इस गाँव का हर घर कुछ कहता है: तस्वीरों में देखिये इस सुन्दर लोक-कला के नमूने

आज यह कला गांव के हर दुसरे घर के निवासी के लिए आजीविका का स्रोत बन गया है। आज, गांव के हर घर में कम से कम एक मधुबनी कलाकार है। देखिये जिज्ञासा मिश्रा की तस्वीरों में जितवारपुर गाँव व मधुबनी कला के कुछ दृश्य #Photostory

इस गाँव का हर घर कुछ कहता है: तस्वीरों  में देखिये इस सुन्दर लोक-कला के नमूने

जितवारपुर (बिहार): अपने चटकीले रंगों, जीवंत चित्रों और विस्तृत रूपों के लिए जानी जाने वाली मिथिला चित्रकला, जिसे अब मधुबनी पेंटिंग के नाम से जाना जाता है, बिहार और नेपाल के मिथिला क्षेत्र की लोक कला है। मधुबनी जिले के जितवारपुर गांव से शुरू होकर अब विश्वप्रसिद्ध इस लोक-कला ने जितवारपुर की ही एक ब्राह्मण महिला सीता देवी से यह लोकप्रियता प्राप्त की।

मधुबनी कला की शुरुआत ब्राह्मण परिवारों के महिलाओं द्वारा त्यौहारों व शादी-विवाह के दौरान घरों को सजाने के लिए बनाई गयी कलाकृतियों से हुई। पर यह पारम्परिक कला रूप अब गांव में रहने वाले हर निवासी के आमदनी का प्रमुख श्रोत है। प्रान्त की महिलाएं शुभ अवसरों के दौरान सजावट के रूप में अपनी घर की दीवारों को हिन्दू पौराणिक कथाओं की घटनाओं के आधार पर चित्रित करती हैं। चित्रों में रंग भरने के लिए ज्यादातर पत्तियों, फूलों और फलों से निकाले गए प्राकृतिक रंगों का इस्तेमाल होता है

औसतम 90 फ़ीसदी घरों में महिलाएं यह कला बनती ही हैं। आज यह कला गांव के हर दुसरे घर के निवासी के लिए आजीविका का स्रोत बन गया है। सीता देवी के भारत रत्न समेत कई राष्ट्रीय पुरस्कार जीतने के बाद मधुबनी कला ने यह प्रसिद्धि अर्जित की। आज, गांव के हर घर में कम से कम एक मधुबनी कलाकार है।

मधुबनी चित्रों में अब पांच विशिष्ट शैलियाँ हैं - कोहबर, भरनी, कचनी, तांत्रिक और गोदना। देखिये जिज्ञासा मिश्रा की तस्वीरों में जितवारपुर गाँव व मधुबनी कला के कुछ दृश्य #Photostory--


1/11: मधुबनी से जितवारपुर गांव के तरफ़ बढ़ते हुए, एक घर के दरवाज़े पर बनी मधुबनी कला



2/11: भरनी- चित्रों में रंगों से बारीकियां भरने की प्रक्रिया










3/11: गाँव के एक घर की दीवार पर काले और सफेद कचनी शैली में चित्रित जयमाल का छण







4/11: घर की दीवार पर चित्रित माँ काली


5/11: आकृति को दोहराने की प्रक्रिया- मधुबनी शैली में चित्रों में उभार लाने के लिए उन पर डबल लाइनिंग की जाती है




6/11: स्थानीय कलाकार






7/11: गोबर और मिटटी से लीपी हुई दीवार पर चित्रित कृष्ण और कदम्ब



8/11: मिट्टी के घर के अंदर चित्रित कदंब पर कृष्ण








9/11: सीता देवी के पौत्र मिथिलेश कुमार झा, उनकी पेंटिंग्स के साथ



10/11: गांव के पास की एक सरकारी इमारत









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