रिटेल मैनेजमेंट में बनाएं करियर 

रिटेल मैनेजमेंट में बनाएं करियर फोटो प्रतीकात्मक

गाँव कनेक्शन नेटवर्क

लखनऊ। बेहद कठिन व प्रतिस्पर्धी होती व्यापारिक परिस्थितियों में सुपरमार्केट या हाइपरमार्केट का प्रबंधन ही खुदरा प्रबंधन (रीटेल मैनेजमेंट) कहलाता है। पिछले दशक में इस उद्योग ने भारत में काफी विकास किया है। बिजनेस को आगे बढ़ाने के लिए कम्पनियां ग्राहकों को लुभाने के सभी हथकंडे आजमा चुकी हैं। रिटेल मैनेजमेंट एक ऐसा विषय है जिसके लिए आपको ब्रांड्स, उनकी स्ट्रेट्जी और कस्टमर को जीतने की बढ़िया जानकारी होनी चाहिए। रिटेल मैनेजमेंट निश्चित तौर पर एक गैर-पारंपरिक विषय है। इस विषय को आप तभी चुनें, जब आपके पास इस क्षेत्र की बारीकियों को समझने की क्षमता हो और आपका झुकाव विज्ञापन की ओर भी हो। इसके बाद तो बस, एक सुनहरा करियर आपका इंतजार कर रहा होगा।

करियर काउंसलर एकता श्रीवास्तव बताती हैं “यह एक ऐसा क्षेत्र है जो ‘ग्राहक सर्वोपरि है’ के आदर्श पर काम करता है। भारतीय उपभोक्ताओं की खर्च योग्य आय बढ़ने के कारण वे मनचाही खरीददारी कर रहे हैं। फिर चाहे यह खरीद किसी पारंपरिक वस्तु की हो या आधुनिक उत्पाद की, नामी स्टोर्स में जाने का चलन अब तेजी से बढ़ रहा है। ग्राहकों की संख्या के अनुसार, भारत विश्‍व का पांचवां सबसे बड़ा रिटेल डेस्टिनेशन भी है।” वो आगे बताती हैं “आज लगभग हर चीज़ छूट के साथ उपलब्ध है। वास्तव में यह सेल सीज़न है वो भी बिना किसी कारण के। आज लगभग सभी ब्रांड्स बाज़ार में अपनी पैठ बढ़ाने के लिए अपनी फैक्ट्री आउटलेट से लेकर सुपरमार्केट तक सभी जगह छूट प्रदान कर रहे हैं।” आप रिटेल मैनेजमेंट में एमबीए, रिटेल में सर्टिफिकेट, डिप्लोमा कर सकते हैं। इसके अलावा बीबीए इन रिटेलिंग, पीजी इन रिटेल एंड मार्केटिंग, पीजी डिप्लोमा इन विजुअल मर्चेंडाइजिंग एंड स्टोर डिजाइन भी किया जा सकता है। ऐसे कोर्स में मुख्य रूप से रिटेल सर्विसेज, मर्चेंडाइजिंग और फ्रैंचाइजी के बारे में सिखाया जाता है।

कोर्स एंड क्वालिफिकेशन

यदि आप 10+2 उत्तीर्ण हैं, तो रिटेल मैनेजमेंट में स्नातक कर सकते हैं। स्नातक करने के बाद एमबीए-रिटेल मैनेजमेंट या फिर पीजी डिप्लोमा कर सकते हैं। आईआईएम से लेकर विश्वविद्यालयों एवं संस्थानों में प्रवेश का मानक अलग-अलग है। इस फील्ड में अच्छी कम्यूनिकेशन स्किल के साथ विनम्र स्वभाव होना चाहिए। रिटेल मैनेजमेंट में स्टूडेंट को मार्केटिंग, इंफार्मेशन, फाइनेंस मैनेजमेंट, अकाउंटिंग आदि विषयों के बारे में पढ़ाया जाता है।

कहां हैं संभावनाएं?

देश में बहुत से शॉपिंग मॉल हैं और कई कम्पनियों के अनगिनत रिटेल आउटलेट्स एवं शोरूम, हर छोटे-बड़े शहर में उपलब्ध हैं। प्रत्येक रिटेल कम्पनी में टीम मेंबर से लेकर सीनियर मैनेजर के जॉब्स होते हैं। अगर आपकी अंग्रेजी भाषा पर अच्छी पकड़ है, तो मल्टीनेशनल कम्पनियों के विदेश में स्थित शोरूम में नौकरी पा सकते हैं। यहां मार्केटिंग से लेकर ब्रांडिंग तक के अवसर मौजूद हैं। आप मल्टीब्रांड स्टोर, बैंक, शॉपिंग मॉल्स, कम्पनियों के बड़े-बड़े शोरूम में नौकरी पा सकते हैं। किसी भी बडे रिटेल स्टोर में 250 से लेकर 500 लोगों की आवश्यकता होती है और हर मॉल में दो से तीन बड़े रिटेल स्टोर होते ही हैं।

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कार्यक्षेत्र

स्नातक छात्रों के लिए इस क्षेत्र में रोज़गार की काफी संभावनाएं हैं। आप सेल्स एग्जीक्युटिव से अपने करियर की शुरुआत कर सकते हैं या सीधे सेल्स मैनेजर अथवा मार्केटिंग मैनेजर भी बन सकते हैं। यहां तक कि आप किसी बड़े रीटेल ब्रांड की फ्रेंचाइज़ लेकर अपना खुद का काम शुरू कर सकते हैं। कार्य के परिमाण के आधार पर आप सेल्स एग्जीक्युटिव अथवा फ्लोर मैनेजर के तौर पर 15000 से 25000 रुपए तक मासिक वेतन प्राप्त कर सकते हैं। यहां आपकी ज़िम्मेदारी होती है- ग्राहकों को फ्लोर पर मैनेज करना व उन्हें खरीददारी में सहायता करना। कॉर्पोरेट लेवल पर जाकर आप बिजनेस डेवलपमेंट मैनेजर भी बन सकते हैं।

वेतन

कार्य के परिमाण के आधार पर आप सेल्स एग्जीक्युटिव अथवा फ्लोर मैनेजर के तौर पर 15000 से 25000 रुपए तक मासिक वेतन प्राप्त कर सकते हैं। यहां आपकी ज़िम्मेदारी होती है- ग्राहकों को फ्लोर पर मैनेज करना व उन्हें खरीददारी में सहायता करना। कॉर्पोरेट लेवल पर जाकर आप बिजनेस डेवलपमेंट मैनेजर भी बन सकते हैं।

यहां है अवसर

अनेक बड़ी कंपनियों के रिटेल के क्षेत्र में आने से इस सेक्टर में युवाओं के लिए जॉब के नए अवसर पैदा हो गए हैं। रिटेल में स्टोर ऑपरेशन, सप्लाई चेन, फाइनेंस, इंवेंटरी बिलिंग, लॉजिस्टिक आदि प्रमुख डिपार्टमेंट हैं। इसमें सेल्स मैनेजर, एरिया मैनेजर, रीजनल मैनेजर के अलावा कुछ प्रमुख पद हैं-

रिटेल सेल्स रिप्रेजेंटेटिव: रिटेल व्यवसाय का यह इंट्री लेवल पद है। इस पद पर कार्य करने वाले व्यक्ति को उत्पादों, ग्राहकों और दुकानों का अच्छा ज्ञान होना चाहिए।

स्टोर मैनेजर: स्टोर मैनेजर, स्टोर के कर्मचारियों का प्रबंधक होता है। यह क्षेत्रीय प्रबंधक एवं कम्पनी के मालिक को रिपोर्ट करता है।

रिटेल मैनेजर: रिटेल मैनेजर का दायित्व किसी आउटलेट के कार्यों की योजना बनाना एवं समन्वय बनाना होता है। इसमें रिटेल ऑर्डर तथा स्टॉक की निगरानी तथा सप्लाई का विश्लेषण कार्य शमिल होता है। प्रबंधन में मास्टर डिग्री धारक रिटेल प्रबंधक के रूप में कॅरियर शुरू करते हैं।

रिटेल क्रेता एवं मर्चेंडाइज: ये रिटेल शॉप के लिए सामग्री चुनते और खरीदते हैं। जिस व्यक्तिको ग्राहकों की समझ और बाजार के रुख की जानकारी है, वे रिटेल क्रेता के रूप में पहचान आसानी से बना सकते हैं।

विजुअल मर्चेंडाइजर: ये किसी भी ब्रांड को डिजाइन करते हैं, इसलिए वे किसी भी उद्योग की रीढ होते हैं। इस तरह के व्यक्ति तकनीकी नियोजक तथा स्टोर नियोजक भी बन सकते हैं।

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पढ़ाई पर खर्च

कॉलेज या इंस्टीट्यूट के चुनाव के आधार पर रीटेल मैनेजमेंट में किसी कोर्स की वार्षिक फीस 1 से 3 लाख होती है। यदि आप यह कोर्स टियर-1 के बी-स्कूलों जैसे आईआईएम इत्यादि से करते हैं तो फीस 1 से 3 से ज्यादा हो सकती है। यदि आप किसी ऐसी अंतर्राष्ट्रीय यूनिवर्सिटी का चुनाव करते हैं जो कि आपको विदेश में शिक्षा का अवसर प्रदान करे, तो उसकी फीस इससे भी ज्यादा हो सकती है।

छात्रवृत्ति

कई कॉलेज अच्छे छात्रों को स्कॉलरशिप भी देते हैं हालांकि भारत में यह कम प्रचलित है परन्तु विदेशी संस्थान कैट अथवा जीमैट में अच्छा स्कोर करने वाले छात्रों को पूरी स्कॉलरशिप प्रदान करते हैं हालांकि यहां भी आपको अतिरिक्त खर्चों जैसे रहने-खाने का प्रबंध स्वयं ही करना होगा। जीमैट व कैट स्कोर के आधार पर ही छात्रवृत्ति प्रदान करते है। इसके साथ ही छात्र पढ़ाई के लिए शिक्षा ऋण भी ले कते हैं।

प्रमुख संस्थान

जयपुरिया इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट, लखनऊ

इंटरनेटशनल एकेडमी फॉर सेर्टीफीकेट एंड ट्रेनिंग, नोएडा

एक्मन इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट, ग्रेटर नोएडा

एशियन स्कूल ऑफ िबजनेस मैनेजमेंट, भुवनेश्वर

इंटीग्रल यूनिर्वसिटी, लखनऊ

इंडियन इंस्टीट्यूड ऑफ मैनेजमेंट, अहमदाबाद

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