आत्मा और मन के विज्ञान में बनाएं करियर

आत्मा और मन के विज्ञान में बनाएं करियरफोटो: प्रतीकात्मक

साइकोलॉजी ग्रीक भाषा के दो शब्दों ‘साइको’ अर्थात आत्मा तथा लोगोस अर्थात विज्ञान से मिल कर बना है, आज इसे मनोविज्ञान के नाम से भी जाना जाता है। आत्मा एवं मन का विज्ञान, मनोविज्ञान बहतु ही इंट्रेस्टिंग विषय है इससे के जरिए आप हर उम्र के व्यक्ति के मन की बात सहजता से जान सकते हैं। आज की तनाव भरी, तेज और स्पर्धा से भरी जिन्दगी में लोग दूसरे से आगे निकलने की होड़ में हसंना-खुश होना ही भूलते जा रहे हैं जिसकी वजह से इंसान को कई तरह की दिमागी बीमार होने लगी हैं। अवसाद सबसे प्रमुख है। ऐसे में लोग आत्महत्या जैसे कदम उठाने में भी नहीं हिचकिचाता, ऐसे में मनोविज्ञान उसके लिए किसी वरदान से कम नहीं है।

लखनऊ। हमारी रोजमर्रा की जिंदगी में तनाव के कारण आजकल मनोवैज्ञानिकों की मांग काफी बढ़ रही है। अब मनोवैज्ञानिकों के पास जाना मानसिक रोगी नहीं कहलाता है। जबकि बीते कुछ वर्षों में लोग मनोवैज्ञानिक के पास जाना पसंद नहीं करते थे। लखनऊ विश्वविद्यालय के मनोविज्ञान के प्रोफेसर डॉ. पी सी मिश्रा बताते हैं “अब आजकल कई विद्यालयों और महाविद्यालयों में मनोवैज्ञानिक या परामर्शदाता की नियमित व्यवस्था की जाती है। यह व्यवस्था विद्यार्थियों और अध्यापकों दोनों के लिए महत्वपूर्ण साबित हुई है। यह क्षेत्र बहुत ही व्यापक है यहां करियर से जुड़े अनेक विकल्प हैं।”

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शैक्षिक योग्यता

कई जगह 10 वीं कक्षा के बाद मनोविज्ञान एक विषय के रूप में पढ़ाया जाता है। यहां से इसकी नींव मजबूत की जा सकती है। हालांकि मनोविज्ञान में स्नातक कोर्स करने के लिए अभ्यर्थी का 12 वीं कक्षा पास होना जरूरी है। इसके बाद पोस्ट ग्रेजुएशन और बाद में एमफिल और पीएचडी तक की जा सकती है।

क्या हैं कोर्स के नाम

बीए इन साइकोलॉजी, बीए ऑनर्स इन साइकोलॉजी, बीएससी इन अप्लायड साइकोलॉजी, पीजी डिप्लोमा इन गाइडेंस एंड काउंसलिंग, पीजी डिप्लोमा इन चाइल्ड साइकोलॉजी केयर एंड मैनेजमेंट, पीजी डिप्लोमा इन क्लिनिकल एंड कम्युनिटी साइकोलॉजी जैसे कोर्स किए जा सकते हैं। वैसे तो सभी विश्वविद्यालय और कई निजी संस्थानों से यह कोर्स किया जा सकता है।

कहां-कहां हैं मौके

डॉ. पी सी मिश्रा बताते हैं “मनोवैज्ञानिकों की जरूरत अब हर क्षेत्र में पड़ने लगी है। जेलों में कैदियों को सुधारने का काम हो या समाज सेवा में जुटे स्वयं सेवी संगठन। हर जगह ऐसे विशेषज्ञों की जरूरत है। इसका इस्तेमाल हर क्षेत्र में बहुत उपयोगी साबित हुआ है, फिर चाहे वह बच्चों से जुड़ा बाल मनोविज्ञान हो या जानवरों से जुड़ा पशु-मनोविज्ञान। शिक्षा मनोविज्ञान, सामाजिक मनोविज्ञान, औद्योगिक मनोविज्ञान, शारीरिक मनोविज्ञान, खेल मनोविज्ञान, सैन्य मनोविज्ञान, क्लिनिकल मनोविज्ञान, असामान्य मनोविज्ञान इत्यादि अनगिनत शाखाएं इस विषय की विशेषताएं हैं। मनोवैज्ञानिक निजी तौर पर भी अपनी सेवाएं देकर अच्छी कमाई कर सकते हैं।” आगे डॉ. मिश्रा बताते हैं “खेल के क्षेत्र में भी खिलाड़ियों को मानसिक रूप से मजबूत बनाने रखने के लिए मनोवैज्ञानिकों की जरूरत पड़ने लगी है। विभिन्न गैर सरकारी कंपनियां और सरकारी संस्थान अपने बेहतर कर्मचारियों के चयन के लिए भी इनकी सेवाएं लेती हैं।”

वेतन

डॉ. पीसी मिश्रा बताते हैं “इसमें वेतन के मानक विभिन्न क्षेत्रों के हिसाब से तय किये जाते हैं। शिक्षा के क्षेत्र में भाग्य आजमाना चाहते हैं तो शुरुआती दौर में 20,000 -30,000 रुपए प्रति माह तक वेतन पा सकते हैं। अगर आप किसी कम्पनी में बतौर काउंसलर अपनी सेवाएं देना चाहते हैं तो 20,00-30,000 रुपए शुरुआती दौर में आसानी से मिल जाते हैं। जबकि सीनियर रेजिडेन्शियल डॉक्टर एवं साइकोलॉजिस्ट 45,000-55,000 रुपए प्रति माह तक कमा लेते हैं। अनुभव व योग्यता के आधार पर इस क्षेत्र में पैसे की कमी नहीं है।”

आज इस विषय की मांग इस हद तक बढ़ चुकी है कि प्रतिष्ठित संस्थान से मनोविज्ञान का कोर्स पूरा करते ही प्लेसमेंट मिल जाता है। इलाहाबाद विश्वविद्यालय, लखनऊ विश्वविद्यालय तथा बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय, वाराणसी में कई तरह के मनोविज्ञान के पाठ्यक्रम उपलब्ध हैं। मनोविज्ञान की सामान्य शिक्षा के लिए स्नातक तथा स्नातकोत्तर पाठ्यक्रम देश के लगभग सभी विश्वविद्यालयों में उपलब्ध हैं और अगर इसे कॅरियर के रूप में चुनना है तो विशिष्ट अध्ययन संस्थानों से डिग्री तथा डिप्लोमा के विशेष पाठ्यक्रम किए जा सकते हैं। सेंट्रल इंस्टीट्यूट ऑफ साइकोलॉजी, कांकेरांची, में डिप्लोमा इन साइकोलॉजिकल मेडिसिन, मेडिसिन एंड सोशल साइकोलॉजी, साइकोलॉजिकल सोशल वर्क पाठ्यक्रम उपलब्ध हैं, जबकि नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ मेंटल हेल्थ एंड न्यूरो साइंस, बैंगलुरू में क्लीनिकल साइकोलॉजी में पीएचडी, साइकेट्रिक नर्सिंग में डिप्लोमा पाठ्यक्रम की सुविधा है।
डॉ. सीपी मिश्रा, प्रोफेसर मनोविज्ञान, लखनऊ विश्वविद्यालय

संस्थान

मनोविज्ञान का पाठ्यक्रम कराने वाले देश के प्रमुख विश्वविद्यालय/संस्थान हैं-

  • जामिया मिलिया इस्लामिया, जामिया नगर, नई दिल्ली
  • बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय, वाराणसी
  • नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ मेंटल हेल्थ एंड न्यूरो साइंस, बेगलुरु
  • रांची तांत्रिका-मनोविकृति विज्ञान एवं समवर्गी विज्ञान संस्थान, रांची
  • यूनिवर्सिटी ऑफ इलाहाबाद, इलाहाबाद
  • एमिटी इंस्टीट्यूट ऑफ साइकोलॉजी ऐंड अलॉइड साइंसेस, नोएडा

साइकेट्रिस्ट एवं साइकोलॉजिस्ट है फर्क

डॉ. पीसी मिश्रा बताते हैं “एमबीबीएस की डिग्री पाने वाले छात्र साइकेट्रिस्ट बन सकते हैं, जबकि एमए अथवा एमएससी साइकोलॉजी पढ़ने वाले छात्र साइकोलॉजिस्ट बन सकते हैं। दोनों ही प्रोफेशनल डॉक्टर हैं। बस फर्क इतना ही है कि साइकेट्रिस्ट मानसिक रोगों को दूर करने की दवा भी दे सकता है, परन्तु साइकोलॉजिस्ट को अभी तक यह अधिकार नहीं दिया गया है। हां, वह मरीज की काउंसलिंग कर उसे अच्छे साइकेट्रिस्ट से दवा लेने का परामर्श अवश्य दे सकता है।”

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