शौचालय निर्माण में गड़बड़झाला नहीं कर पाएंगे प्रधान और सचिव, ब्लॉक स्तर पर समितियां करेंगी निगरानी 

शौचालय निर्माण में गड़बड़झाला नहीं कर पाएंगे प्रधान और सचिव, ब्लॉक स्तर पर समितियां करेंगी निगरानी रायबरेली को खुले में शौच से मुक्त बनाने में जुटा है प्रशासन।

किशन कुमार, कम्यूनिटी जर्नलिस्ट, स्वयं डेस्क

रायबरेली। स्वच्छ भारत अभियान के तहत जिले में शौचालय का निर्माण तो तेजी से हो रहा है लेकिन उसके बाद भी लोगों के हाथ से लोटा नहीं छूट पाया है। हकीकत पर गौर किया जाए, तो लोगों का खुले में शौच जाना दिनचर्या में शामिल है। शायद यही कारण है कि जिले के डीएम अनुज कुमार झा को मीटिंग में कहना पड़ा कि ''ग्रामीण खुरपी लेकर शौच जाया करें।’'

जिले में नए वित्तीय वर्ष में शौच से मुक्ति के लिए 11 हज़ार 578 शौचालय का लक्ष्य रखा गया है, जिसमें से लालगंज की 56 ग्राम सभाओं में 1700 शौचालय बने हैं, लेकिन कोई भी गाँव पूरी तरह खुले में शौच से मुक्त नहीं हो पाए हैं। लेकिन बहुत से गांवों में लक्ष्य पूरा होने वाला है।

जिले में शौचालयों की कमी पर जिलाधिकारी अनूप कुमार झा बताते हैं, ''जब तक लोग जागरूक नहीं होगें, तब तक अभियान पूरा नहीं होगा। हमारा उद्देश्य शौचालय बनवाना नहीं है, बल्कि लोग उनका प्रयोग भी करें इसके लिए गम्भीर प्रयास किये जा रहे हैं। ब्लॉकों में निगरानी समितियां बनाई जा रही हैं, जो रोज सुबह गाँव-गाँव जाकर लोगों को खुले में शौच जाने से रोकने के लिये प्रेरित करेंगी।''

रायबरेली के एक गांव में शौचालय दिखाता कर्मचारी।

डीपीआरओ ऑफिस से मिली जानकारी के अनुसार जिले में हरचन्दपुर ब्लॉक की 56 ग्रामसभाओं में 3,400 शौचालय का निर्माण हुआ है। सलोन में 86 ग्राम सभा हैं,जिसमें 2177 शौचालय बनाए जा चुके हैं। चयनित लोहिया गाँवों में 214 शौचालय बनाए गए हैं। गंगा कटरी के गाँव गेगासो में 412 में 400 शौचालय बने हुए हैं।

शौचालयों के निर्माण पर रायबरेली जिले के पंचायत राज अधिकारी संजय यादव कहते हैं कि जिले में दिसम्बर तक 56 ग्राम पंचायतों को खुले में शौच से मुक्त कर दिया जाएगा, जो लक्ष्य मिला है उसके अनुरूप तेज़ी से काम हो रहा है।

इसी तरह हर ब्लॉक में शौचालय बनाने का कार्य तो प्रगति पर है, पर ज़मीनी हकीकत तो कुछ और ही है। दरअसल जागरूकता की कमी और अपनी आदत के कारण लोग खुले में शौच जा रहे हैं। प्रशासन द्वारा की जा रही सारी कवायद तब बेमानी नज़र आती है जब किसी शौचालय में बालू, मौरंग तो किसी में कूड़ा देखने को मिलता है, कहीं-कहीं तो खंडहर देखकर लगता ही नहीं की यह शौचालय है।

This article has been made possible because of financial support from Independent and Public-Spirited Media Foundation (www.ipsmf.org).

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