शुभ और मंगल की प्रतीक हैं बिहार की पारम्परिक लहठी

लहठी बिहार में बनने वाली लाह की चूड़ियों का स्थानीय नाम है जिन्हें विवाहिता महिलायें हमेशा पहने रखती हैं। लाह की चमक लिए चटकीली गुलाबी, लाल, हरी लहतियों को देखकर कोई उन्हें खरीदे बिना शायद ही रह पाए।

शुभ और मंगल की प्रतीक हैं बिहार की पारम्परिक लहठी

मधुबनी। बिहार की रहने वाली सभी शादीशुदा महिलाओं के पहनावे में जो एक चीज़ सामान्य है वो है वहां की पारंपरिक लहठी। लहठी बिहार में बनने वाली लाह की चूड़ियों का स्थानीय नाम है जिन्हें विवाहिता महिलायें हमेशा पहने रखती हैं।

वैसे तो पूरे बिहार भर में लाह की रंग बिरंगी लहठियाँ मिल जाएँगी लेकिन इनको बनाने का काम मुजफ्फरपुर के गाँवों के अलावा दरभंगा और मधुबनी के ही कुछ गाँवों में होता है।

मधुबनी के ही सरसब पाही गाँव की रौशनआरा बेगम और उनके परिवार द्वारा बनायीं गयीं लहठी हर शादी के घर जाता है। लाह की चमक लिए चटकीली गुलाबी, लाल, हरी लहतियों को देखकर कोई उन्हें खरीदे बिना शायद ही रह पाए।

तस्वीरों में देखिये मधुबनी जिले के पंडौल और सरसब पाही गाँव में बंटी रंगबिरंगी लहठीयां।


























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