लाखों रुपए से बना मिनी सचिवालय बना खंडहर

Karan Pal SinghKaran Pal Singh   3 Oct 2016 7:47 PM GMT

लाखों रुपए से बना मिनी सचिवालय बना खंडहरखंडहर बन चुका यह भवन ही ग्राम सचिवालय है।

अजय कश्यप (कम्युनिटी जर्नलिस्ट)

उम्र - 28

रामसनेही घाट (बाराबंकी)। पंचायतीराज व्यवस्था के तहत गाँवों में ही कार्यालय स्थापित करके लोगों को सुविधा दिलाने के लिए मिनी सचिवालयों का निर्माण किया गया था। यहीं पर सेक्रेटरी आदि अधिकारियों के मिल जाने से ग्रामीणों को भागदौड़ से मुक्ति मिल सकती थी।


नल के नट-बोल्ट तक खोल गए चोर।

सूखा पड़ा है हैंडपम्प

इसके तहत तहसील क्षेत्र के अनेक विकास खंडों में लाखों रुपए के बजट से मिनी सचिवालयों का निर्माण कार्य तो करवाया गया परंतु देखरेख और प्रयोग नहीं होने से इसके भवन बुरी तरह से जर्जर होकर खराब हो रहे हैं। इससे सरकार के पंचायतीराज व्यवस्था को मजबूत करने की सोच का मखौल उड़ रहा है। बाराबंकी के रामसनेही घाट ब्लॉक के भानपुर गाँव के मिनी सचिवलय कि बात करें तो सचिवालय कम खण्डहर ज्यादा लता है। लाखों की लागत से बना यह सचिवालय अपनी किस्मत पर रो रहा है। करीब छह साल पहले बना सचिवालय आज खंडहर बन चुका है। सचिवालय भवन में तो न तो खिड़की बची है और न दरवाजे बचे हैं। यहां पर शौचालय, सोलर लाइट और हैंडपम्प से लेकर कुछ भी नहीं बचा, क्योंकि इसकी देखरेख करने वाला कोई नहीं है।

इमारत खुद बयां कर रही है अपना हाल।

निर्माण के बाद नहीं की कोई व्यवस्था

ये तीन गाँव सवाई, पुरेगिरधर और कनवा का ताल के पूर्व प्रधान राजू त्रिवेदी और उसके बाद वर्तमान के प्रधान उमेश कुमार ने भी सचिवालय की देखरेख करना जरूरी नहीं समझा। गाँव के ही रामचरन (45 वर्ष) बताते हैँ, "आज तक यहां पर कोई बैठक नहीं हुई और न ही यहां कोई आता है। इसलिए यहां का सारा सामान चोर चुरा ले गए हैं। अगर सरकार इतनी सुविधा देने के बाद इसे कोई देखभाल करने वाला न हो तो क्या मतलब होता है बनवाने का। गैर जिम्मेदार लोग जनता का लाखों रुपये इसी तरह बर्बाद कर रहे हैँ।" इसी गाँव की रहने वाली आशा देवी (38 वर्ष) बताती हैं, "जब से सचिवालय बना तब से कोई भी इस भवन की देखरेख के लिए कोई व्यवस्था नहीं की गई। जिस वजह से इस भवन में दरवाजा, खिड़की और सीसे तक चोर चुरा ले गए हैँ। सचिवालय भवन में दरवाजा नहीं होने के कारण अराजक तत्वों का जमावड़ा रहता है।"

"This article has been made possible because of financial support from Independent and Public-Spirited Media Foundation (www.ipsmf.org)."

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