राजकीय कृषि बीज गोदाम का भवन जर्जर, पड़ोस के घर से मिल रहा है बीज

राजकीय कृषि बीज गोदाम का भवन जर्जर, पड़ोस के घर से मिल रहा है बीजपड़ोस के घर को बना लिया राजकीय कृषि बीज निगम का कार्यालय।

कम्यूनिटी जर्नलिस्ट-उमा शर्मा-आशीष अग्निहोत्री

शिवली (कानपुर देहात)। किसानों के हित के लिए सरकार द्वारा राजकीय कृषि बीज गोदाम जगह-जगह लाखों रूपये खर्च करके बनवाये तो गये, लेकिन इन बीज गोदाम की हालत जर्जर पड़ी हुई है। आलम यह है कि भवन के पास बने एक घर से किसानों को बीज उपलब्ध कराये जा रहे हैं। ऐसे में जिन किसानों को जानकारी है, वे तो उस घर में जाकर बीज खरीद रहे हैं, मगर जिन्हें जानकारी नहीं है, वे किसान मजबूरन बाजार से महंगे दामों में बीज खरीद रहे हैं।

कभी भी गिर सकता है जर्जर भवन

कानपुर देहात जिला मुख्यालय से 30 किलोमीटर दूर शिवली क़स्बा है। यहाँ पर कई वर्ष पहले किसानों की सुविधा के लिए राजकीय कृषि बीज गोदाम बनाया गया। कई वर्ष तो ये गोदाम खुला रहा, लेकिन अब एक साल से इस भवन की स्थिति बहुत दयनीय हो गयी है। ये गोदाम पूरी तरह से जर्जर हो गया है, जो कभी भी गिर सकता है। वर्तमान समय में पड़ोस के मकान में बीज रखकर किसानों को दिया जा रहा है।

दो साल से जानकारी ही नहीं

बैरी दरियाव में रहने वाले सुरेश शुक्ला (55 वर्ष) बताते हैं कि इस कृषि बीज गोदाम से दो साल पहले तक बीज यहीं से खरीदते थे, लेकिन अब मजबूरी में बाजार से खरीदना पड़ता है क्योंकि फसल की बोआई के समय से यहाँ बीज उपलब्ध नहीं होता है। वो आगे बताते हैं कि जर्जर भवन पड़े होने से हम लोग कभी जाते नहीं और हमे दो साल से ये जानकारी नहीं है कि यहाँ बीज मिलता भी है या नहीं। वहीं शिवली कस्बे में रहने वाले शशिकांत अग्निहोत्री (65 वर्ष) का कहना है कि 15 बीघे खेती के लिए खाद और बीज जब बाजार से खरीदना पड़ता है तो बहुत महंगा पड़ता है। जबकि कृषि बीज गोदाम से किसानों को बीज और खाद सरकारी अनुदान और सरकारी दाम में मिलता है जो सस्ता होता है, इससे किसानों को बहुत लाभ मिलता था।

नहीं होती कोई सुनवाई

भवन जर्जर होने से कई ग्रामीणों को ये जानकारी नहीं है कि बगल वाले मकान में बीज और खाद मिलता है। क्षेत्रीय लोगों की शिकायत है कि भवन न होने से कई बोरी जिप्सम पानी में भींग गयी है। बरसात का भरा पानी अभी तक भरा है जो सूखा नहीं है। चारों तरफ खरपतवार जम गयी है। इस भवन तक पहुंचने के लिए कोई रास्ता नहीं है। कई बार जिलास्तरीय शिकायत के बाद भी कोई सुनवाई नहीं की जा रही है।

एक साल पहले शिवली कृषि बीज गोदाम का स्टीमेट यूपीटीसीएल विभाग को बनाकर भेज दिया गया है। विभाग से बात करने पर ये जानकारी हुई है कि अभी नये भवन बनने का बजट नहीं है, सिर्फ मरम्मत का ही बजट है। जबकि शिवली में बने गोदाम में मरम्मत सम्भव नहीं है क्योंकि वो पूरी तरह से जर्जर हो गया है। ब्लॉक में भी कई बार बात हुई कि बीज रखने की पर किसान वहां जाते नहीं है। गोदाम के सामने जो पानी भरा है वहां मिट्टी डलवाने के आदेश दिए हैं, जिससे बीज वहां आसानी से पहुंच सके और किसानों को कोई असुविधा न हो।
रामसजीवन, जिला कृषि अधिकारी, कानपुर देहात

एक साल पहले हमारी यहाँ पोस्टिंग हुई है। भवन तो जर्जर है, लेकिन मैं नियमित तौर पर बगल के मकान पर किसानों को बीज देता हूँ। उन्हें जो सरकारी अनुदान मिलता है, किसान उसका भी लाभ ले रहे हैं। मटर, चना, लाही का बीज इस समय हमारे पास मौजूद है, जो भी किसान लेने आते हैं, उन्हें दिया जा रहा है। इस जर्जर भवन की मैंने भी कई बार शिकायत की है, पर कोई सुनवाई नहीं हो रही है।
धर्मेन्द्र सिंह यादव, प्रभारी बीज भण्डार शिवली, कानपुर देहात

This article has been made possible because of financial support from Independent and Public-Spirited Media Foundation (www.ipsmf.org).

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