... तो सीज हो सकता है सपा का चुनाव चिन्ह, बिना साइकिल मैदान में उतरेंगे मुलायम-अखिलेश 

... तो सीज हो सकता है सपा का चुनाव चिन्ह, बिना साइकिल मैदान में उतरेंगे मुलायम-अखिलेश गांव कनेक्शन अखबार में प्रकाशित खबर।

मनीष मिश्र/ अरविंद शुक्ला

लखनऊ। दो फाड़ समाजवादी पार्टी में अब लड़ाई पार्टी और चुनाव चिन्ह को लेकर है। आने वाले विधानसभा चुनाव में अखिलेश या मुलायम में से कौन सा गुट साइकिल निशान के साथ चुनाव लड़ेगा इस पर जोर आजमाइश चल रही है लेकिन मामला चुनाव आयोग पहुंच गया है। पूर्व चुनाव आयुक्त और संविधान के जानकारों के मुताबिक संभव है कि साइकिल चुनाव चिन्ह तुरंत दोनों को न मिले और विधानसभा चुनाव दोनों को बिना साइकिल के ही लड़ना पड़े।

चुनाव आयोग को इस मामले को निपटाने के लिए कम से कम दो से तीन महीने लगेंगे, तब तक आयोग साइकिल सिंबल सीज कर देगा। प्रदेश में विधानसभा चुनाव दो महीने में होने की संभावना है। ऐसी स्थिति में चुनाव आयोग दोनों दलों को अलग-अलग चुनाव चिन्ह आवंटित कर देगा।
एसवाई कुरैशी, भारत के पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त

“दोनों धड़े चुनाव आयोग में अपने बहुमत के लिए हलफनामा देंगे। इसके बाद आयोग तय करेगा कि चुनाव चिन्ह किसके पास रहे। बहुमत के लिए सांसदों, विधायकों और पार्टी पदाधिकारियों की संख्या का हलफनामे के रूप में साक्ष्य देना होगा।” भारत के पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त एसवाई कुरैशी ने गाँव कनेक्शन को फोन पर बताया। वो आगे बताते हैं, “चुनाव आयोग को इस मामले को निपटाने के लिए कम से कम दो से तीन महीने लगेंगे, तब तक आयोग साइकिल सिंबल सीज कर देगा। प्रदेश में विधानसभा चुनाव दो महीने में होने की संभावना है। ऐसी स्थिति में चुनाव आयोग दोनों दलों को अलग-अलग चुनाव चिन्ह आवंटित कर देगा।”

जिसके पास बहुमत है पार्टी और चुनाव चिन्ह उसी का होगा, बहुमत के आधार पर चुनाव आयोग में दावेदार अपना पक्ष रखेंगे। यह मुलायम परिवार का अंदरूनी विवाद है इस पर देश का कानून नहीं बल्कि पार्टी के संविधान के मुताबिक ही काम होगा।
सुभाष कश्यप, पूर्व लोकसभा महासचिव एवं संविधान विशेषज्ञ

संविधान विशेषज्ञ सुभाष कश्यप इस पूरे विवाद को परिवार की अंदरुनी लड़ाई बताते हुए फोन पर कहा, “जिसके पास बहुमत है पार्टी उसी की होगी, बहुमत के आधार पर चुनाव आयोग में दावेदार अपना पक्ष रखेंगे। ये मुलायम परिवार का अंदरूनी विवाद है इस पर देश का कानून नहीं बल्कि पार्टी के संविधान के मुताबिक ही काम होगा।”

अगर दोनों धड़े चुनाव आयोग के पास अपनी दावेदारी पेश करते हैँ, तो पूरी जांच पड़ताल के बाद निर्णय आने तक चुनाव आयोग साइकिल सिंबल को सीज कर देगा।
केजी राव, भारत के पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त

भारत के पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त केजी राव कहते हैं, “अगर दोनों धड़े चुनाव आयोग के पास अपनी दावेदारी पेश करते हैँ, तो पूरी जांच पड़ताल के बाद निर्णय आने तक चुनाव आयोग साइकिल सिंबल को सीज कर देगा।”

लखनऊ विश्वविद्यालय में राजनीति शास्त्र के प्रोफेसर कविराज इस पूरे घटनाक्रम कहते हैं, “जितनी तेजी से एक्शन हुए उससे लगा रहा है अखिलेश को पार्टी का सार्वभौमिक नेता बनाने के लिए सब कुछ स्क्रिप्टेड था, जिस तरह 200 से ज्यादा विधायक अखिलेश के साथ आए, इससे साबित करने की कोशिश हुई कि उन्हें पार्टी में चुनौती देने वाला कोई नहीं है। इस घटना से पहले इतने लोग अखिलेश के साथ नहीं थे लेकिन अब हैं।

Share it
Top