अब बस से पढ़ने जाएंगे झुग्गी-झोपड़ी के बच्चे

अब बस से पढ़ने जाएंगे झुग्गी-झोपड़ी के बच्चेफोटो साभार: गूगल इमेज

मीनल टिंगल (स्वयं प्रोजेक्ट डेस्क)

लखनऊ। नए शैक्षिक सत्र में सामान्य बच्चों की तरह ही झुग्गी-झोपड़ी के बच्चे भी अब स्कूल की बस से स्कूल जाएंगे और अच्छे स्कूल में शिक्षा प्राप्त करेंगे। यही नहीं, स्कूल में लंच टाइम में उनको अच्छे रेस्टोरेंट का लजीज खाना खाने का अवसर भी मिल सकेगा।

पहले 200 बच्चों के लिए

झुग्गी-झोपड़ियों के बच्चों को पढ़ाने की जिम्मेदारी तो कई एनजीओ के द्वारा निभायी जा रही है। लेकिन अब दो एनजीओ और स्कूल के जरिये बेहतर शिक्षा और लजीज खाने के साथ बच्चों को अच्छा माहौल भी दिया जायेगा। होली विजन एनजीओ व सेंट जेवियर स्कूल की निदेशक अर्जुमंद जैदी बताती हैं, ''कई एनजीओ हैं, जो झुग्गी-झोपड़ी के बच्चों को शिक्षा तो देते हैं, लेकिन अच्छा खाना, अन्य सामान्य बच्चों के साथ बैठना और उनमें मिलकर रहना इन बच्चों के लिए सपना ही होता है। ऐसे बच्चों को सामान्य माहौल देने के लिए बच्चों को स्कूल बस द्वारा स्कूल तक बुलाया जायेगा और छुट्टी में घर भेजा जायेगा।'' झुग्गी-झोपड़ी से तीन से आठ वर्ष के लगभग 200 बच्चों को बस द्वारा स्कूल तक ले जाना, अच्छी शिक्षा देने के साथ लजीज खाना भी उपलब्ध करवाने की जिम्मेदारी अब एक स्कूल और दो एनजीओ मिलकर निभाएंगे।

ताकि बच्चों में बढ़े स्कूल आने की उत्सुकता

जैदी आगे बताती हैं, ''बच्चों को स्कूल के माहौल में अच्छी शिक्षा दी जायेगी साथ ही अच्छे रेस्टोरेंट का खाना भी उनको दिया जायेगा जिससे स्कूल आने की उत्सुकता बच्चों में बनी रहे।'' स्लम के बच्चे सामान्य वर्ग के बच्चों के बीच रहने और उठने-बैठने का सलीका सीख सकें और स्कूल के माहौल को जान सकें, इसके लिए शिक्षकों के साथ स्कूल की बड़ी कक्षाओं के बच्चे भी इन के बच्चों को कक्षा में पढ़ायेंगे। बच्चों को तीन वर्गों में बांटा जायेगा और उनकी समझ और उम्र के अनुसार उनको शिक्षित किया जायेगा। स्लम एरिया के इन बच्चों के लिए रॉबिन हुड एनजीओ उन अच्छे रेस्टोरेंट से खाना जुटा कर उन तक पहुंचायेगी।

निजी स्कूल के बच्चे भी करेंगे सहयोग

सेंट जेवियर्स स्कूल में कक्षा नौ में पढ़ने वाली उन्नति तिवारी (14 वर्ष) बताती हैं, ''मुझे पढ़ाना अच्छा लगता है। मुझे स्लम के बच्चों को पढ़ाने में भी बहुत अच्छा लगेगा क्योंकि घर पर सब कहते हैं यह नेक काम होता है। मैं बच्चों को पढ़ाने के साथ उनको उठने-बैठने और स्कूल के मैनर्स भी बताऊंगी जिससे वह हम जैसे बन सकें।'' वहीं, गोमतीनगर रेलवे क्रासिंग के पास स्थित स्लम एरिया में रहने वाले प्रकाश (आठ वर्ष) कहते हैं, ''मैम हमारे यहां आती हैं और बताती हैं कि हम लोगों को भी और बच्चों की तरह स्कूल में पढ़ाया जायेगा। हम भी बस से जायेंगे, अच्छा खाना मिलेगा और ड्रेस और किताबें भी मिलेंगी। अच्छा लग रहा है। अपने दोस्तों के साथ रोज स्कूल जाया करूंगा।” बच्चों को किताबें और स्कूल ड्रेस भी स्कूल व एनजीओ के द्वारा उपलब्ध करवायी जायेगी जिससे बच्चे खुद को अन्य सामान्य बच्चों की तरह ही समझें।

This article has been made possible because of financial support from Independent and Public-Spirited Media Foundation (www.ipsmf.org).

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