आंखों देखी: ग्रामीण इलाकों के अस्पतालों में डॉक्टरों की लेटलतीफी बड़ी बीमारी 

आंखों देखी: ग्रामीण इलाकों के अस्पतालों में डॉक्टरों की लेटलतीफी बड़ी बीमारी गाँव कनेक्शन की टीम ने सर्वे में जानी स्वास्थ्य केन्द्रों की हकीकत।

उत्तर प्रदेश की बीमार स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर जिस दिन योगी कैबिनेट एक बड़ा फैसला ले रही थी उसी दिन यानि मंगलवार को सुबह गाँव कनेक्शन ने उत्तर प्रदेश के कई ज़िलों में सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों (सीएचसी) और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों (पीएचसी) के हालात का रियलिटी चेक किया। इस रियलिटी चेक में चौंकाने वाला सच सामने आया।

प्रदेश के ज़्यादातर स्वास्थ्य केंद्रों की स्थिति ख़राब है। कहीं डॉक्टर समय पर नहीं आ रहे तो कहीं बिजली की सुविधा नहीं है। हालांकि इस दौरान कुछ जगहों पर सब कुछ ठीक-ठाक मिला। डॉक्टर समय से अस्पताल पहुंचे मिले। मरीजों को सही दवाएं मिल रही थीं। डॉक्टर के साथ-साथ संबंधित स्वास्थ्य केंद्र के प्रभारी भी अपनी कुर्सी से नदारद मिले। मरीज इलाज के लिए परेशान दिखे। आप भी जानिए प्रदेश के कुछ सीएचसी और पीएचसी का आंखों देखा हाल…

मेरठ- सुबह 8 बजे

मेरठ: समय पर नहीं आते हैं डॉक्टर

मोहित कुमार सैनी, स्वयं कम्युनिटी जर्नलिस्ट

मेरठ। जनपद के हस्तिनापुर विधानसभा क्षेत्र में सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर डॉक्टर समय से नहीं पहुंच रहे हैं। इनकी ड्यूटी का समय सुबह आठ बजे से रहता है, लेकिन कुछ डॉक्टर दो से तीन घंटे बाद अस्पताल पहुंचते हैं। खासतौर से महिला डॉक्टरों ने तो डयूटी करने का समय अपनी सुविधा के मुताबिक तय कर रखा है। सप्ताह के दिनों में शायद ही ऐसा एक दिन हो जब महिला डॉक्टर सुबह 10 बजे के पहले अस्पताल पहुंच रहीं हों।

मेरठ के हस्तिनापुर स्थित सीएचसी पर डॉक्टर के आना का इंतजार करते मरीज।

गाँव कनेक्शन की टीम ने सुबह 8 बजे से लगभग ढाई घंटे यहां बिताए। मंगलवार को दो महिला डॉक्टर सहित पांच डॉक्टरों की डयूटी सुबह आठ बजे से थी। इनमें डॉक्टर एमके गुप्ता डॉ. राहुल वर्मा समय पर अस्पताल पहुंचे, जबकि अस्पताल प्रभारी डॉ. सतीश भास्कर ड्यूटी टाइम से 25 मिनट लेट पहुंचे। महिला मरीजों को तीन घंटे डॉक्टर का इंतजार करना पड़ा। खेड़ीकला गाँव निवासी सोनिया देवी ने बताया, “हम आठ बजे से मैडम का इंतजार कर रहे हैं, लेकिन वह अभी तक नहीं आई।”

सिद्धार्थनगर- सुबह 8.25 बजे

सिद्धार्थनगर: मनमानी के आगे मुफ्त इलाज के दावे फेल

दीनानाथ, स्वयं प्रोजेक्ट डेस्क

सिद्धार्थनगर। स्वास्थ्यकर्मियों की संवेदनहीनता के चलते मुफ्त चिकित्सा के दावे फेल साबित हो रहे हैं। जनपद सिद्धार्थनगर के नेपाल सीमा से सटे बढ़नी ब्लाक के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पर तैनात कर्मचारियों के बर्ताव में नई सरकार के गठन के बाद भी कोई परिवर्तन नहीं आया है। मनमाने तरीके से अस्पताल आना और अस्पताल की हर सुविधा के बदले पैसा वसूलना जारी है।

स्वास्थ्य केंद्र में डॉक्टर साहब का इंतजार करती उनकी कुर्सी।

अस्पताल का समय भले आठ बजे का है, लेकिन कर्मचारी आए या न आए, कोई कुछ कहने वाला नहीं। ग्राम सेवरा निवासी लालबहादुर (48 वर्ष) बताते हैं, “दो दिन से शुगर की जांच के लिए आ रहा हूं लेकिन कोई मिलता नहीं है।” बुजुर्ग रफीकुल्ला कहते हैं, “दवा के लिए पैसा भी दिए थे, लेकिन बता रहे हैं कि आज नहीं मिल पाएगी।” गाँव कनेक्शन संवाददाता जब 8:30 बजे अस्पताल पहुंचे तो डॉक्टर की कुर्सी खाली थी। 8:45 पर जब डॉक्टर वीके सिंह आए तो बताया, “रात में भी मरीज़ आ जाते हैं, इसलिए सुबह समय लग जाता है।”

कन्नौज- सुबह 9.25 बजे

कन्नौज: ड‍्यूटी के समय डॉक्टर नदारद

विवेक राजपूत, रवीन्द्र सिंह, स्वयं कम्युनिटी जर्नलिस्ट

कन्नौज। लाख कोशिशों के बाद भी सरकारी अस्पतालों का हाल सुधर नहीं रहा है। ओपीडी ड्यूटी के समय डॉक्टर नदारद रहते हैं। इसका खुलासा हुआ गाँव कनेक्शन के रियल्टी चेक में।

कन्नौज जिला मुख्यालय से 28 किमी दूर बसे इंदरगढ़ सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर पहुंचकर मंगलवार को सुबह 9.25 बजे गाँव कनेक्शन के संवाददाता ने हाल जाना। यहां के प्रभारी चिकित्साधिकारी डॉ. जयचंद्र मौके पर नहीं थे। फार्मासिस्ट आरपी यादव ने बताया, ‘‘डॉक्टर साहब पोस्टमार्टम के लिए गए हैं। वह दो दिन से नहीं हैं।’’ उन्होंने आगे बताया कि सफाईकर्मी एक साल से यहां नहीं है। इसलिए गंदगी काफी है।

डॉक्टर के इंतजार में बैठा फार्मासिस्ट।

महिलाओं के लिए सुरक्षित प्रसव कराने के लिए अभियान चलाकर भारी-भरकम बजट खर्च करने वाले विभाग के कक्ष में ताला लगा था। यहां बताया गया कि जीएनएम की तैनाती नहीं है। जिला मुख्यालय कन्नौज से करीब 65 किमी दूर सौरिख ब्लाक क्षेत्र के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र सकरावां में भी डॉ. अभिषेक दुबे नहीं थे। पूछने पर फार्मासिस्ट राजवीर ने बताया, ‘‘आशा बहुओं को ट्रेनिंग देने के लिए सौरिख गए हैं।’’

खाज-खुजली की दवा लेने आए मरीज महताब आलम (32 वर्ष) ने बताया, ‘‘दवा मिल गई है, लेकिन ट्यूब नहीं मिली है।’’ सकरावां निवासी ममता (11 वर्ष ) ने बताया, ‘‘मैं अपने घरवालों के साथ बुखार की दवा लेने आई हूं। दवा मिल गई है।’’

सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर पसरा सन्नाटा।

लालगंज- सुबह 10 बजे

दस बजे भी नहीं पहुंचे लालगंज सीएचसी प्रभारी

डिम्पी तिवारी, स्वयं कम्युनिटी जर्नलिस्ट

रायबरेली। लालगंज सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र का हाल जानने के लिए 10 बजे जब गाँव कनेक्शन की संवाददाता सीएसची पहुंचीं तो 10 बजे सीएचसी प्रभारी रजत चौरसिया की कुर्सी खाली मिली। मरीज और तीमारदारों की भीड़ उनके कमरे के बाहर लगी हुई थी। वहीं पांच डॉक्टर मरीजों को देखते हुए मिले। मरीज विजय शंकर (60 वर्ष) बताते हैं, “पहले यहां के डॉक्टर बाहर से दवा लिखते थे पर योगी सरकार के बाद अस्पताल से दवा मिलने लगी।”

रायबरेली के बछरावां सामुदाियक स्वास्थ्य केन्द्र पर लगी लोगों की भीड़।

वहीं शिक्षक शेखर यादव (52 वर्ष) का कहना है, “यहां हड्डी का कोई भी डॉक्टर नहीं है। हड्डी का मरीज अगर आता है तो उसे जिला अस्पताल भेज दिया जाता है।”बछरावां समुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर डॉक्टर एसके सचान समय से मौजूद थे। केंद्र के नेत्र चिकित्सक, महिला डॉक्टर, फार्मासिस्ट आदि कर्मचारी भी अस्पताल में समय पर मौजूद थे।

यहाँ तो समय से आते ही नहीं डॉक्टर साहब।

इलाहाबाद: मंत्री की चेतावनी के बाद जागा स्वास्थ्य विभाग

ओपी सिंह परिहार, स्वयं प्रोजेक्ट डेस्क

इलाहाबाद। सरकार की ओर से निर्देश जारी होने के बावजूद भी स्वास्थ्य मंत्री सिद्दार्थनाथ सिंह के गृह जनपद में डॉक्टरों के लेटलतीफी के आदतों में कोई सुधार नज़र नहीं आ रहा था। इसकी बानगी कैबिनेट मंत्री रीता बहुगुणा के औचक निरीक्षण के दौरान देखने को मिली।

रीता बहुगुणा जोशी औचक निरीक्षण में जिला अस्पताल के अलावा दो प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों पर पहुंची, निरीक्षण के दौरान कैबिनेट मंत्री को अस्पताल परिसर में गंदगी का अंबार और प्राथमिक स्वास्थ्य से डॉक्टर नदारद मिले थे। मंत्री के दौरे के बाद डॉक्टरों का समय पर आना शुरू हो गया है।

बेली अस्पताल में इलाज कराने पहुंचे राजापुर निवासी आशुतोष मिश्रा (45 वर्ष) ने बताया, “पिछले दो सप्ताह से डॉक्टर फुल टाइम अस्पताल परिसर में नज़र आने लगे हैं। इनका यह भी कहना है कि नई सरकार बनने के बाद थोड़ा बहुत बदलाव डॉक्टरों में देखा गया है।” एसआरएन अस्पताल में बेटी के इलाज के लिए पहुंची सुनीता मौर्या (38 वर्ष) का कहना है, “मुख्यमंत्री के कार्यक्रम की घोषणा के बाद अस्पताल ही नहीं जिले के कई विभागों ने काम करना शुरू कर दिया है।”

अस्पताल में डॉक्टर को दिखने के लिए लगी मरीजों की भीड़।

बिधनू सीएचसी में सुबह आठ बजे ही शुरू हो जाता है इलाज

राजीव शुक्ला, स्वयं प्रोजेक्ट डेस्क

कानपुर। बीमारों की ज्यादा भीड़ नहीं थी, लेकिन दुर्घटना में घायल का इलाज चल रहा था। बिधनू गाँव की सीमा देवी अपनी बेटी रानी (नौ वर्ष) को बुखार की दवा दिलाने के लिए आई हुई थीं, जिसकी जांच डॉ. संजय जायसवाल कर रहे थे।

बिधनू सीएचसी प्रभारी डॉ. महेश कुमार भी मौके पर मौजूद थे और अपने कक्ष में बैठे हुए काम निपटा रहे थे। इसके साथ ही पूरे प्रांगण में कैमरे की मदद से निगरानी भी रखे हुए थे। सीमा ने बताया, “कभी-कभार की छोड़ दें तो यहां हमेशा ही डॉक्टर समय पर मिलते हैं और ठीक से बात भी करते हैं।”

मरीज का एक्स-रे देखते डॉक्टर।

दिन के डॉक्टर संजय जायसवाल का आने का समय सुबह आठ बजे का है और उनको कानपूर नगर से आना होता है तो यदि ऐसे में आने में थोड़ी देर भी हो जाए तो रात्रिकालीन डॉक्टर थोड़ी देर रुक जाते हैं। कानपुर-हमीरपुर हाईवे पर कानपुर नगर मुख्यालय से लगभग 23 किलोमीटर की दूरी पर स्थित इस स्वास्थ्य केंद्र पर सड़क दुर्घटना के केस आते हैं।

स्वास्थ्य केंद्र में मौजूद डॉक्टर व स्टाफ।

इस लिए डॉक्टरों की मौजूदगी बहुत आवश्यक होती है। सीएचसी प्रभारी डॉ. महेश कुमार बताते हैं, “हमारी कोशिश यह होती है कि सभी को स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध हों। इसलिए एक शिफ्ट के डॉक्टर तभी जाते हैं जब दूसरी शिफ्ट के आ जाते हैं।

एटा- सुबह 10 बजे

एटा: सही वक्त पर पूरा स्टाफ अस्पताल में था मौजूद

आमिल, स्वयं प्रोजेक्ट डेस्क

एटा। सरकारी महकमों में योगी सरकार का बायोमेट्रिक अटेंडेंस का फरमान अभी पूरी तरह से लागू नहीं हुआ है, लेकिन बावजूद इसके अस्पतालों में वक्त का ख्याल डॉक्टरों से लेकर कर्मचारियों तक में देखने को मिल रहा है। इसका एहसास तब हुआ जब ‘गाँव कनेक्शन’ की टीम मारहरा सीएचसी केंद्र पर पहुंची। सही वक्त पर पूरा स्टाफ अस्पताल में मौजूद था। कारण था सीएचसी प्रभारी को प्रतिदिन आठ बजकर 20 मिनट पर पूरे स्टाफ की उपस्थिति का रिकॉर्ड मुख्यालय भेजना।

स्वास्थ्य केंद्र पर मौजूद डॉक्टर।

जनपद एटा के ब्लॉक मारहरा का बीएम जुबैरी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र यूं तो 30 बेड का है। डॉक्टर सही वक़्त पर आते हैं, साफ़-सफाई में भी बेहतर, प्रतिदिन यहां सैकड़ों मरीज उपचार के लिए आते हैं, लेकिन स्वास्थ्य सुविधाओं की स्थिति काफी खराब है। केंद्र पर सबसे बड़ी कमी डॉक्टरों की है। केंद्र पर कम से कम सात डॉक्टर होने चाहिए। वहां केवल तीन डॉक्टर ही सैकड़ों मरीजों की नब्ज टटोलते हैं। केंद्र पर एक्स-रे मशीन कबाड़ा बनी हुई है। टीम जब 10 बजे सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंची तो डॉ. सीएल यादव व डॉ. उमाशंकर प्रतिहार मरीजों को देख रहे थे। 10 बजे तक 40 मरीज केंद्र पर पर्चा बनवा चुके थे।

वाराणसी: गोली से ज्यादा काम कर रही डॉक्टरों की मीठी बोली

विनोद कुमार, स्वयं प्रोजेक्ट डेस्क

वाराणसी। जिला मुख्यालय से करीब दस किमी दूर शिवदासपुर ग्राम स्थित प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र की कार्यप्रणाली संतोषजनक मिली। पीएचसी के जिम्मेदार अधिकारी, डॉक्टर और कर्मचारियों की समय पर उपस्थिति और मरीजों की भीड़ से पता चलता है कि यहां सभी स्वास्थ्य के प्रति जागरूक हैं।

पीएचसी की व्यवस्था की पड़ताल और स्वास्थ्य सेवाओं का हाल जानने के लिए मंगलवार सुबह करीब नौ बजे गाँव कनेक्शन की टीम पहुंची। प्रतिदिन की तरह सभी वार्डों में मरीज मौजूद थे। जनरल वार्ड में डॉ. पीके मौर्या मरीजों से घिरे थे। वहीं ओपीडी वार्ड में भी महिला रोग विशेषज्ञ के चारों तरफ गर्मभती महिलाओं की भीड़ थी।

बनारस के शिवदासपुर ग्राम स्थित पीएचसी पर इलाज करातीं महिलाएं।

दोनों डॉक्टरों का मरीजों से मीठा संवाद दवा से भी ज्यादा असरदार दिखा। मेडिकल ऑफिसर डॉ. ओपी शुक्ला मौजूद नहीं थे, लेकिन स्वास्थ्य शिक्षा अधिकारी विनोद सिंह आमजन के लिए उपलब्ध थे। बातचीत में पता चला कि डॉ. शुक्ला ककरहिया गए हैं। चर्चा है कि यह ग्रामसभा आदर्श गाँव में चयनित होने वाला है। गर्भवती गुड़िया (24 वर्ष) राजभर बताती हैं, “यहां हम जब भी आते हैं, अक्सर डॉक्टर मैडम मिल जाती हैं।

भीड़ रहती है, इसलिए थोड़ा समय लगता है। वैसे यहां कोई दिक्कत नहीं होती है।”वहीं नवविवाहिता रेनू प्रकाश (20 वर्ष) बताती हैं, “मैं करीब छह माह से यहां आ रही हूं। यहां की मैडम बहुत अच्छी हैं। आशा चंदा देवी की परार्मश और गाँव वालों से सुना था कि यहां के लोग अच्छे हैं। इसलिए प्राइवेट डॉक्टर के पास न जाकर यहां आती हूं। वैसे भी हम लोग पैसे वाले नहीं हैं।”

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