शुगर से बचना है तो संयमित रखें खानपान, करें योग

शुगर से बचना है तो संयमित रखें खानपान, करें योगगोंडा के कचनापुर गाँव में आयोजित किया गया योग एवं मधुमेह जागरूकता कार्यक्रम

ओम प्रकाश अवस्थी- किसान (कम्यूनिटी जर्नलिस्ट)

गोंडा। कचनापुर गाँव के रामशरन (52 वर्ष) को मधुमेह की बीमारी है। पिछले तीन वर्षों से मधुमेह की दवा खा रहे रामशरन को उनके गाँव में ही हुए योग एवं मधुमेह जागरूकता कार्यक्रम-2016 में जाने का मौका मिला। कार्यक्रम के बाद अब वो नियमित तौर पर मधुमेह से राहत दिलाने वाले कुछ योगासन कर रहे हैं और निर्देशानुसार गौमूत्र का सेवन कर रहे हैं। पिछले कुछ दिनों से उन्हें राहत है।

योग एवं प्राकृतिक चिकित्सा परिषद (आयुष मंत्रालय, भारत सरकार) व खादी प्रगति एवं ग्राम उत्थान संस्थान की मदद ग्रामीणों को योग के प्रति जागरूक करने के लिए योग एवं मधुमेह जागरूकता कार्यक्रम-2016 के अन्तर्गत करनैलगंज नगर सहित चार गाँवों (कचनापुर, भंभुआ, प्रहलादगंज एवं गौरासिंहापुर) में आयोजित किया गया।

अगर कोई भी व्यक्ति रोज़ाना योगा करे तो उसे जीवन में कभी भी मधुमेह की परेशानी नहीं हो सकती है। कोई भी व्यक्ति जो शुगर से पीड़ित है वह सूक्ष्म व्यायाम, सूर्य नमस्कार, पवनमुक्तासन, भुजंगासन, मंडूकासन, अर्धऊष्ट्रआसन की मदद से इसे खत्म कर सकता है।
प्रशिक्षक- अफसर अली

प्राथमिक विद्यालय कचनापुर में आयोजित इस कार्यक्रम में लोगों को जागरूक करने आए योग प्रशिक्षक अफसर अली

अंतरराष्ट्रीय डॉयबटीज फेडरेशन के मुताबिक भारत में वर्तमान समय में करीब चार करोड़ डॉयबटीज के मरीज है, जिनकी संख्या में साल 2025 में बढ़ कर सात करोड़ तक हो जाने का अनुमान है।

पिछले कई वर्षों से गाँवों में लोगों को मधुमेह के प्रति जागरूक कर रहे मुख्य चिकित्सक (आयुष मंत्रालय) डॉ. संजय दीक्षित बताते हैं कि मधुमेह से बचाव के लिए सबसे ज़्यादा ज़रूरी है खान-पान व संयमित जीवन शैली अपनाना। अगर हम तले हुए खाद्य व मिठाइयों के अधिक सेवन से बचे तो काफी हद तक मधुमेह कम किया जा सकता है।

गाँवों के अलावा नगर के इंटर कालेज (झंझुआ), गयादीन सिंह इण्टर कॉलेज (प्रहलाद गंज) व आनंद ज्ञान पब्लिक स्कूल (गौरा सिंहापुर) में भी कार्यक्रम का आयोजन किया गया, जहां पर छात्रों ने कई योगमुद्राओं को जाना।

गाँवों में चलाए गए योग एवं मधुमेह जागरूकता कार्यक्रम को लोगों के लिए उपयोगी बताते हुए प्रधान प्रतिनिधि, कचनापुर राकेश मोहन तिवारी बताते हैं, ''गाँव में समय-समय पर ऐसे आयोजनों का होना बहुत ज़रूरी है क्योंकि इनकी मदद से न केवल लोगों को कई बीमारियों के बारे में पता चलता है बल्कि ऐसे कार्यक्रमों की मदद से हमे अपनी जीवनशैली सुधारने में भी मदद मिलती है।''

This article has been made possible because of financial support from Independent and Public-Spirited Media Foundation (www.ipsmf.org).

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