पंजीकरण के नाम पर मज़दूरों का मज़ाक

vineet bajpaivineet bajpai   12 Dec 2015 5:30 AM GMT

पंजीकरण के नाम पर मज़दूरों का मज़ाकगाँव कनेक्शन

गांधीग्राम (लखनऊ)। तूफान नाथ (32 वर्ष) ने वर्ष 2013 को पहली बार एक एनजीओ की मदद से अपना मज़दूर होने का पंजीकरण तो करवा लिया था, लेकिन उसके बाद वो अपने पंजीकरण का नवीनीकरण नहीं करवा सके, क्योंकि उसके बाद वो उतनी सारी जानकारी जुटा ही नहीं पाए, जिनके होने के बाद ही मज़दूरों का पंजीकरण होता है।

तूफाननाथ लखनऊ जि़ला मुख्यालय से करीब 25 किमी दूर सरोजनी नगर ब्लॉक की कल्ली पश्चिम ग्राम पंचायत के गांधीग्राम गाँव के रहने वाले हैं और रोज लखनऊ मज़दूरी करने जाते हैं। वो बताते हैं, "पंजीकरण करवाने में इतनी ज़्यादा जानकारी भरनी होती है कि वो सारी जानकारी इकट्ठा ही नहीं हो पाती हैं। हर साल पंजीकरण (नवीनीकरण) के लिए पिछले पूरे साल जितनी भी जगह पर काम किया उसकी पूरी जानकारी देनी होती है, नहीं तो नहीं हो पाता।" वो आगे बताते हैं, "पहली बार जब मेरा पंजीकरण हुआ था, तो उस साल कुछ पैसे सामान खरीदने के लिए मिले थे, लेकिन उसके बाद कुछ नहीं मिला।"

तूफान नाथ के जैसे ही पूरे उत्तर प्रदेश में हज़ारों लाखों लोग रोज अपने गाँव से शहर मज़दूरी करने के लिए जाते हैं, लेकिन उनमें से कुछ गिने चुने ही मज़दूर होंगे जिन्हें सरकार से मिलने वाली योजनाओं का लाभ मिल पाता है, क्योंकि उनका पंजीकरण नहीं होता कि वो मज़दूर हैं।

रसद प्रबन्धन और सूचना प्रणाली (एलएमआईएस) से प्राप्त आंकड़ों के अनुसार उत्तर प्रदेश में अभी तक अधिकतक 21 लाख 50 हज़ार मज़दूर ही पंजीकृत हो पाए हैं।

"उत्तर प्रदेश मज़दूरों की मंडी है, अगर उनकी गिनती की जाए तो संख्या करोड़ों में निकलेगी। लेकिन उनकी कोई गणना नहीं हैं, कोई सर्वे नहीं है कि हमारे प्रदेश में कितने मज़दूर हैं।" मज़दूरों के पंजीकरण के बारे में बात करते हुए निर्माणा संस्थान (जो मज़दूरों के हित के लिए काम करती है) के प्रमुख सदस्य प्रमोद पटेल बताते हैं, "मज़दूरों को सबसे ज़्यादा काम का प्रमाण-पत्र देने में मुश्किल आती है, जिसमें भवन कितने क्षेत्रफल में बना, उसमें कितने रुपए खर्च हुए, भवन मालिक और उसके पिता का नाम, ठेकेदार और उसके पिता का नाम जैसी कई जानकारी उस प्रमाण-पत्र में भरनी पड़ती है और ये सारी जानकारी उसने जितनी जगह काम किया हो हर जगह की होनी चाहिए। जो जानकारी वो इकट्ठी नहीं कर पाते, जिससे उन्हें योजनाओं का लाभ नहीं मिल पाता।" 

श्रम विभाग की तरफ से मज़दूरों के हित में करीब 20 योजनाएं (स्रोत-श्रम विभाग, उत्तर प्रदेश सरकार की वेबसाइट) चलाई जा रहीं हैं। जिसका लाभ लेने के लिए मज़दूरों को अपना पंजीकरण करवाना होता है। पंजीकरण करवाने के लिए पिछले वर्ष किए गए 90 दिनों के काम का प्रमाण-पत्र, आईडी, 50 रुपए अंशदान के और 50 पंजीयन के देने होते हैं। वो आगे बताते हैं, "इसका मतलब तो यही हुआ कि श्रम विभाग मज़दूरों के साथ पंजीकरण के नाम पर मज़ाक कर रहा है।"

मज़दूरों को पज़ीकरण के समय पिछले 12 महीने में 90 दिनों तक निर्माण मज़दूर के रूप में किए गए काम का पूरा विवरण देना होता है, जिसमें उन 90 दिनों में जहां-जहां काम किया उसकी पूरी जानकारी भरनी होती है।

ये भरनी होती है जानकारी

1- जहां पर काम किया निर्माण कितने क्षेत्रफल में हो रहा है,

2- कितने तल तक निर्माण होना है,

3- निर्माण की कुल लागत,

4- भवन स्वामी/ठेकेदार के हस्ताक्षर तिथि के साथ

5- भवन स्वामी व उसके पिता का नाम,

6- भवन स्वामी का मोबाइल नम्बर,

7- ठेकेदार का नाम व उसके पिता का नाम,

8- ठेकेदार का मोबाइल नम्बर,

9- भवन स्वामी व ठेकेदार का पूर्ण स्थाई पता? ये सारी जानकारी भरना अनिवार्य होता है।

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