बाज़ारों से गायब हुआ केसरिया रंग, न्यूज चैनलों पर एग्ज़िट पोल के बाद अचानक बढ़ी मांग 

बाज़ारों से गायब हुआ केसरिया रंग, न्यूज चैनलों पर एग्ज़िट पोल के बाद अचानक बढ़ी मांग केसरिया रंग अब बाज़ारों से लगभग गायब हो चुका है, इसकी बढ़ती भारी मांग का हाल यह है कि अब जो थोड़ा बहुत यह रंग बाज़ारों में बचा है उसके दामों में आग लग गई है (फोटो: गाँव कनेक्शन)

सतीश कश्यप

बाराबंकी। जिला मुख्यालय स्थित बाज़ारों में होली के रंगों की दुकानें सज गई हैं मगर यह होली हर बार की तरह नहीं है। इस बार की होली कुछ ख़ास होती दिख रही है क्योंकि इस होली पर अब राजनीति का भी रंग चढ़ गया है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की केसरिया होली की बात के बाद तमाम सर्वे में भाजपा की उत्तर प्रदेश में भारी बढ़त ने रंगों के बाज़ार को एक ख़ास रंग से सूना कर दिया है। यह रंग है केसरिया जो रंग अब बाज़ारों से लगभग गायब हो चुका है इसकी बढ़ती भारी मांग का हाल यह है कि अब जो थोड़ा बहुत यह रंग बाज़ारों में बचा है उसके दामों में आग लग गई है।

दरअसल अपने चुनावी मंच से प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने घोषणा की थी कि 11 मार्च के बाद केसरिया होली खेली जाएगी और प्रधानमंत्री की इस बात का असर अब बाज़ारों में दिखने लगा है।एक्ज़िट पोल में भाजपा की बढ़त की संभावनाओं के बाद बाज़ारों से केसरिया रंग की इतनी बिक्री हुई कि यह रंग अब गायब सा हो गया है। यह रंग या तो अब बाज़ारों में है नहीं या जो थोड़ा बहुत है भी उसके भाव सातवें आसमान छू रहे हैं। केसरिया रंग की अचानक बढ़ी मांग से बाकी रंगों की बिक्री कम दिखाई दे रही है।

रंगों के विक्रेताओं की अगर माने तो केसरिया रंग गुरुवार से इतना बिक रहा है कि यह अब बाज़ारों से गायब हो गया है। जो रंग बचा है वह काफी महंगा हो गया है। लोग अब भी इस ख़ास रंग को खरीदने दुकानों पर आ रहे हैं। केसरिया रंग की अचानक बढ़ी मांग का हाल यह है कि बाकी रंग बिक ही नहीं पा रहे है। जब यह रंग नहीं मिल रहा है तभी लोग दूसरा रंग खरीद रहे हैं। जिलाधिकारी बाराबंकी आवास के करीब अपनी रंगों और तरह-तरह की पिचकारियों की दुकान लगाने वाले संतोष गुप्ता ने गाँव कनेक्शन से कहा, ‘कल (गुरुवार) जैसे ही न्यूज चैनलों पर बीजेपी को बढ़त दिखी उसी के बाद लोग जय-जय मोदी के नारे लगाते हुए केसरिया रंग खूब खरीदा है जो अब हमारी दुकान पर नहीं बचा है।’

बड़े तो बड़े छोटे-छोटे बच्चों के ऊपर भी मोदी का जादू सिर चढ़ कर बोल रहा है। बच्चे भी बाजार में केसरिया रंग ढूंढ़ रहे है और साथ में मोदी वाली पिचकारी भी खरीद रहे हैं। यह पहली बार होगा जब किसी कार्टून से ज्यादा बच्चे राजनेता वाली पिचकारी खरीद रहे हैं। बड़ेल निवासी प्रांजल यादव अभी उम्र में भले ही कम हो, उनकी उम्र चार वर्ष है लेकिन अबकी बार मोदी पिचकारी लेने को बोल रहा है। ये बात उनके पिता संजय यादव खुद कह रहे हैं। उनका कहना है कि बेटे की जिद पर हम मजबूर है मोदी पिचकारी खोज रहे हैं।

हालांकि 11 मार्च को नतीजे आने के बाद ही पता चलेगा कि यूपी में इस बार किसकी होली मनती है?

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