इस प्राथमिक स्कूल में कक्षा दो का बच्चा सुनाता है 30 का पहाड़ा, हेडमास्टर अपनी जेब से खर्च कर दे रहे सुविधा  

इस प्राथमिक स्कूल में कक्षा दो का बच्चा सुनाता है 30 का पहाड़ा, हेडमास्टर अपनी जेब से खर्च कर दे रहे सुविधा  मॉडल स्कूल में बच्चों को पढ़ाती शिक्षिका 

बीसी यादव

स्वयं कम्युनिटी जर्नलिस्ट

मछलीशहर(जौनपुर)। मॉडल स्कूल क्या होता है देखना है तो जौनपुर जिले के मछलीशहर तहसील के प्राथमिक विद्यालय अदारी को देख लीजिए। पढ़ाई से लेकर स्कूल की लगभग व्यवस्था किसी कांवेंट स्कूल से कम नहीं है। यहां के कक्षा दो के बच्चों को 30 तक पहाड़ा आता है। इतना ही नहीं बच्चे फर्राटे के साथ अंग्रेजी किताब भी पढ़ते हैं। उन्हें गणित के सवालों को लगाने में कोई परेशानी नहीं होती हैं। हालांकि यह अलग बात है कि विद्यालय में तमाम सुविधाएं सरकारी नहीं बल्कि खुद हेड मास्टर ने अपनी जेब से खर्च करके की हैं, लेकिन उनकी और बाकी शिक्षकों की मेहनत रंग लाई है। यहां के छात्रों पढ़ाई में जैसे हैं। वैसा कम ही स्कूलों में देखने को मिलता है।

प्रदेश में परिषदीय स्कूलों की शिक्षा का क्या आलम है। यह बात किसी से भी छुपी नहीं है। बहुत सी जगहों पर शिक्षक पढ़ाने नहीं जाते यदि जाते हैं तो सिर्फ हाजिरी लगाकर चले आते हैं। जबकि बहुत सी जगहों पर छात्र भी स्कूल नहीं जाते हैं। यही वजह है कि लाख कोशिशों के बावजूद परिषदीय स्कूलों की शिक्षा व्यवस्था जैसा सरकार की मंशा है, वैसे नहीं चल पाती है। यह हाल ज्यादातर स्कूलों का है लेकिन इसमें कई ऐसे विद्यालय भी जहां की बेहतरीन व्यवस्था तमाम ऐसे स्कूलों के लिए नजीर भी बन सकती है। ऐसा ही एक विद्यालय मछलीशहर तहसील के अदारी गांव में है। अभिनव विद्यालय अदारी प्राथमिक विद्यालय है।

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यहां के हेड मास्टर आनंद प्रकाश सिंह इसी गाँव के हैं। उन्हें लेकर कुछ पांच शिक्षकों की यहां तैनाती की गई है। यहां 310 छात्र पंजीकृत हैं। इस लिहाज से विद्यालय में 9 शिक्षक होने चाहिए लेकिन कम हैं। इसके बावजूद यहां की शिक्षकों की टीम सिस्टम को कोसने की बजाय उसी व्यवस्था में बेहतर परिणाम देने पर विश्ववास करती है। यही वजह है कि यह स्कूल किसी मॉडल स्कूल से कम नहीं है।

हेडमास्टर आनंद प्रकाश सिंह ने बताया, “हमने खुद से 70 हजार रुपए खर्च करके स्कूल में रंग-रोगन करवाया है। विद्यालय परिसर में फूल-पौधे लगवाए हैं। विद्यालय परिसर को समतल करवाया है। इसके अलावा लाउडस्पीकर की भी व्यवस्था कराई है। ताकि छात्रों को अच्छी तरह से पढ़ाया जा सके। यह अलग बात है कि यहां अभी बच्चे जमीन पर ही बैठकर पढ़ाई करते हैं। उनके लिए डेस्क बेंच की व्यवस्था नहीं हो सकी है। जबकि शिक्षकों भी कमी है लेकिन छात्रों की पढ़ाई के आगे ये कमियां आड़े नहीं आती हैं। स्कूल एक एकड़ जमीन स्कूल के बगल मे है। जिसकी बाउंड्रीवॉल हो जाए तो छात्रों के लिए खेल-कूद का अच्छा मैदान भी हो जाएगा।”

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ऐसे होती है विद्यालय में पढ़ाई

हेडमास्टर आनंद प्रकाश सिंह ने बताया कि उन्होंने सभी शिक्षकों से कहा है कि एक डायरी बनाएं। स्कूल में डायरी है। जिसमें शिक्षक हर दिन यह लिखते हैं कि उन्होंने आज किस कक्षा में क्या पढ़ाया। इसके अलावा शिक्षकों ने छात्रों को होमवर्क कया दिया। उन्होंने बताया कि वह इस चीज की खुद मॉनीटरिंग करते हैं। उन्हें शिक्षकों से का पूरा सहयोग भी मिलता है। इसके अलावा छात्रों को जो पाठ पढ़ाया जाता है। जब तक यह तय नहीं हो जाता कि सभी छात्रों ने अच्छी तरह से दिया हुआ सबक समझ लिया हो आगे का पाठ नहीं पढ़ाया जाता है।

मेरे पिता ने इस स्कूल में 42 वर्ष पढ़ाया है। अब मैं इस स्कूल में पढ़ा रहा हूं। विद्यालय से मेरा भावुकता वाला रिश्ता है। इसलिए विद्यालय और यहां पढ़ने वाले बच्चों के लिए जो हो सकता है, उसे करने की कोशिश करता हूं।
आनंद प्रकाश सिंह, हेडमास्टर

डीएम और एसपी ने भी सराहा

पिछले शनिवार को डीएम सर्वज्ञराम मिश्र और एसपी केके चौधरी ने स्कूल का निरीक्षण किया था। इस दौरान दोनों अधिकारियों ने बच्चों से सवाल किए तो उन्हें सही जवाब मिला। वहीं स्कूल में व्यवस्था को देखकर संतुष्टि जाहिर की थी। हेडमास्टर ने कुछ कमियां गिनाईं तो डीएम ने आश्वासन दिया था कमियां दूर करने के लिए अपने स्तर से पूरा प्रयास करेंगे। इसके अलावा डीएम ने कहा था कि जिस तरह से लापरवाही करने वाले शिक्षकों पर कार्रवाई होती है। उसी तरह अच्छा कार्य करने वाले शिक्षकों को सम्मानित भी किया जाएगा।

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विद्यालय में कुछ कमियां हैं। उन्हें दूर करने का प्रयास जारी है। विद्यालय में शिक्षकों की संख्या बढ़ाए जाने के लिए भी उच्चाधिकारियों से बात की जा रही है|
शैलपति यादव, खंड शिक्षा अधिकारी, मछलीशहर

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