दो एकड़ में उपजी फसल को 45 मिनट में काटती है कम्बाइन मशीन

दो एकड़ में उपजी फसल को 45 मिनट में काटती है कम्बाइन मशीनयह कम्बाइंड मशीन खेतों में ही धान मड़ाई का कार्य करती हैं।

संदीप कुमार (कम्यूनिटी जर्नलिस्ट)

रायबरेली। पहले धान कटाई सीज़न शुरू होते ही पंजाब और हरियाणा से मशीनें लेकर वहां के कारीगर आ जाते थे पर वक्त बदलने के साथ-साथ गाँवों की कृषि व्यवस्था में भी बढ़ा बदलाव आया है। ऐसा ही एक बदलाव है कम्बाइन मशीन। धान की कटाई का मौसम आते ही ग्रामीण इलाकों में हारवेस्टर मशीन दिखने लगती हैं, जिन्हें स्थानीय भाषा में कम्बाइंन मशीन भी कहा जाता है। यह कम्बाइंड मशीन खेतों में ही धान मड़ाई का कार्य करती हैं।

रायबरेली के बछरावां क्षेत्र मे रहने वाले ओम दत्त (58 वर्ष) के पास ऐसी ही कम्बाइंन मशीन है। ओम बताते हैं, ''हमने यह मशीन दो वर्ष पहले पटियाला से मंगवाई थी। इसमें 17 लाख का खर्च आया था, तब हम यह मशीन चलवा रहे हैं और इसकी मांग भी यहां बहुत है। इसकी मदद से हम सलाना दस से बारह लाख रुपए कमा लेते हैं।''

कम्बाइंड मशीन की मदद से दो एकड़ धान की फसल को बड़ी आसानी से 40 से 45 मिनट के अंदर काट लिया जाता है, जो किसी भी कटाई मशीन की तुलना में बहुत किफायती है। छोटकवा खेड़ा के किसान सुशील यादव (36) कहते हैं कि पहले फसल कटाई के लिए हम पंजाबी लोगों के आने का इंतजार करते थे। लेकिन अब अपने इलाके में खुद मशीने हो गई हैं, जिससे अब जब जरूरत होती है, तो कम्बाइंन मशीन वालों को बुला लेते हैं और आसानी से काम हो जाता है।

लगातार विकसित होते जा रहे खेती के तौर तरीकों से ना केवल अब कृषि में सुधार हुआ है बल्कि अब आधुनिक कृषि यंत्रों की मदद से किसानों का समय और पैसा दोनों बच रहा है। ''इस क्षेत्र में छोटी जोत के किसान अधिक हैं, इसलिए काम उतना अच्छा नहीं हो पाता, जितना पश्चिमी उत्तर प्रदेश में होता है। मशीन के रख-रखाव में भी बहुत खर्च आता है। छोटे खेतों में मशीन नहीं चल पाती है, इसलिए काम नियमित नहीं हो पता है, लेकिन फिर भी कम्बाइंन मशीन की मदद से एक सीज़न में तीन से चार लाख का फायदा आसानी से निकल आता है।'' ओम दत्त आगे बताते हैं।

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