान और बच्चे के जन्म के समय हर पांच मिनट पर एक भारतीय मां की मौत होती है, जिनमें से दो तिहाई मां की मौत बच्चा पैदा होने के बाद होती है। आपातकालीन प्रसव के बाद गर्भाशय फट जाने से प्रति एक लाख में 83 माताएं मौत की शिकार हो जाती है।

इस संबध में मातृत्व मृत्यु दर 17. 7 प्रतिशत जबकि नवजात मृत्यु दर 37. 5 प्रतिशत है। जनसंख्या के क्षेत्र मे काम करने वाली दिल्ली स्थित गैर सरकारी संगठन पापुलेशन फाउन्डेशन ऑफ इंडिया के अनुसार 1995-2015 तक वैश्विक स्तर पर 27,2000 महिलाओं को मां बनने के दौरान अपनी जान गंवानी पड़ी, जिसका मुख्य कारण संक्रमण था। आंकड़े चौंकाने वाले हैं लेकिन हम चाहतें हैं कि इन आंकड़ों में कमी आए तो इसके लिए न सिर्फ सरकार बल्कि उससे कहीं ज्यादा हम सबको परिवार नियोजन के प्रति अपनी मानसिकता को बदलना होगा और उपलब्ध विकल्पों को पत्नी और अपने परिवार की सुरक्षा के लिए जीवन में अपनाना होगा। क्योंकि एक स्वस्थ मां ही स्वस्थ परिवार का आधार होती है।

साभार: चरखा फीचर्स

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