सलाखों के पीछे भी की जा रही है जैविक खेती 

सलाखों के पीछे भी की जा रही है जैविक खेती शाहजहांपुर जेल में भी सूखे पत्तों व कचरे से जैविक खाद बनाई जा रही है।

स्वयं प्रोजेक्ट डेस्क

लखनऊ। पिछले कुछ वर्षों में जहां रासायनिक उर्वरकों पर निर्भर किसानों का रुझान जैविक खेती की तरफ बढ़ रहा है। वहीं शाहजहांपुर जेल में भी एक नई पहल की शुरू की गई है, यहां पर सूखे पत्तों व कचरे से जैविक खाद बनाई जा रही है।

पहले जेल में भी रसायनिक उर्वरकों का प्रयोग होता था, लेकिन अब पूरी तरह से जैविक खेती की जा रही है। शाहजहांपुर के जेल अधीक्षक ब्रजेन्द्र सिंह बताते हैं, “स्वच्छ भारत अभियान के तहत पिछले कुछ महीनों में इसकी शुरुआत की है। पुलिस लाइंस में भी कूड़े के ढ़ेर से खाद बनाई जा रही है। इस खाद काे जेल में लगने वाली सब्जियों में प्रयोग करते हैं, जिसकी देखरेख कैदी ही करते हैं।”

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सिंह आगे बताते हैं, “रासायनिक खेती के मुकाबले जैविक खेती का प्रयोग ज्यादा अच्छा है। इसमें अच्छा उत्पादन भी होता है। अभी बहुत बड़े स्तर पर नहीं किया जा रहा है। एक छोटी सी पहल है।” जेल में जैविक तरीके से धान, गेहूं के साथ ही सब्जियों की खेती की जाती है, यहां के कैदी ही चार एकड़ में खेती कर रहे हैं।

कृषि और प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (एपीडा) के अनुसार, प्रमाणित जैविक खेती के तहत खेती योग्य क्षेत्र पिछले एक दशक में तकरीबन 17 गुना बढ़ गया है। यह क्षेत्र वर्ष 2003-04 में 42,000 हेक्टेयर था, जो वर्ष 2013-14 में बढ़कर 7.23 लाख हेक्टेयर के स्तर पर पहुंच गया। उत्तर प्रदेश में 44670.10 हेक्टेयर में जैविक खेती हो रही है।

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वहीं शाहजहांपुर जिले के पुलिस लांइस में पेड़-पौधों की पत्तियों को जलाया नहीं जाता है बल्कि उसे गड्ढे में डालकर जैविक खाद तैयार की जा रही है। निरीक्षक गुलफाम सिंह ने बताया, “पुलिस लाइंस में कूड़ा-करकट को एक गड्ढे में इकट्ठा किया जा रहा है, उसमें पानी डाल दिया जाता है। बरसात के दिनों में भी पानी भरता रहेगा, इससे खाद भी तैयार होगी जो कि पुलिस लाइंस में लगे पेड़-पौधों में डाली जाएगी।”

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