सोशल मीडिया में शेयर हो रही है बाबर की वसीयत, गाय काटने को लेकर सुनाया था ये फरमान

Anusha MishraAnusha Mishra   23 Oct 2017 11:59 AM GMT

सोशल मीडिया में शेयर हो रही है बाबर की वसीयत, गाय काटने को लेकर सुनाया था ये फरमानबाबर की कथित वसीयत

लखनऊ। पिछले कुछ समय से देश में गोरक्षा का मुद्दा सबसे ज़्यादा चर्चा में रहा है। हाल ही में मेघायल राज्य के भाजपा के अध्यक्ष शिबुन लिंगदोह ने कहा कि केंद्र ने मेघालय में गोमांस पर प्रतिबंध नहीं लगाया है। उन्होंने कहा कि गोमांस पर प्रतिबंध लगाना न तो अच्छी आर्थिक पहल है न ही संविधान सम्मत है। गोहत्या के शक में कुछ लोगों की भीड़ द्वारा हत्या भी की गई। सोशल मीडिया पर भी ये मुद्दा छाया रहता है। इस बीच सोशल मीडिया पर बाबर की वसीयत का एक फोटो भी शेयर हो रहा है जिसमें उसने दूसरे धर्म और गोकशी को लेकर अपने बेटे हुमायूं को कुछ आदेश दिए हैं। हम आपको बताते हैं कि क्या लिखा है इस वसीयत में -

इस वसीयत में बाबर के हवाले से लिखा गया है - सब प्रशंसा अल्लाह के लिए है। ज़हीरुद्दीन मुहम्मद बाबर की वसीयत उसके बेटे नसीरुद्दीन हुमायूं के नाम। अल्लाह उसे दीर्घ आयु दे। ऐ मेरे बेटे, भारत में बहुत से धर्म हैं और भारत की सल्तनत अल्लाह ने तुम्हें सौंपी है। तुम्हारे लिए ज़रूरी है कि धार्मिक कट्टरता को धरती से समाप्त कर दो और सभी धर्मों को उनके नियमानुसार न्याय दो। ख़ास तौर पर गाय की कुर्बानी से बचो ताकि तुम हिन्दुस्तान के लोगों का हृदय जीत सको। मंदिर एवं अन्य पूजा स्थलों का अनादर न किया जाए। न्याय ऐसा करो कि राजा प्रजा से खुश रहे और प्रजा राजा से। इस्लाम की प्रगति जुल्म की तलवार की अपेक्षा कृपा के अस्त्र से अधिक होती है।

इस वसीयत के नीचे लिखा है कि बाबर की वसीयत को धौलपुर कैंप में 11 जनवरी 1526 को लिखा गया था। वसीयत का वो हिस्सा जो सोशल मीडिया में शेयर हो रहा है। ख़बरों के मुताबिक, बाबर 10 मई, 1526 ई. को आगरा आया था। उसने धौलपुर में कैंप के दौरान 11 जनवरी, 1529 ई. (एक जमादी अल अव्वाल 935 हिजरी) को बाग-ए-निलोफर (लोटस गार्डन) में अपने बेटे हुमायूं के लिए वसीयत लिखी थी। जानकारी के मुताबिक, बाबर की मूल वसीयत मौलाना आजाद सेंट्रल लाइब्रेरी, पुराना अजायबघर, भोपाल में भी उपलब्ध नहीं है। वहां केवल उसकी नकल मौजूद है, जबकि असली वसीयत खो चुकी है।

वसीयत के इस हिस्से को डॉ. ज़हीर हसन की उद्भावना पुस्तिका से लिया गया है जो उन्होंने अंग्रेज़ी में लिखी थी, जिसे हिंदी में अनुवादित किया गया।

नोट - सोशल मीडिया पर शेयर हो रही ये वसीयत कितनी सही व कितनी गलत गाँव कनेक्शन इस बात के लिए ज़िम्मेदार नहीं है। सोशल मीडिया चौपाल में हम वो ख़बरें देते हैं जो सोशल मीडिया पर चर्चा हो रही होती है।

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