अमिष त्रिपाठी: सफलता मिलती थी, पर खुशी कभी नहीं मिलती थी

अच्छा इंक्रीमेंट मिलता तो मैं सोचता था कि कम मिला, प्रोमोशन मिलता तो लगता कि पहले क्यों नहीं मिला, केबिन मिला तो मेरा केबिन बड़ा क्यों नहीं है। सफलता मिलती थी, पर खुशी कभी नहीं मिलती थी। मैं हमेशा आगे का सोचता रहता था। अगर ऐसी मानसिक स्थिति हो, तो भगवान कोई भी आशीर्वाद दे दे, वो आपके लिए काफी नहीं होता। आप हमेशा सिर्फ शिकायत करते रहते हैं। आज के माहौल में बहुत से लोग ऐसी ही ज़िंदगी बिता रहे हैं। - अमिष त्रिपाठी

भारतीय पुराणों को नई नज़र से लिखने वाले लेखक और उपन्यासकार अमिष त्रिपाठी इस बार 'द स्लो इंटरव्यू विद नीलेश मिसरा' में मेहमान बनकर आए। अमिष के पहले तीन उपन्यास 'दि शिवा ट्रायलॉजी' के नाम से मशहूर हुए। ये सीरीज़ भारतीय प्रकाशन के इतिहास में सबसे ज़्यादा बिकने वाली किताबों की सीरीज़ बनी। इसके बाद अमीष ने कुछ और किताबें भी लिखीं। उनकी सारी किताबें धर्म और अध्यात्म के इर्द-गिर्द घूमती हैं।

अमिष ने इंटरव्यू में अपनी ज़िंदगी और करियर से जुड़े कई अनछुए पहलुओं के बारे में बात की। वो कहते हैं, "मेरी ज़िंदगी पर मेरी किताबों का बहुत आशीर्वाद है। यश मिला, सफलता मिली। मेरा पूरा चरित्र बदल गया। भगवान का ये सबसे बड़ा आशीर्वाद है कि वो आपकी दुनिया नहीं बदलते, वो आपको बदलते हैं।"

भारतीय संस्कृति और सभ्यता में अमीष की खासी दिलचस्पी है, जो उनकी किताबों में देखने को मिलती है। इंटरव्यू के दौरान उन्होंने कहा, "जब मैं बच्चा था, दूसरी क्लास में मुझे सिखाया गया था कि हमारे देश में चार मौसम होते हैं, गर्मी पतझड़ सर्दी और बसंत। मैंने टीचर से पूछा, मैडम मानसून का क्या हुआ? इतने साल हो गए, अब मेरा बच्चा स्कूल में पढ़ रहा है, उसको भी यही पढ़ाया जा रहा है। अरे 4 मौसम यूरोप में होते हैं, हमारे भारत में 6 मौसम होते हैं। लेकिन नहीं, सबको अंग्रेज़ बनना है। भारत के बारे में कुछ मत सिखाइये।"

नीलेश मिसरा के यूट्यूब चैनल पर चल रही 'द स्लो इंटरव्यू' सीरीज़ में इससे पहले भी कई कलाकार मेहमान बनकर आ चुके हैं। इनमें पद्मश्री एक्टर मनोज बाजपेयी और नवाज़ुद्दीन सिद्दीक़ी, लोक गायिका मालिनी अवस्थी, फिल्म निर्माता निर्देशक विशाल भारद्वाज, फिल्म राइटर सलीम ख़ान शामिल हैं।


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