तकनीकी के अभाव में नहीं हो रही अच्छी पैदावार

तकनीकी के अभाव में नहीं हो रही अच्छी पैदावारबरेली में नवीन कृषि तकनीकियों से अनजान किसान, उत्पादन पर पड़ रहा असर

नवनीत शुक्ल

स्वयं कम्युनिटी जर्नलिस्ट

बरेली। खेती को लाभदायक बनाने के लिए आधुनिक तरीके से खेती करने की जरूरत है। लेकिन कृषि विभाग की उदासीनता और किसानों की अज्ञानता की वजह से जिले ज्यादातर किसानों को कृषि की नवीन तकनीकियों के बारे में पता ही नहीं है। जनपद के तीनों तहसीलों बहेड़ी, नवाबगंज और आंवला के किसानों से बात की गई तो कुछ मुख्य बातें निकल कर सामने आईं, जिनपर ध्यान दिया जाए तो बेहतर उत्पादन हो सकता है।

मिट्टी की जाँच पर ध्यान नहीं देते

बिना मिटटी के जांच कराए ही उसमें यूरिया, जिंक, पोटास कीटनाशक इत्यादि का प्रयोग करना मिट्टी की गुणवत्ता और उपजाऊपन को ख़राब करता है। यहां के किसानों ने कभी अपने खेत की मिट्टी की जांच सम्बंधित केंद्र पर नहीं कराई।

बिहारीपुर गाँव निवासी महेंद्र सिंह(60वर्ष) का कहना है,“ मिट्टी की जांच की बात कभ- कभी अधिकारियों द्वारा चौपाल में की जाती है, लेकिन काम-काज में व्यस्त होनेके नाते इस पर ध्यान नहीं दे सका। अब अपने खेत की मिट्टी की जांच कराऊंगा। जो कमी होगी उसे पूरी करुंगा। ”इसी गाँव के किसान लाला राम (65वर्ष) कहते हैं, “ जैसे पिता जी ने खेती की वैसे ही खेती हम भी कर रहे हैं। अब नए ज़माने की तकनिकी कोई सिखाए तो जरूरसीखेंगे।”

किसान कॉल सेंटर पर बात करने से कतराते हैं किसान

किसानों को खेती की समस्या और जानकारी देने के लिए सरकार की तरफ से निशुल्क हेल्प लाइन नंबर जारी किया गया, जिसपर किसान फोन कर अपनी समस्या का समाधान और जानकारी पा सकता है।लेकिन जयादातर किसानों ने कभी बात नहीं की। गाँव तुलारामपुर निवासी बाबूराम (50वर्ष) ने बताया, “मैंने कभी भी किसान सहायता नंबर पर बात नहीं की, हालांकि इस नंबर के बारे में सुना जरूर है।”

सिंचाई की तकनीकी पे ध्यान नहीं

खेती किसानी पानी की उपलब्धता पर बहुत निर्भर करती है। पानी की कमी होने के कारण किसानों को परम्परागत तरीके हट के ड्रिप यानि टपक सिंचाई को अपनाना चाहिए। फ्लड सिंचाई जरूरत से ज्यादा पानी मांगती है और मिटटी के अच्छे तत्व बहा ले जाती है। जानकारों के मुताबिक टपक सिंचाई से फल, सब्जी और अन्य फसलों के उत्पादन में 20 से 50 प्रतिशत तक बढ़ोतरी संभव है। तहसील नवाबगंज के गाँव गंगापुर के किसान मुन्ना लाल (35वर्ष) का कहना है,“ जैसे-तैसे सिंचाई कर लेते हैं। अगर सरकार सब्सिडी पर ड्रिप सिंचाई का यन्त्र प्रदान करें तो जरूर प्रयोग करेंगे।”

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