मौतों की पहेली : गोरखपुर त्रासदी से जुड़े 17 अनसुलझे सवाल 

Neelesh MisraNeelesh Misra   17 Aug 2017 2:52 PM GMT

मौतों की पहेली : गोरखपुर त्रासदी  से जुड़े  17 अनसुलझे सवाल गोरखपुर त्रासदी का शिकार बच्चा। 

लखनऊ । गोरखपुर मेडिकल कॉलेज में तथाकथित तौर पर ऑक्सीजन की कमी से हुई मौतें एक राष्ट्रीय मुद्दा बन चुकी हैं। सरकार ने इसका खंडन किया कि मौतों का ऑक्सीजन की कमी से कोई सम्बंध है, लेकिन एक जाँच समिति इस मामले को देख रही है। गोरखपुर मामले में गाँव कनेक्शन ने कई ख़ुलासे किए हैं और सवाल उठाए हैं। गाँव कनेक्शन के फ़ाउंडर नीलेश मिसरा ने ट्विटर पर एक थ्रेड के ज़रिए कई महत्वपूर्ण सवाल उठाए हैं:

1. केजीएमसी और एसजीपीजीआई के मुताबिक, आइनॉक्स और लिंडे गैस उत्तर प्रदेश के अस्पतालों में लिक्विड ऑक्सीजन की सप्लाई करने वाली प्रतिष्ठित कंपनियां हैं।

लेकिन गोरखपुर के अस्पताल ने पुष्पा सेल्स से ऑक्सीजन ख़रीदी जो पुष्पा सेल्स ने आइनॉक्स से ख़रीदी थी। उसने ये ऑक्सीजन सीधे आइनॉक्स से क्यों नहीं ली?

इसके बारे में मैंने जानकारोंं से पूछा। आइनॉक्स और लिंडे कभी अधिकारियों को रिश्वत नहीं देतीं। क्या इसीलिए एक कंपनी को वर्षों तक मध्यस्थ बनाया गया?

जब उत्तर प्रदेश के बड़े अस्पताल केजीएमसी और एसजीपीजीआई सीधा मैन्युफैक्चरर से ऑक्सीजन ख़रीदते हैं तो गोरखपुर का अस्पताल क्यों नहीं?

2. गोरखपुर का अस्पताल सालों तक एक ही ऑक्सीजन वेंडर पुष्पा सेल्स से ऑक्सीजन क्यों लेता रहा?

3. क्या उत्तर प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री, प्रमुख सचिव, मेडिकल एजुकेशन के डीजी को पेमेंट करने का लेटर नहीं मिला था या उन्होंने इसे इग्नोर कर दिया?

4. उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री कार्यालय को किसने इस मुद्दे पर गुमराह किया कि उन्होंने इतनी जल्दी ट्वीट कर दिया कि वहां हुई मौतों का कारण ऑक्सीजन की कमी नहीं है?

क्यूँकि जब सरकार ने यह कह दिया कि मौतों का ऑक्सीजन से कोई संबंध नहीं है तो भी इस जांच की ज़रूरत ही क्या थी?

5. अस्पताल के हेड मिश्रा ने कहा कि अस्पताल में पर्याप्त सिलेंडर के लिए कदम उठाए गए हैं। फिर डॉ. कफील, जिन्होंने कहा कि वे तीन सिलेंडर ख़ुद लाए, उन्हें ये करने की ज़रूरत क्यूँ पड़ी? दोनों में से कौन झूठ बोल रहा है?

जब 23 बच्चों की मौत हो चुकी थी तो डॉ. कफील ने इस संकट की स्थिति में सिलेंडर लाने के लिए खुद वार्ड क्यों छोड़ दिया? वो किसी और को भी भेज सकते थे।

6. मेडिकल एजुकेशन के डीजी ने गाँव कनेक्शन को बताया कि 5 अगस्त को पेमेंट ट्रांसफर कर दिया गया था। प्रिंसिपल ने फर्म को ऑक्सीजन के लिए तुरंत पैसे क्यों नहीं दिए?

7. अगर उत्तर प्रदेश सरकार ने जांच के आदेश दे दिए थे तो प्रिंसिपल मिश्रा और एचओडी डॉ. कफील को बिना जांच के क्यों सस्पेंड कर दिया गया?

8. प्रिंसिपल मिश्रा अन्य मदों के उपलब्ध 1.25 करोड़ रुपयों से भुगतान कर ऑक्सीजन की कमी से निपट सकते थे। उन्होंने इस रकम को ब्लॉक क्यों कर दिया?

9. स्वास्थ्य मंत्री और चिकित्सा शिक्षा मंत्री पर कार्यवाही क्यों नहीं की गई? वे यह क्यों फ़ैसला कर रहे हैं कि दोषी कौन है?

10. यह कैसे पता लगाया गया कि बच्चों की मौत ऑक्सीजन की कमी के कारण हुई? क्या उनकी उंगलियों के पोर और होठ नीले थे?

11. अस्पताल प्रबंधन ने मृत बच्चों के माता पिता को बच्चों का शव लेकर रात में ही अस्पताल से जाने के लिए क्यों कहा? वे क्या छुपा रहे थे ?

12. क्या मुख्य सचिव राजीव कुमार उस रात वास्तव में उस रात क्या हुआ था इसकी जांच के लिए मृत बच्चों के गाँव तक जाएँगे?

13. क्या शवों को कब्र से बाहर निकाला जाएगा? किस आधार पर जांच होगी? (हिंदू मान्यताओं के अनुसार शिशुओं के शव का दाह संस्कार नहीं किया जाता)।

14. प्रिंसिपल मिश्रा और डॉ. कफील ने ऑक्सीजन की कमी का मुद्दा तब क्यों नहीं उठाया था जब मुख्यमंत्री ने 9 अगस्त को अस्पताल का दौरा किया था?

15. गोरखपुर के डीएम ने ऑक्सीजन की कमी के मामले में मीडिया ख़बरों पर अपना मत क्यों नहीं रखा ?

16- पूरे मामले में उत्तर प्रदेश एनएचआरएम (राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन) के प्रमुख की जवाबदेही क्यों नहीं तय की गई ?

17. क्या ये एक संयोग मात्र है कि जिस रात ऑक्सीजन की कमी हुई उसी रात बच्चों की मौतें बढ़ गईं ?

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