कई व्यापारी अभी भी नहीं ले रहे दस के सिक्के

कई व्यापारी अभी भी नहीं ले रहे दस के सिक्केप्रतीकात्मक फोटो

कम्युनिटी जनर्लिस्ट: नंदिनी शर्मा

रामपुर मथुरा (सीतापुर )। रिजर्व बैंक ने दस के सिक्के का नकली और असली का फर्क दूर कर दिया है और साथ में ये भी कहा है कि जो भी इन सिक्कों को नहीं लेगा, उसे भारी जुर्माना भी भरना पड़ सकता है। फिर भी अभी ग्रामीण क्षेत्रों में और कस्बों में छोटे-बड़े व्यापारी 10 के सिक्कों को लेने से इंकार कर रहे हैं। ये लोग आरबीआई के आदेशों का उल्लंघन किये जा रहे हैं। इस पर स्थानीय पुलिस भी चुप्पी साधे बैठे हुई है। जबकि आरबीआई का सख्त निर्देश है कि 10 के सिक्कों (भारतीय मुद्रा) का अपमान न किया जाय, जो भी ऐसा करते हुए पकड़ा जायेगा, उसके ऊपर देशद्रोह का मुकदमा और दो लाख रुपये जुर्माना भी वसूल किया जाएगा।

छोटे व्यापारियों को हो रहा नुकसान

सीतापुर जिले में रामपुर मथुरा क्षेत्र के बहादुरगंज में 10 के सिक्के को लोग खुलेआम लेने से इनकार कर रहे हैं। ब्लाक रामपुर मथुरा के व्यापारी मुकीम का कहना है, "जब हमसे बड़े व्यापारी और बैंक वाले यह सिक्का लेने से मना कर रहे हैं तो हम ये सिक्का कैसे ले लें, हम छोटे व्यापारी हैं। हम ये सिक्का जुर्माने के डर से बचने के लिए ले भी लें, पर जब हमसे बड़े व्यापारी व बैंक वाले ही रुपये नहीं ले रहे हैं तो इससे हमें काफी नुकसान भी हो रहा है।"

इसलिए नहीं ले रहे सिक्का

मुकीम आगे बताते हैं, "हमारे पास एक हजार रुपये के सिक्के रखे हुए हैं पर कोई ले नहीं रहा तो उन सिक्कों से हमारा पैसा फंस जा रहा है। इसलिए हम 10 का सिक्का नहीं ले रहे हैं।" वहीं बहादुरगंज से 2 किलोमीटर दूर धौरहरा व शमशेर नगर ऐसे कई आस-पास के गाँव के छोटे-छोटे व्यापारी भी ये सिक्का लेने से इंकार कर रहे हैं।

मानने को तैयार नहीं है लोग

गाँव में रहने वाले प्रमोद, राजेश, शिवम जैसे बहुत से लोगों को इससे बहुत कठिनाईयों का सामना करना पड़ रहा है। साथ ही लोग ये मानने को तैयार नहीं है कि ये सिक्का रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया ने मान्य कर दिया है। वो लोग इस तथ्य से अनजान हैं और जो जानते भी हैं वो भी 10 के सिक्कों को लेने से मना कर रहे हैं। सीतापुर के साथ-साथ बेलहरा (बाराबंकी) में भी यही हाल है कि आरबीआई के सख्त निर्देशों के बावजूद भी व्यापारी या कास्तकार 10 के सिक्के को लेने से मना कर रहे हैं।

This article has been made possible because of financial support from Independent and Public-Spirited Media Foundation (www.ipsmf.org).

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