पेड़ हमारे माता पिता की तरह ही तो हैं, जो दुनिया और मौसम की क्रूरता से हमें बचाते हैं

जैसे-जैसे हमारे शहर विकास की ओर बढ़ रहे हैं और गांव नगरों में तब्दील हो रहे हैं, मैं आशा करती हूं कि हमारे पेड़ों को छोड़ दिया जाए और उन्हें बचाया जाए। यदि यहां एक भी पेड़ है तो मैं छाया की शरण में हू। यहां तक की गलत मोड़ भी मुझे सही दिशा में ले जाएगा।

Neha SinhaNeha Sinha   27 May 2019 8:57 AM GMT

पेड़ हमारे माता पिता की तरह ही तो हैं, जो दुनिया और मौसम की क्रूरता से हमें बचाते हैं

लखनऊ। हरियाणा के एक गांव में रास्ता खोजते हुए जब मैं एक धूल भरे राजमार्ग पर थी तो वहां एक गांव वाले ने मेरा मार्गदर्शन एक पीपल के पेड़ के सहारे किया। शायद इस तरह के मार्गदर्शन आगे भी मुझे कही सुनने को मिल सकते हैं। दुनियाभर में रास्तों को इन्हीं चिन्हों के द्वारा बताया जाता है- जैसे पीपल का पेड़, वरगद के वृक्ष के करीब का चौराहा, गांव का मंदिर या मस्जिद आदि।

आपको बताया जाएगा कि उधर बरगद के पेड़ की तरफ जाइए या उस वाले पीपल के पेड़ से मुड़ जाइयेगा। ये विशाल वृक्ष जो वर्ष भर फलों से लदे हुए हैं, जिनकी पत्तियां बिन हवा के भी आपको मदमस्त झूमती हुई मिल जाएंगी। यह पेड़ सिर्फ पेड़ नही होते हैं बल्कि यह तो सम्पूर्ण स्थान होते हैं। बरगद या पीपल के पेड़ों के नीचे आपको एक पंचायत की चलती हुई कार्यवाही देखने को मिल जाएगी। इस पेड़ के ऊपर बंदर, मैना और तितलियों के शोर की चहकती ध्वनि मिलेगी। कभी दिखेंगें टूट के गिरते हुए फल और हवा के झोंके से गिरती हुई पत्तियां तो कभी ज़िन्दगी की हक़ीक़त को आपस में सुनते-सुनाते बैठे लोग।


ग्रीष्म ऋतु के आने से पहले, पीपल अपनी पत्तियां उतार देता है और नई नवेली चमकती पत्तियां जल्द ही उस पर फिर आ जाती हैं। पीपल ही एक अकेला ऐसा पेड़ नही है जो कि ग्रीष्म और वसंत ऋतु के आने की घोषणा इन नए रंगों को पहन कर करता है बल्कि सेमल और कोपल जैसे पेड़ सर्वप्रथम बसंत ऋतु के आगमन की रंगभरी घोषणा लाल, पीले, मूंगा जैसे खिले हुए मांसल फूलों से करते हैं। सेमल के खिले महकते हुए पेड़ के पास यूरोप से आये हुए आगंतुक पक्षी, एक लंबे प्रवास के बाद यहां रहते हैं, भोजन करते है और गाना गाते हैं।

सेमल के पेड़ के नीचे एक अलग ही दुनिया है- सब कुछ इस रंगीन पेड़ के फूलों से ढाका हुआ है। सेमल की परछाई से शहर की चमक और तेज बढ़ा हुआ लगता है। सेमल अपने फूलो को होली के त्योहार के समय खिला लेता है। लोग इन फूलो का इस्तेमाल रसायन रहित गहरे रंगों के उत्पादन में करते हैं। होली के तुरंत और सेमल की आखरी क्यारियों के खिलने के बाद, ग्रीष्म ऋतु का आगमन होता है।

सूरज आकाश की ऊचाइयों पे चढ़ जाता है। लगभग पूरा भारत इस ग्रीष्मता से बेहाल हो हाँफने लगता है। अब मैं हरियाणा वापस आ चुकी हूँ और खोज रही हूँ एक उल्लू और वो आखिरी प्रवासी पक्षी। अब मेरे आस पास सूखी हड्डियों की तरह, धूल से टूटे हुए बस मैदान खुले हैं। जंगली जानवरों की तरह मैं पेड़ की छाया के लिए बेक़रार हूँ।

गर्मियों में, पीपल के पेड़ की तरह, कोई भी भरतीय पेड़ एक सम्पूर्ण स्थान है मात्र एक पेड़ नही। आप इंतज़ार में रहते हैं जब तक आप वह पेड़ खोज न लें। फिर आप उसकी छाया में गोते लगाने लगते हैं। इस बेरहम सूरज के नीचे, एक पेड़ की छाया एक गहरी डुबकी सी प्रतीत होती है। एक समर्पण सी और एक विसर्जन सी। एक मुलायम आलिंगन सी और एक प्रेमी के चुम्बन सी। ये पत्तियां रौंद देती हैं सूरज की रौद्रता को और सूरज आ गिरता है आपकी बाहों मे, लेकिन टूटे हुए टुकड़ों में। पीले-हरे प्रकाश में जो कि अब कठोर और चकाचौंध नही है। जब हवा चलती है तब पत्तियां मंत्रमुग्ध कर देने वाली परछाई ज़मीन पर बनाती है। वृक्ष माँ के समान है, यह आपको मौसम और दुनिया की कठोरता से बचाते हैं।


ग्रीष्म ऋतु किसी से मित्रता नही रखती, लेकिन ये वो वक्त है जो पेड़ों के द्वारा हर रंग और हर स्वाद हमे देती हैं। आम में मयूर फूट जाता है। चारों ओर उसकी चमक सुगंधित हो महक उठती है। बकायन के पेड़ के समक्ष टैल्कम पाउडर जैसी खुशबू महकती है, अपने नाजुक और सफेद चमेली के फूलों के साथ। उधर नीम के वृक्ष की नई पत्तियां सबको अचंभित करती हुई हरे रंग की बजाए गुलाबी रंग लाती हैं। इधर शिरीष का वृक्ष अब सुसज्जित है- नए नवीन पत्तों और सफेद अजनमीत फलों के साथ।

महुआ के पेड़ पर, वह फल जो स्वाद में मीठे कस्तूरी मक्खन से होते हैं, पक्षी, भालू और आदमियों द्वारा मांग कर खा लिए जाते हैं। पीले फूलों वाला अमलतास का वृक्ष अपना स्वर्णिम खजाना दुनिया के लिए अपने लंबे तार वाले चमकदार पिघले स्वर्ण पुष्पों से खोल देता है। चमरोड के पेड़ पर सितारों से खिले हुए फूलों के गुच्छे छिड़के हुए हैं। कितना सौभाग्यशाली है अपना देश, जो ऋतुओ का आना जाना फूलों के सौंदर्य से दर्शाता है।

फिर पक्षी और जानवर दोनो निकल आते हैं बाहर खेलने के लिए इस तरह जिस तरह पहले कभी न खेले हों। उड़ाई जाती हैं दावत इन फूलों और फलों के संग। मैने ध्यान दिया कि ये पीले पैरों वाला हरा कबूतर बिल्कुल उसी रंग का है जैसे सेमल के वृक्ष का वो मखमली हरा पौधा। एक प्रतिभाशाली हरी भूरे सिर वाली बार्बेट (एक चिड़िया) मिल जाती है, एक नए पन्ने के रंग सी हरी पीपल की पत्तियों में। रंग-बिरंगे पंछी अपने घोंसले एक सीध में बसंत और ग्रीष्म ऋतु के साथ बनाते चले जा रहे हैं एकदम नारंगी-गुलाबी

बोगनवेलिया के फूल जैसे, जिनके निर्माण का कारण इस असहनीय भारतीय धूप को सहनीय बनाना है।


भारत के एक दूसरे भाग के, मध्यप्रदेश गोंड गांव में, जहाँ पेंच बाघ संरक्षण केन्द्र है, वहाँ का एक गांववासी मुझे अपनी पसंदीदा जगह दिखाना चाहता है। वह जगह एक विशालकाय बरगद का वृक्ष है, जो उगा हुआ है चट्टानों के बीच एक ढलान पर। ऐसा प्रतीत होता है जैसे वह एक इमारत हो, एक घर हो स्तंभो के साथ, जो निर्मित किया गया है पत्तियों के तनो की उंगलियो से, और बरगद की मजबूती के बल पर। यह बिल्कुल ऐसा है जैसे एक मकान जो बना हुआ है एक कठोर पत्थर पर। अगर आप एक बरगद या पीपल को उगाने की सोचेंगे तो ये काफी मुश्किलों भरा हो सकता है। मुलायम मिट्टी के बजाए ये पेड़ कठोर पथरीली मिट्टी में उगना पसंद करते है। यह उग जाते हैं सब कठिनायों के बावजूद- अड़चने हटाते हुए, चट्टानें तोड़ते हुए, दीवारें चीरते हुए, पत्थरो के नया निर्माण करते हुए, अपने जड़ों और फलों को आगे बढ़ाते हुए ये करते हैं निर्माण एक नए संसार का।

"फल खाओ" मेरी दोस्त ने मुझसे कहा।

"लेकिन नियम है" उसने जोड़ते हुए कहा, "बिना देखे खाओ"।

उसकी मुस्कान मंत्रमुग्ध करने वाली थी- उस अंजीर से कही ज्यादा बेहतर। उसने मुझे न देखने के लिए इसलिए कहा क्योंकि अंजीर में भरी हुईं थीं ततैया उनका परागण करने के लिए। यह एक पुरानी मान्यता है कि फलों में कीड़े होते हैं; जो एक दम हानिरहित होते हैं और काटते भी नही है। कई गांववाले ये फल बंदरों के लिए छोड़ देते हैं। वो लोग यहाँ उस स्थान की वजह से आते हैं। वो स्थान है वह वृक्ष, जिसकी छाया में सुकुन होता है।

लेकिन जगहें बदल रही हैं, घट रही हैं क्योंकि योजनाओं का निर्माण अंधों द्वारा पट्टी पहन के किया जा रहा है। पूरे देश मे हाईवे का निर्माण हो रहा है, डैम बनाये जा रहे है और वृक्षों को हैवानियत से काट दिया जा रहा है। मैं सोच में पड़ जाती हूं कि क्या अब के बच्चे जान पाएंगें कि बरगद के अंजीर में कीड़े होते हैं! सेमल का फूल रेशमी कपास में परिवर्तित हो जाता है! या सिरिस के अजनमीत फल से जाती हुई हवा, एक संगीत यंत्र का कार्य करती है।


मुझे जरा भी बुरा नही लगेगा गुम हो जाने में ,जब तक यहाँ उस सीधे मोड़ के अंत में वह पेड़ लहलहाता हुआ खड़ा है। जैसे-जैसे हमारे शहर विकास की ओर बढ़ रहें हैं और हमारे गांव नगरों में बदल रहें हैं, मैं आशा करना चाहती हूँ की हमारे भारतीय पेड़ छोड़ दिए जाएं या बचा लिए जाएं क्योंकि यदि वहाँ एक भी पेड़ है तो मैं छाया की शरण में हूं। यहां तक की गलत मोड़ भी मुझे सही दिशा में ले जाएगा।


(अनुवादक- तनु शर्मा)

यह लेख मूलतः अंग्रेजी में लिखी गई है, जिसे आप यहां पढ़ सकते हैं-


Trees are like parents – they protect you from the harshness of the weather and the world


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