“अब्बू बैंक में पैसा निकालने गये थे, मगर जिंदा नहीं लौटे”

“अब्बू बैंक में पैसा निकालने गये थे, मगर जिंदा नहीं लौटे”लखीमपुर खीरी के सिरैया कलां गाँव में मेहंदी हसन की मौत के बाद घर के बाहर खड़े उदास परिजन।

रिपोर्ट: बसंत कुमार

लखीमपुर खीरी। "घर में खाने तक के पैसे नहीं थे और मेरे अब्बू पैसे के लिए बहुत परेशान थे। बैंक में भी बहुत ज्यादा भीड़ थी। इस वजह से मेरे अब्बू रात में ही बैंक से पैसा निकालने के लिए लाइन में लगने चले जाते थे, लेकिन फिर भी पैसा नहीं मिलता था। 27 दिसंबर की रात भी वह पैसा निकालने के लिए सिरैया कलां स्थित इलाहाबाद यूपी ग्रामीण बैंक चले गए थे। सुबह बैंक खुलने के बाद वो अभी पैसे निकाल भी नहीं पाए थे, तभी वो गिर गए और उनकी मौत हो गई। मैं उनको संभाल रहा था, उस दौरान बैंक प्रबंधक ने मेरे मृत अब्बू से अंगूठा लगाकर मुझे पैसा पकड़ा दिया।" बैंक की कतार में लगे-लगे अपने अब्बू को खो देने वाले यह शख्स हैं जिले के सिरैया कलां गाँव के नफीस अहमद।

छह दिन तक बैंक से नहीं मिला पैसा

मेहंदी हसन का इलाहाबाद यूपी ग्रामीण बैंक में था खाता।

सिरैया कलां गाँव के रहने वाले 55 वर्षीय मेहंदी हसन की बुधवार सुबह सिरैया कलां चौराहा स्थित इलाहाबाद यूपी ग्रामीण बैंक में मौत हो गयी थी। मेहंदी हसन सब्जी बेचने का काम करते थे। मेहंदी हसन के पड़ोसी बताते हैं कि स्थानीय इलाहाबाद यूपी ग्रामीण बैंक में पैसे की काफ़ी किल्लत है। 22 दिसम्बर के बाद 28 दिसम्बर को लोगों को पैसा मिला। यहां के बैंक के पास बना एटीएम 9 नवम्बर से ही बंद है।

मेरी बहन बीमार थी

मेहंदी हसन की बेटी सलमा खातून बताती हैं कि अब्बू पैसे के लिए बहुत परेशान थे। घर में खाने के लिए एक रुपए नहीं थे। मेरी बहन बीमार थी। रविवार छोड़ रोजाना उम्मीद के साथ रात में ही बैंक पहुंच जाते थे। यहां लोग बैंक के बाहर रात में अलाव जलाकर सुबह का इंतजार करते हैं। बुधवार को पैसा लेने से पहले ही उनकी मौत हो गयी। अब्बू पैसे निकालने के लिए गए थे, मगर वापस जिंदा नहीं लौटे।

अमीरों को आराम से पैसा मिल जाता है

गाँव में मेहँदी हसन के पड़ोस में रहने वाली महिला शबनम बताती हैं कि 50 दिन के नोटबंदी में मैं सिर्फ दो बार ही दो-दो हज़ार रुपए निकाल पाई हूँ। इस बैंक में पैसे ही नहीं रहते हैं। एक-एक सप्ताह बाद पैसा लोगों को मिलता है। गरीब लोग लाइन में लगे रहते हैं और अमीरों को आराम से पैसा मिल जाता है। बाकी जगहों पर महिलाओं को पहले पैसा निकालने का मौका दिया जाता है, लेकिन यहां तो सबसे ज़्यादा दिक्कत महिलाओं को होती है।

बैंक प्रबंधक बोले, आरोप निराधार

वहीं, इलाहाबाद यूपी ग्रामीण बैंक के प्रबंधक संजय श्रीवास्तव मेहंदी हसन के बेटे के आरोप को निराधार बताते हुए कहते हैं कि मेहंदी हसन की मौत बैंक में नहीं हुई। जब वो कतार में लगे थे, तभी बीमार लग रहे थे। उनकी जगह पर उनके बेटे ने पैसा लिया। पैसे लेकर जाने के थोड़ी देर बाद वो लोग लाश लेकर बैंक चले आए और हंगामा करने लगे। बैंक प्रबंधक बैंक में पैसे की कमी होने की बात स्वीकारते हुए बताते हैं कि पैसे कम आ रहा है। जितने पैसे आते हैं, वे हम अपने खाताधारकों में बाँट देते हैं। यहां 22 दिसम्बर के बाद 28 दिसंबर को पैसा आया तो हमने अपने खाताधारकों को देने के लिए बुलाया था।

50 दिन बाद भी बैंक में पैसा नहीं

स्थानीय विधायक शमशेर बहादुर सिंह इस मामले पर बोलते हुए कहते हैं कि सरकार के जल्दबाजी में लिए गए फैसले से लोगों की जान जा रही है। यहां नोटबंदी के 50 दिन पूरे होने के बाद भी बैंकों में पैसे नहीं आये। ऐसे में लोग काफ़ी परेशान हैं। वहीं, ईसानगर थाने के थाना प्रभारी शिवानन्द यादव बताते हैं कि मौत का कारण अभी स्पष्ट नहीं हो पाया है। पोस्टमार्टम के बाद ही स्पष्ट हो पाएगा।

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